5 जनवरी 2025 को बरेली का पंचांग

रविवार, 5 जनवरी 2025, बरेली, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

रविवार, 5 जनवरी 2025 को बरेली में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल षष्ठी (20:15 तक), नक्षत्र पूर्वा भाद्रपद (20:18 तक) और योग व्यतीपात है। सूर्योदय 07:05 पर और सूर्यास्त 17:30 पर है। राहुकाल 16:12 से 17:30 तक है।

दिन और रात
दिन 07:05 – 17:30
रात 07:05 तक
तिथि
षष्ठी, 20:15 तक
सप्तमी
नक्षत्र
पूर्वा भाद्रपद, 20:18 तक
उत्तरा भाद्रपद
चौघड़िया
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

5 जनवरी 2025 का पंचांग

वाररविवार
तिथि
शुक्ल षष्ठी 20:15 तक
शुक्ल सप्तमी 18:24, 6 जन॰ तक
नक्षत्र
योग
व्यतीपातअशुभ 07:32 तक
वरीयान 04:50, 6 जन॰ तक
परिघअशुभ 02:05, 7 जन॰ तक
करण
कौलव 09:09 तक
तैतिल 20:15 तक
गर 07:20, 6 जन॰ तक
चंद्र राशि
कुंभ 14:35 तक
सूर्य राशिधनु
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
07:05
सूर्यास्त
17:30
चंद्रोदय
10:52
चंद्रास्त
23:05
दिनमान
10h 25m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
पौष
मास (पूर्णिमांत)
पौष
विक्रम संवत
2081
शक संवत
1946, क्रोधी संवत्सर
ऋतु
हेमंत
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:16 – 06:10
अभिजीत मुहूर्त
11:56 – 12:38

अशुभ समय

राहुकाल
16:12 – 17:30
यमगंड
12:17 – 13:35
गुलिक काल
14:53 – 16:12

5 जनवरी 2025 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग07:05 – 08:23टालें
चर08:23 – 09:41सामान्य
लाभ09:41 – 10:59शुभ
अमृत10:59 – 12:17शुभ
काल12:17 – 13:35टालें
शुभ13:35 – 14:53शुभ
रोग14:53 – 16:12टालें
उद्वेग16:12 – 17:30टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
शुभ17:30 – 19:12शुभ
अमृत19:12 – 20:53शुभ
चर20:53 – 22:35सामान्य
रोग22:35 – 00:17टालें
काल00:17 – 01:59टालें
लाभ01:59 – 03:41शुभ
उद्वेग03:41 – 05:23टालें
शुभ05:23 – 07:05शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
सूर्य07:0507:57दिन
शुक्र07:5708:49दिन
बुध08:4909:41दिन
चंद्र09:4110:33दिन
शनि10:3311:25दिन
गुरु11:2512:17दिन
मंगल12:1713:09दिन
सूर्य13:0914:01दिन
शुक्र14:0114:53दिन
बुध14:5315:46दिन
चंद्र15:4616:38दिन
शनि16:3817:30दिन
गुरु17:3018:38रात
मंगल18:3819:46रात
सूर्य19:4620:53रात
शुक्र20:5322:01रात
बुध22:0123:09रात
चंद्र23:0900:17रात
शनि00:1701:25रात
गुरु01:2502:33रात
मंगल02:3303:41रात
सूर्य03:4104:49रात
शुक्र04:4905:57रात
बुध05:5707:05रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
10 जन॰ 2025शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
11 जन॰ 2025प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
13 जन॰ 2025पौष पूर्णिमापूर्णिमा
14 जन॰ 2025मकर संक्रांतिसूर्य का मकर में प्रवेश
17 जन॰ 2025संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
22 जन॰ 2025कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
25 जन॰ 2025कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
27 जन॰ 2025प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
29 जन॰ 2025माघ अमावस्याअमावस्या
2 फ़र॰ 2025विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी

तिथियां बरेली में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2065° (लाहिड़ी)। समय बरेली (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।