विवाह मुहूर्त 2045

2045 में नई दिल्ली के लिए विवाह के 42 शुभ दिन, उन समय-अवधियों के साथ जिनमें सभी शर्तें पूरी होती हैं।

विवाह का अगला मुहूर्त: रविवार, 15 जनवरी 2045 — 19:52 – 04:43 (16 जन॰)

जनवरी 2045 · 3 दिन

तारीखमुहूर्त
रविवार, 15 जन॰
19:52 – 04:43 (16 जन॰)
नक्षत्र: मूल · तिथि: कृष्ण त्रयोदशी
सोमवार, 23 जन॰
10:57 – 07:12 (24 जन॰)
नक्षत्र: उत्तरा भाद्रपद · तिथि: शुक्ल पंचमी, शुक्ल षष्ठी
मंगलवार, 24 जन॰
07:12 – 06:02 (25 जन॰)
नक्षत्र: उत्तरा भाद्रपद, रेवती · तिथि: शुक्ल षष्ठी, शुक्ल सप्तमी

फ़रवरी 2045 · 0 दिन

फ़रवरी में कोई भी दिन सभी शर्तें पूरी नहीं करता।

मार्च 2045 · 0 दिन

मार्च में कोई भी दिन सभी शर्तें पूरी नहीं करता।

अप्रैल 2045 · 8 दिन

तारीखमुहूर्त
शनिवार, 15 अप्रैल
05:55 – 12:40
नक्षत्र: उत्तरा भाद्रपद · तिथि: कृष्ण त्रयोदशी
गुरुवार, 20 अप्रैल
06:04 – 20:41
नक्षत्र: रोहिणी · तिथि: शुक्ल तृतीया, शुक्ल चतुर्थी
शुक्रवार, 21 अप्रैल
07:47 – 15:33
नक्षत्र: मृगशिरा · तिथि: शुक्ल पंचमी
मंगलवार, 25 अप्रैल
04:17 (26 अप्रैल) – 05:44 (26 अप्रैल)
नक्षत्र: मघा · तिथि: शुक्ल दशमी
बुधवार, 26 अप्रैल
05:44 – 21:19
नक्षत्र: मघा · तिथि: शुक्ल दशमी, शुक्ल एकादशी
शुक्रवार, 28 अप्रैल
17:36 – 05:42 (29 अप्रैल)
नक्षत्र: उत्तरा फाल्गुनी, हस्त · तिथि: शुक्ल त्रयोदशी
शनिवार, 29 अप्रैल
05:42 – 15:08
नक्षत्र: हस्त · तिथि: शुक्ल त्रयोदशी, शुक्ल चतुर्दशी
रविवार, 30 अप्रैल
23:51 – 05:40 (1 मई)
नक्षत्र: स्वाति · तिथि: पूर्णिमा

मई 2045 · 9 दिन

तारीखमुहूर्त
सोमवार, 1 मई
05:40 – 10:58
नक्षत्र: स्वाति · तिथि: पूर्णिमा
मंगलवार, 2 मई
17:21 – 05:38 (3 मई)
नक्षत्र: अनुराधा · तिथि: कृष्ण द्वितीया
बुधवार, 3 मई
05:38 – 08:16
नक्षत्र: अनुराधा · तिथि: कृष्ण द्वितीया
गुरुवार, 4 मई
02:00 (5 मई) – 05:37 (5 मई)
नक्षत्र: मूल · तिथि: कृष्ण चतुर्थी
शुक्रवार, 5 मई
05:37 – 21:34
नक्षत्र: मूल · तिथि: कृष्ण चतुर्थी, कृष्ण पंचमी
शनिवार, 6 मई
00:07 (7 मई) – 05:35 (7 मई)
नक्षत्र: उत्तराषाढ़ा · तिथि: कृष्ण षष्ठी
रविवार, 7 मई
05:35 – 16:32
नक्षत्र: उत्तराषाढ़ा · तिथि: कृष्ण षष्ठी
शनिवार, 13 मई
11:55 – 05:30 (14 मई)
नक्षत्र: उत्तरा भाद्रपद, रेवती · तिथि: कृष्ण द्वादशी, कृष्ण त्रयोदशी
रविवार, 14 मई
05:30 – 09:46
नक्षत्र: रेवती · तिथि: कृष्ण त्रयोदशी

