6 जनवरी 2000 को चेन्नई का पंचांग

गुरुवार, 6 जनवरी 2000, चेन्नई, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

गुरुवार, 6 जनवरी 2000 को चेन्नई में सूर्योदय के समय तिथि अमावस्या (23:43 तक), नक्षत्र पूर्वाषाढ़ा (09:22, 7 जन॰ तक) और योग ध्रुव है। सूर्योदय 06:32 पर और सूर्यास्त 17:56 पर है। राहुकाल 13:39 से 15:05 तक है।

दिन और रात
दिन 06:32 – 17:56
रात 06:33 तक
तिथि
अमावस्या, 23:43 तक
प्रतिपदा
नक्षत्र
पूर्वाषाढ़ा
चौघड़िया
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

6 जनवरी 2000 का पंचांग

वारगुरुवार
तिथि
अमावस्या 23:43 तक
शुक्ल प्रतिपदा 02:04, 8 जन॰ तक
नक्षत्र
पूर्वाषाढ़ा 09:22, 7 जन॰ तक
योग
ध्रुव 16:44 तक
व्याघातअशुभ 17:28, 7 जन॰ तक
करण
चतुष्पद 10:28 तक
नाग 23:43 तक
किंस्तुघ्न 12:56, 7 जन॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिधनु
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:32
सूर्यास्त
17:56
चंद्रोदय
05:59
चंद्रास्त
17:41
दिनमान
11h 23m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
मार्गशीर्ष
मास (पूर्णिमांत)
पौष
विक्रम संवत
2056
शक संवत
1921, प्रमाथी संवत्सर
ऋतु
हेमंत
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:51 – 05:42
अभिजीत मुहूर्त
11:51 – 12:37

अशुभ समय

राहुकाल
13:39 – 15:05
यमगंड
06:32 – 07:58
गुलिक काल
09:23 – 10:49

6 जनवरी 2000 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
शुभ06:32 – 07:58शुभ
रोग07:58 – 09:23टालें
उद्वेग09:23 – 10:49टालें
चर10:49 – 12:14सामान्य
लाभ12:14 – 13:39शुभ
अमृत13:39 – 15:05शुभ
काल15:05 – 16:30टालें
शुभ16:30 – 17:56शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
अमृत17:56 – 19:30शुभ
चर19:30 – 21:05सामान्य
रोग21:05 – 22:39टालें
काल22:39 – 00:14टालें
लाभ00:14 – 01:49शुभ
उद्वेग01:49 – 03:23टालें
शुभ03:23 – 04:58शुभ
अमृत04:58 – 06:33शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
गुरु06:3207:29दिन
मंगल07:2908:26दिन
सूर्य08:2609:23दिन
शुक्र09:2310:20दिन
बुध10:2011:17दिन
चंद्र11:1712:14दिन
शनि12:1413:11दिन
गुरु13:1114:08दिन
मंगल14:0815:05दिन
सूर्य15:0516:02दिन
शुक्र16:0216:59दिन
बुध16:5917:56दिन
चंद्र17:5618:59रात
शनि18:5920:02रात
गुरु20:0221:05रात
मंगल21:0522:08रात
सूर्य22:0823:11रात
शुक्र23:1100:14रात
बुध00:1401:17रात
चंद्र01:1702:20रात
शनि02:2003:23रात
गुरु03:2304:26रात
मंगल04:2605:30रात
सूर्य05:3006:33रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
6 जन॰ 2000पौष अमावस्याअमावस्या
10 जन॰ 2000विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
14 जन॰ 2000मकर संक्रांतिसूर्य का मकर में प्रवेश
17 जन॰ 2000शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
19 जन॰ 2000प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
21 जन॰ 2000पौष पूर्णिमापूर्णिमा
24 जन॰ 2000संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
28 जन॰ 2000कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
1 फ़र॰ 2000कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
3 फ़र॰ 2000प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी

तिथियां चेन्नई में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 23.8572° (लाहिड़ी)। समय चेन्नई (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

सूची में से सबसे नज़दीकी शहर चुनें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।