दुर्गा पूजा 2024

दुर्गा पूजा बंगाल का सबसे बड़ा पर्व है, जो महिषासुर पर मां दुर्गा की विजय और अपनी संतानों के साथ हर वर्ष अपने मायके आने का उत्सव है। मुख्य दिन आश्विन शुक्ल पक्ष में षष्ठी से विजयादशमी तक होते हैं।

2024 में दुर्गा पूजा का पर्व बुधवार, 9 अक्टूबर 2024 से रविवार, 13 अक्टूबर 2024 तक है।

महासप्तमी: गुरुवार, 10 अक्टूबर 2024

  • शुक्ल सप्तमी प्रारंभ: 9 अक्टू॰ 2024, 12:14
  • शुक्ल सप्तमी समाप्त: 10 अक्टू॰ 2024, 12:32

कोलकाता के लिए तारीख और समय।

दुर्गा पूजा 2024 के सभी दिन

तारीखपर्व / अनुष्ठानतिथि / समय
बुधवार, 2 अक्टू॰महालया / सर्व पितृ अमावस्याअपराह्न मुहूर्त: 12:37 से 14:59 तक
बुधवार, 9 अक्टू॰महाषष्ठी (बोधन)शुक्ल षष्ठी: 8 अक्टू॰ 2024, 11:18 से 9 अक्टू॰ 2024, 12:14 तक
गुरुवार, 10 अक्टू॰महासप्तमीशुक्ल सप्तमी: 9 अक्टू॰ 2024, 12:14 से 10 अक्टू॰ 2024, 12:32 तक
शुक्रवार, 11 अक्टू॰महाअष्टमीशुक्ल अष्टमी: 10 अक्टू॰ 2024, 12:32 से 11 अक्टू॰ 2024, 12:07 तक
शनिवार, 12 अक्टू॰महानवमीशुक्ल नवमी: 11 अक्टू॰ 2024, 12:07 से 12 अक्टू॰ 2024, 10:59 तक
रविवार, 13 अक्टू॰विजयादशमीशुक्ल दशमी: 12 अक्टू॰ 2024, 10:59 से 13 अक्टू॰ 2024, 09:09 तक

तारीख कैसे तय होती है

महासप्तमी का पर्व आश्विन की शुक्ल सप्तमी को होता है। दिन इस नियम से तय होता है: सूर्योदय के समय व्याप्त तिथि (उदया तिथि)। जब तिथि दो दिनों में उस समय को छूती है, तो जिस दिन वह अधिक समय तक व्याप्त रहती है, वही दिन लिया जाता है।

कोलकाता के लिए गणना। अलग-अलग शहरों और क्षेत्रीय परंपराओं में त्योहार की तारीख एक दिन आगे-पीछे हो सकती है; अंतिम निर्णय आपके कुल पुरोहित के पंचांग का ही मान्य है।

कैसे मनाया जाता है

पंडालों और घरों में देवी की प्रतिमाएं स्थापित की जाती हैं; सप्तमी की शुरुआत नवपत्रिका स्नान से होती है, अष्टमी पर पुष्पांजलि और संधि पूजा, नवमी पर भव्य भोग, और दशमी पर विवाहित महिलाएं विसर्जन (बिसर्जन) से पहले सिंदूर खेला करती हैं।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

2024 में दुर्गा पूजा कब है?

2024 में दुर्गा पूजा का पर्व बुधवार, 9 अक्टूबर 2024 से रविवार, 13 अक्टूबर 2024 तक है। (कोलकाता)

दुर्गा पूजा की तारीख अलग-अलग कैलेंडरों में कभी-कभी अलग क्यों दिखती है?

हिंदू त्योहार चंद्र तिथि के अनुसार मनाए जाते हैं, और तिथि घड़ी के अलग-अलग समय पर शुरू और समाप्त होती है। हर त्योहार का एक नियम होता है कि तिथि दिन के किस भाग में होनी चाहिए — सूर्योदय, मध्याह्न, संध्या या मध्यरात्रि। जब तिथि दो दिनों में फैली होती है, तो किसी दूसरे शहर या दूसरी परंपरा के अनुसार नियम लागू करने वाले कैलेंडर अलग दिन पर पहुंच सकते हैं। हम अपना इस्तेमाल किया गया नियम और तिथि का समय दिखाते हैं, ताकि आप खुद जांच सकें।