वट सावित्री व्रत 2002
वट सावित्री व्रत विवाहित महिलाएं पति की लंबी आयु के लिए रखती हैं, उस कथा की स्मृति में जिसमें सावित्री ने अपने पति सत्यवान को यमराज से वापस पा लिया था। उत्तर भारत में यह ज्येष्ठ अमावस्या को पड़ता है; महाराष्ट्र, गुजरात और दक्षिण भारत में यही व्रत ज्येष्ठ पूर्णिमा (वट पूर्णिमा) को रखा जाता है।
2002 में वट सावित्री व्रत सोमवार, 10 जून 2002 को है।
- मध्याह्न पूजा मुहूर्त: 10 जून 2002, 10:56 से 13:44 तक
- अमावस्या प्रारंभ: 10 जून 2002, 05:07
- अमावस्या समाप्त: 11 जून 2002, 05:16
नई दिल्ली के लिए तारीख और समय।
तारीख कैसे तय होती है
वट सावित्री व्रत का पर्व वैशाख (अमांत) / ज्येष्ठ (पूर्णिमांत) की अमावस्या को होता है। दिन इस नियम से तय होता है: मध्याह्न (दिन का बीच वाला पांचवां भाग) में व्याप्त तिथि। जब तिथि दो दिनों में उस समय को छूती है, तो जिस दिन वह अधिक समय तक व्याप्त रहती है, वही दिन लिया जाता है।
नई दिल्ली के लिए गणना। अलग-अलग शहरों और क्षेत्रीय परंपराओं में त्योहार की तारीख एक दिन आगे-पीछे हो सकती है; अंतिम निर्णय आपके कुल पुरोहित के पंचांग का ही मान्य है।
कैसे मनाया जाता है
महिलाएं उपवास रखती हैं, बरगद (वट) के पेड़ की पूजा करती हैं, उसकी परिक्रमा करते हुए उस पर कच्चा सूत लपेटती हैं, और सावित्री-सत्यवान की कथा सुनती हैं।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
2002 में वट सावित्री व्रत कब है?
2002 में वट सावित्री व्रत सोमवार, 10 जून 2002 को है। (नई दिल्ली)
वट सावित्री व्रत की तारीख अलग-अलग कैलेंडरों में कभी-कभी अलग क्यों दिखती है?
हिंदू त्योहार चंद्र तिथि के अनुसार मनाए जाते हैं, और तिथि घड़ी के अलग-अलग समय पर शुरू और समाप्त होती है। हर त्योहार का एक नियम होता है कि तिथि दिन के किस भाग में होनी चाहिए — सूर्योदय, मध्याह्न, संध्या या मध्यरात्रि। जब तिथि दो दिनों में फैली होती है, तो किसी दूसरे शहर या दूसरी परंपरा के अनुसार नियम लागू करने वाले कैलेंडर अलग दिन पर पहुंच सकते हैं। हम अपना इस्तेमाल किया गया नियम और तिथि का समय दिखाते हैं, ताकि आप खुद जांच सकें।