जून 2045 · 8 दिन

तारीखमुहूर्त
बुधवार, 21 जून
07:20 – 08:59
नक्षत्र: उत्तरा फाल्गुनी · तिथि: शुक्ल सप्तमी
गुरुवार, 22 जून
06:37 – 04:36 (23 जून)
नक्षत्र: हस्त · तिथि: शुक्ल अष्टमी, शुक्ल नवमी
शनिवार, 24 जून
05:58 – 21:18
नक्षत्र: स्वाति · तिथि: शुक्ल दशमी, शुक्ल एकादशी
सोमवार, 26 जून
07:17 – 05:25 (27 जून)
नक्षत्र: अनुराधा · तिथि: शुक्ल द्वादशी, शुक्ल त्रयोदशी
मंगलवार, 27 जून
05:25 – 08:36
नक्षत्र: अनुराधा · तिथि: शुक्ल त्रयोदशी
बुधवार, 28 जून
23:57 – 05:26 (29 जून)
नक्षत्र: मूल · तिथि: पूर्णिमा
गुरुवार, 29 जून
05:26 – 12:28
नक्षत्र: मूल · तिथि: पूर्णिमा
शुक्रवार, 30 जून
14:59 – 01:10 (1 जुल॰)
नक्षत्र: उत्तराषाढ़ा · तिथि: कृष्ण द्वितीया

जुलाई 2045 · 4 दिन

तारीखमुहूर्त
गुरुवार, 6 जुल॰
15:38 – 05:29 (7 जुल॰)
नक्षत्र: उत्तरा भाद्रपद · तिथि: कृष्ण सप्तमी, कृष्ण अष्टमी
शुक्रवार, 7 जुल॰
05:29 – 06:26
नक्षत्र: उत्तरा भाद्रपद · तिथि: कृष्ण अष्टमी
मंगलवार, 11 जुल॰
23:03 – 05:31 (12 जुल॰)
नक्षत्र: रोहिणी · तिथि: कृष्ण द्वादशी, कृष्ण त्रयोदशी
बुधवार, 12 जुल॰
05:31 – 22:41
नक्षत्र: रोहिणी, मृगशिरा · तिथि: कृष्ण त्रयोदशी

अगस्त 2045 · 0 दिन

अगस्त में कोई भी दिन सभी शर्तें पूरी नहीं करता।

सितंबर 2045 · 0 दिन

सितंबर में कोई भी दिन सभी शर्तें पूरी नहीं करता।

अक्टूबर 2045 · 0 दिन

अक्टूबर में कोई भी दिन सभी शर्तें पूरी नहीं करता।

नवंबर 2045 · 4 दिन

तारीखमुहूर्त
मंगलवार, 21 नव॰
06:48 – 13:20
नक्षत्र: रेवती · तिथि: शुक्ल द्वादशी
शुक्रवार, 24 नव॰
20:35 – 06:51 (25 नव॰)
नक्षत्र: रोहिणी · तिथि: कृष्ण प्रतिपदा
शनिवार, 25 नव॰
06:51 – 06:52 (26 नव॰)
नक्षत्र: रोहिणी, मृगशिरा · तिथि: कृष्ण प्रतिपदा, कृष्ण द्वितीया
रविवार, 26 नव॰
06:52 – 18:52
नक्षत्र: मृगशिरा · तिथि: कृष्ण द्वितीया, कृष्ण तृतीया

दिसंबर 2045 · 6 दिन

तारीखमुहूर्त
शनिवार, 2 दिस॰
12:11 – 06:57 (3 दिस॰)
नक्षत्र: उत्तरा फाल्गुनी · तिथि: कृष्ण नवमी, कृष्ण दशमी
रविवार, 3 दिस॰
06:57 – 11:30
22:37 – 06:58 (4 दिस॰)
नक्षत्र: उत्तरा फाल्गुनी, हस्त · तिथि: कृष्ण दशमी, कृष्ण एकादशी
सोमवार, 4 दिस॰
06:58 – 08:48
नक्षत्र: हस्त · तिथि: कृष्ण एकादशी
मंगलवार, 5 दिस॰
07:54 – 02:04 (6 दिस॰)
नक्षत्र: स्वाति · तिथि: कृष्ण द्वादशी, कृष्ण त्रयोदशी
सोमवार, 11 दिस॰
10:14 – 07:04 (12 दिस॰)
नक्षत्र: उत्तराषाढ़ा · तिथि: शुक्ल तृतीया, शुक्ल चतुर्थी
मंगलवार, 12 दिस॰
07:04 – 08:28
नक्षत्र: उत्तराषाढ़ा · तिथि: शुक्ल चतुर्थी

