विवाह मुहूर्त 2088

2088 में नई दिल्ली के लिए विवाह के 42 शुभ दिन, उन समय-अवधियों के साथ जिनमें सभी शर्तें पूरी होती हैं।

विवाह का अगला मुहूर्त: शुक्रवार, 16 जनवरी 2088 — 09:21 – 02:18 (17 जन॰)

जनवरी 2088 · 7 दिन

तारीखमुहूर्त
शुक्रवार, 16 जन॰
09:21 – 02:18 (17 जन॰)
नक्षत्र: स्वाति · तिथि: कृष्ण अष्टमी, कृष्ण नवमी
रविवार, 18 जन॰
04:16 (19 जन॰) – 07:14 (19 जन॰)
नक्षत्र: अनुराधा · तिथि: कृष्ण एकादशी
सोमवार, 19 जन॰
07:14 – 18:36
नक्षत्र: अनुराधा · तिथि: कृष्ण एकादशी, कृष्ण द्वादशी
मंगलवार, 20 जन॰
04:10 (21 जन॰) – 05:52 (21 जन॰)
नक्षत्र: मूल · तिथि: कृष्ण त्रयोदशी
मंगलवार, 27 जन॰
05:57 (28 जन॰) – 07:11 (28 जन॰)
नक्षत्र: उत्तरा भाद्रपद · तिथि: शुक्ल पंचमी
बुधवार, 28 जन॰
07:11 – 07:10 (29 जन॰)
नक्षत्र: उत्तरा भाद्रपद, रेवती · तिथि: शुक्ल पंचमी, शुक्ल षष्ठी
गुरुवार, 29 जन॰
07:10 – 23:18
नक्षत्र: रेवती · तिथि: शुक्ल षष्ठी

फ़रवरी 2088 · 13 दिन

तारीखमुहूर्त
रविवार, 1 फ़र॰
01:38 (2 फ़र॰) – 07:08 (2 फ़र॰)
नक्षत्र: रोहिणी · तिथि: शुक्ल दशमी
सोमवार, 2 फ़र॰
07:08 – 02:31 (3 फ़र॰)
नक्षत्र: रोहिणी, मृगशिरा · तिथि: शुक्ल दशमी, शुक्ल एकादशी
शनिवार, 7 फ़र॰
20:46 – 07:04 (8 फ़र॰)
नक्षत्र: मघा · तिथि: कृष्ण प्रतिपदा, कृष्ण द्वितीया
रविवार, 8 फ़र॰
07:04 – 12:20
नक्षत्र: मघा · तिथि: कृष्ण द्वितीया
सोमवार, 9 फ़र॰
23:23 – 07:03 (10 फ़र॰)
नक्षत्र: उत्तरा फाल्गुनी · तिथि: कृष्ण चतुर्थी
मंगलवार, 10 फ़र॰
07:03 – 07:02 (11 फ़र॰)
नक्षत्र: उत्तरा फाल्गुनी, हस्त · तिथि: कृष्ण चतुर्थी, कृष्ण पंचमी
बुधवार, 11 फ़र॰
07:02 – 08:14
नक्षत्र: हस्त · तिथि: कृष्ण पंचमी
शुक्रवार, 13 फ़र॰
15:26 – 20:19
नक्षत्र: स्वाति · तिथि: कृष्ण सप्तमी
शनिवार, 14 फ़र॰
23:18 – 06:59 (15 फ़र॰)
नक्षत्र: अनुराधा · तिथि: कृष्ण अष्टमी
रविवार, 15 फ़र॰
06:59 – 10:05
नक्षत्र: अनुराधा · तिथि: कृष्ण अष्टमी, कृष्ण नवमी
गुरुवार, 19 फ़र॰
10:08 – 12:23
नक्षत्र: उत्तराषाढ़ा · तिथि: कृष्ण द्वादशी
मंगलवार, 24 फ़र॰
12:26 – 06:50 (25 फ़र॰)
नक्षत्र: उत्तरा भाद्रपद · तिथि: शुक्ल द्वितीया, शुक्ल तृतीया
बुधवार, 25 फ़र॰
06:50 – 00:29 (26 फ़र॰)
नक्षत्र: उत्तरा भाद्रपद, रेवती · तिथि: शुक्ल तृतीया, शुक्ल चतुर्थी

