कालसर्प दोष कैलकुलेटर

कालसर्प दोष तब बनता है जब सूर्य से शनि तक के सातों ग्रह राहु–केतु अक्ष के एक ही ओर हों।

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टाइम ज़ोन सेटिंग
स्वचालित विकल्प उस स्थान के आधिकारिक टाइम ज़ोन इतिहास का उपयोग करता है, जिसमें भारत का +06:30 युद्धकालीन समय (1942–45) भी शामिल है। 1948 से पहले कोलकाता में जन्म कभी-कभी कलकत्ता समय (+05:53:20) में, और 1955 से पहले मुंबई में बॉम्बे समय (+04:51) में दर्ज होते थे; अगर आपके जन्म रिकॉर्ड में इनका उपयोग हुआ है तो उसे यहां दर्ज करें।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कालसर्प दोष क्या है?

यह वह स्थिति है जिसमें सूर्य, चंद्रमा, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र और शनि — सभी राहु और केतु के बीच घिरे हों। इसका नाम राहु जिस भाव में हो उसके अनुसार रखा जाता है, जिससे अनंत से शेषनाग तक 12 प्रकार बनते हैं।

क्या कालसर्प दोष का उल्लेख शास्त्रीय ग्रंथों में है?

बृहत् पराशर होरा शास्त्र में इसका वर्णन नहीं है; यह बाद की परंपरा है। कई ज्योतिषी इसके प्रभाव तभी मानते हैं जब कुंडली के बाकी योग भी इसका समर्थन करें।

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