नई दिल्ली के लिए गणना। समय-अवधियां स्थानीय समय में दिखाई गई हैं; जो अवधि मध्यरात्रि पार करती है, वह उसी दिन की मानी जाती है जिस दिन वह शुरू होती है (हिंदू दिन सूर्योदय से सूर्योदय तक चलता है)।

प्रयुक्त नियम

हिंदू विवाह परंपरागत रूप से पंचांग से चुने गए मुहूर्त में होते हैं। शास्त्रीय ग्रंथ विवाह की अनुमति केवल कुछ सौर मासों में देते हैं, चातुर्मास और उन अवधियों को वर्जित करते हैं जब विवाह के कारक शुक्र या गुरु अस्त हों, और अशुभ योग व करण से रहित अनुकूल नक्षत्र देखते हैं। इसके बाद कुल ज्योतिषी उस अवधि के भीतर फेरों के लिए सटीक लग्न तय करते हैं।

  • चंद्रमा का नक्षत्र: रोहिणी, मृगशिरा, मघा, उत्तरा फाल्गुनी, हस्त, स्वाति, अनुराधा, मूल, उत्तराषाढ़ा, उत्तरा भाद्रपद, रेवती
  • वर्जित पद: मघा और मूल का पहला पद, रेवती का अंतिम पद
  • सूर्य की राशि (सौर मास): मेष, वृषभ, मिथुन, वृश्चिक, मकर, कुंभ
  • वर्जित योग: विष्कंभ, अतिगंड, शूल, गंड, व्याघात, वज्र, व्यतीपात, परिघ, वैधृति
  • वर्जित करण: विष्टि (भद्रा), शकुनि, चतुष्पद, नाग
  • अधिक मास (मलमास) में कोई मुहूर्त नहीं
  • चातुर्मास (देवशयनी से देवउठनी एकादशी तक) में कोई मुहूर्त नहीं
  • शुक्र या गुरु के अस्त (तारा अस्त) रहने पर, और अस्त होने से पहले तथा उदय होने के बाद के 3 दिनों में कोई मुहूर्त नहीं
  • जो दिन किसी वर्जित अवधि को छूता है, उसे पूरी तरह छोड़ दिया जाता है

ये सामान्य रूप से शुभ समय-अवधियां हैं। किसी संस्कार के लिए ज्योतिषी चुने गए क्षण का लग्न और संबंधित व्यक्तियों का तारा बल व चंद्र बल भी देखते हैं — एक ही अवधि किसी एक व्यक्ति के लिए दूसरे की तुलना में अधिक अनुकूल हो सकती है।

ज्योतिषी से अपना व्यक्तिगत मुहूर्त निकलवाएं किसी अनुभवी ज्योतिषी से बात करें।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

2045 में विवाह के कितने मुहूर्त हैं?

इस पेज पर दिए गए नियमों के अनुसार 2045 में नई दिल्ली के लिए विवाह के 42 शुभ दिन हैं।

विवाह के लिए अगली शुभ तिथि कब है?

अगली शुभ तिथि रविवार, 15 जनवरी 2045 है, मुहूर्त 19:52 – 04:43 (16 जन॰)।

कुछ महीनों में कोई मुहूर्त क्यों नहीं होता?

मौसमी निषेधों के कारण लंबी अवधियां वर्जित हो जाती हैं: खरमास (सूर्य धनु या मीन राशि में), चातुर्मास, अधिक मास, और वे अवधियां जब शुक्र या गुरु अस्त होते हैं। बचे हुए दिनों में भी उपयुक्त नक्षत्र और तिथि का एक साथ होना ज़रूरी है।