मार्च 2088 · 7 दिन

तारीखमुहूर्त
सोमवार, 1 मार्च
11:41 – 04:27 (2 मार्च)
नक्षत्र: मृगशिरा · तिथि: शुक्ल नवमी, शुक्ल दशमी
शुक्रवार, 5 मार्च
05:39 (6 मार्च) – 06:40 (6 मार्च)
नक्षत्र: मघा · तिथि: शुक्ल चतुर्दशी
शनिवार, 6 मार्च
06:40 – 16:59
नक्षत्र: मघा · तिथि: शुक्ल चतुर्दशी
मंगलवार, 9 मार्च
15:49 – 00:47 (10 मार्च)
नक्षत्र: हस्त · तिथि: कृष्ण द्वितीया, कृष्ण तृतीया
बुधवार, 10 मार्च
02:31 (11 मार्च) – 06:34 (11 मार्च)
नक्षत्र: स्वाति · तिथि: कृष्ण चतुर्थी
गुरुवार, 11 मार्च
06:34 – 15:30
नक्षत्र: स्वाति · तिथि: कृष्ण चतुर्थी
शनिवार, 13 मार्च
07:34 – 16:48
नक्षत्र: अनुराधा · तिथि: कृष्ण षष्ठी

अप्रैल 2088 · 0 दिन

अप्रैल में कोई भी दिन सभी शर्तें पूरी नहीं करता।

मई 2088 · 0 दिन

मई में कोई भी दिन सभी शर्तें पूरी नहीं करता।

जून 2088 · 5 दिन

तारीखमुहूर्त
सोमवार, 14 जून
05:23 – 12:19
नक्षत्र: रेवती · तिथि: कृष्ण दशमी
बुधवार, 23 जून
22:40 – 01:14 (24 जून)
नक्षत्र: मघा · तिथि: शुक्ल षष्ठी
शुक्रवार, 25 जून
01:59 (26 जून) – 05:25 (26 जून)
नक्षत्र: हस्त · तिथि: शुक्ल अष्टमी
शनिवार, 26 जून
05:25 – 19:01
नक्षत्र: हस्त · तिथि: शुक्ल अष्टमी, शुक्ल नवमी
रविवार, 27 जून
05:09 (28 जून) – 05:26 (28 जून)
नक्षत्र: स्वाति · तिथि: शुक्ल दशमी

जुलाई 2088 · 0 दिन

जुलाई में कोई भी दिन सभी शर्तें पूरी नहीं करता।

अगस्त 2088 · 0 दिन

अगस्त में कोई भी दिन सभी शर्तें पूरी नहीं करता।

सितंबर 2088 · 0 दिन

सितंबर में कोई भी दिन सभी शर्तें पूरी नहीं करता।

अक्टूबर 2088 · 0 दिन

अक्टूबर में कोई भी दिन सभी शर्तें पूरी नहीं करता।

नवंबर 2088 · 4 दिन

तारीखमुहूर्त
गुरुवार, 25 नव॰
06:52 – 12:24
नक्षत्र: रेवती · तिथि: शुक्ल द्वादशी
रविवार, 28 नव॰
16:15 – 06:55 (29 नव॰)
नक्षत्र: रोहिणी · तिथि: पूर्णिमा, कृष्ण प्रतिपदा
सोमवार, 29 नव॰
06:55 – 06:56 (30 नव॰)
नक्षत्र: रोहिणी, मृगशिरा · तिथि: कृष्ण प्रतिपदा, कृष्ण द्वितीया
मंगलवार, 30 नव॰
06:56 – 10:39
नक्षत्र: मृगशिरा · तिथि: कृष्ण द्वितीया

