1 जनवरी 2014 को चेन्नई का पंचांग

बुधवार, 1 जनवरी 2014, चेन्नई, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

बुधवार, 1 जनवरी 2014 को चेन्नई में सूर्योदय के समय तिथि अमावस्या (16:44 तक), नक्षत्र मूल (11:08 तक) और योग ध्रुव है। सूर्योदय 06:31 पर और सूर्यास्त 17:53 पर है। राहुकाल 12:12 से 13:37 तक है।

दिन और रात
दिन 06:31 – 17:53
रात 06:31 तक
तिथि
अमावस्या, 16:44 तक
प्रतिपदा
नक्षत्र
मूल, 11:08 तक
पूर्वाषाढ़ा
चौघड़िया
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

1 जनवरी 2014 का पंचांग

वारबुधवार
तिथि
अमावस्या 16:44 तक
शुक्ल प्रतिपदा 12:50, 2 जन॰ तक
नक्षत्र
मूल 11:08 तक
पूर्वाषाढ़ा 08:00, 2 जन॰ तक
योग
ध्रुव 01:49, 2 जन॰ तक
व्याघातअशुभ 21:24, 2 जन॰ तक
करण
चतुष्पद 06:39 तक
नाग 16:44 तक
किंस्तुघ्न 02:47, 2 जन॰ तक
बव 12:50, 2 जन॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिधनु
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:31
सूर्यास्त
17:53
चंद्रोदय
06:03
चंद्रास्त
17:55
दिनमान
11h 22m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
मार्गशीर्ष
मास (पूर्णिमांत)
पौष
विक्रम संवत
2070
शक संवत
1935, विजय संवत्सर
ऋतु
हेमंत
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:50 – 05:40
अभिजीत मुहूर्त
11:49 – 12:35 (बुधवार को पारंपरिक रूप से वर्जित)

अशुभ समय

राहुकाल
12:12 – 13:37
यमगंड
07:56 – 09:21
गुलिक काल
10:47 – 12:12

1 जनवरी 2014 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
लाभ06:31 – 07:56शुभ
अमृत07:56 – 09:21शुभ
काल09:21 – 10:47टालें
शुभ10:47 – 12:12शुभ
रोग12:12 – 13:37टालें
उद्वेग13:37 – 15:02टालें
चर15:02 – 16:28सामान्य
लाभ16:28 – 17:53शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग17:53 – 19:28टालें
शुभ19:28 – 21:03शुभ
अमृत21:03 – 22:37शुभ
चर22:37 – 00:12सामान्य
रोग00:12 – 01:47टालें
काल01:47 – 03:22टालें
लाभ03:22 – 04:56शुभ
उद्वेग04:56 – 06:31टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
बुध06:3107:28दिन
चंद्र07:2808:24दिन
शनि08:2409:21दिन
गुरु09:2110:18दिन
मंगल10:1811:15दिन
सूर्य11:1512:12दिन
शुक्र12:1213:09दिन
बुध13:0914:06दिन
चंद्र14:0615:02दिन
शनि15:0215:59दिन
गुरु15:5916:56दिन
मंगल16:5617:53दिन
सूर्य17:5318:56रात
शुक्र18:5619:59रात
बुध19:5921:03रात
चंद्र21:0322:06रात
शनि22:0623:09रात
गुरु23:0900:12रात
मंगल00:1201:15रात
सूर्य01:1502:18रात
शुक्र02:1803:22रात
बुध03:2204:25रात
चंद्र04:2505:28रात
शनि05:2806:31रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
1 जन॰ 2014पौष अमावस्याअमावस्या
4 जन॰ 2014विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
11 जन॰ 2014शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
13 जन॰ 2014प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
14 जन॰ 2014मकर संक्रांतिसूर्य का मकर में प्रवेश
16 जन॰ 2014पौष पूर्णिमापूर्णिमा
20 जन॰ 2014संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
24 जन॰ 2014कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
27 जन॰ 2014कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
29 जन॰ 2014प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
30 जन॰ 2014माघ अमावस्याअमावस्या

तिथियां चेन्नई में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.0526° (लाहिड़ी)। समय चेन्नई (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।