चैत्र नवरात्रि 2044
चैत्र नवरात्रि वसंत की नवरात्रि है: चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से नवमी तक मां दुर्गा के नौ रूपों की उपासना की नौ रातें। इसका समापन राम नवमी पर होता है।
2044 में चैत्र नवरात्रि का पर्व बुधवार, 30 मार्च 2044 से बुधवार, 6 अप्रैल 2044 तक है।
घटस्थापना: बुधवार, 30 मार्च 2044
- शुक्ल प्रतिपदा प्रारंभ: 29 मार्च 2044, 14:56
- शुक्ल प्रतिपदा समाप्त: 30 मार्च 2044, 13:03
नई दिल्ली के लिए तारीख और समय।
चैत्र नवरात्रि 2044 के सभी दिन
| तारीख | पर्व / अनुष्ठान | तिथि / समय |
|---|---|---|
| बुधवार, 30 मार्च | घटस्थापना | शुक्ल प्रतिपदा: 29 मार्च 2044, 14:56 से 30 मार्च 2044, 13:03 तक |
| बुधवार, 30 मार्च | नवरात्रि का दिन 1 — शैलपुत्री | शुक्ल प्रतिपदा: 29 मार्च 2044, 14:56 से 30 मार्च 2044, 13:03 तक |
| गुरुवार, 31 मार्च | नवरात्रि का दिन 2 — ब्रह्मचारिणी | शुक्ल द्वितीया: 30 मार्च 2044, 13:03 से 31 मार्च 2044, 10:48 तक |
| शुक्रवार, 1 अप्रैल | नवरात्रि का दिन 3 — चंद्रघंटा | शुक्ल तृतीया: 31 मार्च 2044, 10:48 से 1 अप्रैल 2044, 08:19 तक |
| शुक्रवार, 1 अप्रैल | नवरात्रि का दिन 4 — कूष्मांडा | शुक्ल चतुर्थी: 1 अप्रैल 2044, 08:19 से 2 अप्रैल 2044, 05:44 तक |
| शनिवार, 2 अप्रैल | नवरात्रि का दिन 5 — स्कंदमाता | शुक्ल पंचमी: 2 अप्रैल 2044, 05:44 से 3 अप्रैल 2044, 03:08 तक |
| रविवार, 3 अप्रैल | नवरात्रि का दिन 6 — कात्यायनी | शुक्ल षष्ठी: 3 अप्रैल 2044, 03:08 से 4 अप्रैल 2044, 00:38 तक |
| सोमवार, 4 अप्रैल | नवरात्रि का दिन 7 — कालरात्रि | शुक्ल सप्तमी: 4 अप्रैल 2044, 00:38 से 22:19 तक |
| मंगलवार, 5 अप्रैल | नवरात्रि का दिन 8 — महागौरी | शुक्ल अष्टमी: 4 अप्रैल 2044, 22:19 से 5 अप्रैल 2044, 20:14 तक |
| बुधवार, 6 अप्रैल | नवरात्रि का दिन 9 — सिद्धिदात्री | शुक्ल नवमी: 5 अप्रैल 2044, 20:14 से 6 अप्रैल 2044, 18:27 तक |
तारीख कैसे तय होती है
घटस्थापना का पर्व चैत्र की शुक्ल प्रतिपदा को होता है। दिन इस नियम से तय होता है: सूर्योदय के समय व्याप्त तिथि (उदया तिथि)। जब तिथि दो दिनों में उस समय को छूती है, तो जिस दिन वह अधिक समय तक व्याप्त रहती है, वही दिन लिया जाता है।
नई दिल्ली के लिए गणना। अलग-अलग शहरों और क्षेत्रीय परंपराओं में त्योहार की तारीख एक दिन आगे-पीछे हो सकती है; अंतिम निर्णय आपके कुल पुरोहित के पंचांग का ही मान्य है।
कैसे मनाया जाता है
पहले दिन सुबह कलश स्थापित किया जाता है और जौ बोए जाते हैं (घटस्थापना)। भक्त उपवास रखते हैं या सात्विक भोजन करते हैं, हर दिन देवी के एक रूप की पूजा करते हैं, और अष्टमी या नवमी को छोटी कन्याओं को देवी मानकर पूजते हैं (कन्या पूजन)।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
2044 में चैत्र नवरात्रि कब है?
2044 में चैत्र नवरात्रि का पर्व बुधवार, 30 मार्च 2044 से बुधवार, 6 अप्रैल 2044 तक है। (नई दिल्ली)
चैत्र नवरात्रि की तारीख अलग-अलग कैलेंडरों में कभी-कभी अलग क्यों दिखती है?
हिंदू त्योहार चंद्र तिथि के अनुसार मनाए जाते हैं, और तिथि घड़ी के अलग-अलग समय पर शुरू और समाप्त होती है। हर त्योहार का एक नियम होता है कि तिथि दिन के किस भाग में होनी चाहिए — सूर्योदय, मध्याह्न, संध्या या मध्यरात्रि। जब तिथि दो दिनों में फैली होती है, तो किसी दूसरे शहर या दूसरी परंपरा के अनुसार नियम लागू करने वाले कैलेंडर अलग दिन पर पहुंच सकते हैं। हम अपना इस्तेमाल किया गया नियम और तिथि का समय दिखाते हैं, ताकि आप खुद जांच सकें।