20 जनवरी 2004 को चेन्नई का पंचांग

मंगलवार, 20 जनवरी 2004, चेन्नई, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

मंगलवार, 20 जनवरी 2004 को चेन्नई में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण त्रयोदशी (08:37 तक), नक्षत्र मूल (11:38 तक) और योग व्याघात है। सूर्योदय 06:35 पर और सूर्यास्त 18:03 पर है। राहुकाल 15:11 से 16:37 तक है।

दिन और रात
दिन 06:35 – 18:03
रात 06:35 तक
तिथि
चतुर्दशी, 05:31 तक
नक्षत्र
मूल, 11:38 तक
पूर्वाषाढ़ा
चौघड़िया
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

20 जनवरी 2004 का पंचांग

वारमंगलवार
तिथि
कृष्ण त्रयोदशी 08:37 तक
कृष्ण चतुर्दशी 05:31, 21 जन॰ तक
अमावस्या 02:34, 22 जन॰ तक
नक्षत्र
मूल 11:38 तक
पूर्वाषाढ़ा 09:17, 21 जन॰ तक
योग
व्याघातअशुभ 18:19 तक
हर्षण 14:35, 21 जन॰ तक
करण
वणिज 08:37 तक
विष्टि (भद्रा) 19:04 तक
शकुनि 05:31, 21 जन॰ तक
चतुष्पद 16:01, 21 जन॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिमकर
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:35
सूर्यास्त
18:03
चंद्रोदय
04:55
चंद्रास्त
16:30
दिनमान
11h 28m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
पौष
मास (पूर्णिमांत)
माघ
विक्रम संवत
2060
शक संवत
1925, स्वभानु संवत्सर
ऋतु
हेमंत
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:55 – 05:45
अभिजीत मुहूर्त
11:56 – 12:42

अशुभ समय

राहुकाल
15:11 – 16:37
यमगंड
09:27 – 10:53
गुलिक काल
12:19 – 13:45

20 जनवरी 2004 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
रोग06:35 – 08:01टालें
उद्वेग08:01 – 09:27टालें
चर09:27 – 10:53सामान्य
लाभ10:53 – 12:19शुभ
अमृत12:19 – 13:45शुभ
काल13:45 – 15:11टालें
शुभ15:11 – 16:37शुभ
रोग16:37 – 18:03टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
काल18:03 – 19:37टालें
लाभ19:37 – 21:11शुभ
उद्वेग21:11 – 22:45टालें
शुभ22:45 – 00:19शुभ
अमृत00:19 – 01:53शुभ
चर01:53 – 03:27सामान्य
रोग03:27 – 05:01टालें
काल05:01 – 06:35टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
मंगल06:3507:33दिन
सूर्य07:3308:30दिन
शुक्र08:3009:27दिन
बुध09:2710:25दिन
चंद्र10:2511:22दिन
शनि11:2212:19दिन
गुरु12:1913:17दिन
मंगल13:1714:14दिन
सूर्य14:1415:11दिन
शुक्र15:1116:09दिन
बुध16:0917:06दिन
चंद्र17:0618:03दिन
शनि18:0319:06रात
गुरु19:0620:09रात
मंगल20:0921:11रात
सूर्य21:1122:14रात
शुक्र22:1423:17रात
बुध23:1700:19रात
चंद्र00:1901:22रात
शनि01:2202:25रात
गुरु02:2503:27रात
मंगल03:2704:30रात
सूर्य04:3005:33रात
शुक्र05:3306:35रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
20 जन॰ 2004प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
21 जन॰ 2004माघ अमावस्याअमावस्या
25 जन॰ 2004विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
1 फ़र॰ 2004शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
4 फ़र॰ 2004प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
6 फ़र॰ 2004माघ पूर्णिमापूर्णिमा
10 फ़र॰ 2004संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
13 फ़र॰ 2004कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
13 फ़र॰ 2004कुंभ संक्रांतिसूर्य का कुंभ में प्रवेश
16 फ़र॰ 2004कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
18 फ़र॰ 2004प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी

तिथियां चेन्नई में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 23.9136° (लाहिड़ी)। समय चेन्नई (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।