दिसंबर 2088 · 6 दिन

तारीखमुहूर्त
रविवार, 5 दिस॰
00:19 (6 दिस॰) – 07:00 (6 दिस॰)
नक्षत्र: उत्तरा फाल्गुनी · तिथि: कृष्ण नवमी
सोमवार, 6 दिस॰
07:00 – 07:01 (7 दिस॰)
नक्षत्र: उत्तरा फाल्गुनी, हस्त · तिथि: कृष्ण नवमी, कृष्ण दशमी
मंगलवार, 7 दिस॰
07:01 – 09:49
22:03 – 01:37 (8 दिस॰)
नक्षत्र: हस्त · तिथि: कृष्ण दशमी, कृष्ण एकादशी
बुधवार, 8 दिस॰
03:07 (9 दिस॰) – 07:02 (9 दिस॰)
नक्षत्र: स्वाति · तिथि: कृष्ण द्वादशी
गुरुवार, 9 दिस॰
07:02 – 16:14
नक्षत्र: स्वाति · तिथि: कृष्ण द्वादशी
बुधवार, 15 दिस॰
18:32 – 07:07 (16 दिस॰)
नक्षत्र: उत्तराषाढ़ा · तिथि: शुक्ल तृतीया

नई दिल्ली के लिए गणना। समय-अवधियां स्थानीय समय में दिखाई गई हैं; जो अवधि मध्यरात्रि पार करती है, वह उसी दिन की मानी जाती है जिस दिन वह शुरू होती है (हिंदू दिन सूर्योदय से सूर्योदय तक चलता है)।

प्रयुक्त नियम

हिंदू विवाह परंपरागत रूप से पंचांग से चुने गए मुहूर्त में होते हैं। शास्त्रीय ग्रंथ विवाह की अनुमति केवल कुछ सौर मासों में देते हैं, चातुर्मास और उन अवधियों को वर्जित करते हैं जब विवाह के कारक शुक्र या गुरु अस्त हों, और अशुभ योग व करण से रहित अनुकूल नक्षत्र देखते हैं। इसके बाद कुल ज्योतिषी उस अवधि के भीतर फेरों के लिए सटीक लग्न तय करते हैं।

  • चंद्रमा का नक्षत्र: रोहिणी, मृगशिरा, मघा, उत्तरा फाल्गुनी, हस्त, स्वाति, अनुराधा, मूल, उत्तराषाढ़ा, उत्तरा भाद्रपद, रेवती
  • वर्जित पद: मघा और मूल का पहला पद, रेवती का अंतिम पद
  • सूर्य की राशि (सौर मास): मेष, वृषभ, मिथुन, वृश्चिक, मकर, कुंभ
  • वर्जित योग: विष्कंभ, अतिगंड, शूल, गंड, व्याघात, वज्र, व्यतीपात, परिघ, वैधृति
  • वर्जित करण: विष्टि (भद्रा), शकुनि, चतुष्पद, नाग
  • अधिक मास (मलमास) में कोई मुहूर्त नहीं
  • चातुर्मास (देवशयनी से देवउठनी एकादशी तक) में कोई मुहूर्त नहीं
  • शुक्र या गुरु के अस्त (तारा अस्त) रहने पर, और अस्त होने से पहले तथा उदय होने के बाद के 3 दिनों में कोई मुहूर्त नहीं
  • जो दिन किसी वर्जित अवधि को छूता है, उसे पूरी तरह छोड़ दिया जाता है

ये सामान्य रूप से शुभ समय-अवधियां हैं। किसी संस्कार के लिए ज्योतिषी चुने गए क्षण का लग्न और संबंधित व्यक्तियों का तारा बल व चंद्र बल भी देखते हैं — एक ही अवधि किसी एक व्यक्ति के लिए दूसरे की तुलना में अधिक अनुकूल हो सकती है।

ज्योतिषी से अपना व्यक्तिगत मुहूर्त निकलवाएं किसी अनुभवी ज्योतिषी से बात करें।

ज्योतिषी से बात करें

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

2088 में विवाह के कितने मुहूर्त हैं?

इस पेज पर दिए गए नियमों के अनुसार 2088 में नई दिल्ली के लिए विवाह के 42 शुभ दिन हैं।

विवाह के लिए अगली शुभ तिथि कब है?

अगली शुभ तिथि शुक्रवार, 16 जनवरी 2088 है, मुहूर्त 09:21 – 02:18 (17 जन॰)।

कुछ महीनों में कोई मुहूर्त क्यों नहीं होता?

मौसमी निषेधों के कारण लंबी अवधियां वर्जित हो जाती हैं: खरमास (सूर्य धनु या मीन राशि में), चातुर्मास, अधिक मास, और वे अवधियां जब शुक्र या गुरु अस्त होते हैं। बचे हुए दिनों में भी उपयुक्त नक्षत्र और तिथि का एक साथ होना ज़रूरी है।