10 जनवरी 2015 को चेन्नई का पंचांग

शनिवार, 10 जनवरी 2015, चेन्नई, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

शनिवार, 10 जनवरी 2015 को चेन्नई में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण पंचमी (21:15 तक), नक्षत्र पूर्वा फाल्गुनी (22:36 तक) और योग सौभाग्य है। सूर्योदय 06:33 पर और सूर्यास्त 17:58 पर है। राहुकाल 09:25 से 10:50 तक है।

दिन और रात
दिन 06:33 – 17:58
रात 06:34 तक
तिथि
पंचमी, 21:15 तक
षष्ठी
नक्षत्र
पूर्वा फाल्गुनी, 22:36 तक
उत्तरा फाल्गुनी
चौघड़िया
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

10 जनवरी 2015 का पंचांग

वारशनिवार
तिथि
कृष्ण पंचमी 21:15 तक
कृष्ण षष्ठी 23:55, 11 जन॰ तक
नक्षत्र
योग
सौभाग्य 23:45 तक
शोभन 00:40, 12 जन॰ तक
करण
कौलव 07:53 तक
तैतिल 21:15 तक
गर 10:36, 11 जन॰ तक
चंद्र राशि
सिंह 05:23, 11 जन॰ तक
सूर्य राशिधनु
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:33
सूर्यास्त
17:58
चंद्रोदय
22:09
चंद्रास्त
09:53
दिनमान
11h 25m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
पौष
मास (पूर्णिमांत)
माघ
विक्रम संवत
2071
शक संवत
1936, जय संवत्सर
ऋतु
हेमंत
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:53 – 05:43
अभिजीत मुहूर्त
11:53 – 12:39

अशुभ समय

राहुकाल
09:25 – 10:50
यमगंड
13:41 – 15:07
गुलिक काल
06:33 – 07:59

10 जनवरी 2015 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
काल06:33 – 07:59टालें
शुभ07:59 – 09:25शुभ
रोग09:25 – 10:50टालें
उद्वेग10:50 – 12:16टालें
चर12:16 – 13:41सामान्य
लाभ13:41 – 15:07शुभ
अमृत15:07 – 16:32शुभ
काल16:32 – 17:58टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
लाभ17:58 – 19:32शुभ
उद्वेग19:32 – 21:07टालें
शुभ21:07 – 22:41शुभ
अमृत22:41 – 00:16शुभ
चर00:16 – 01:50सामान्य
रोग01:50 – 03:25टालें
काल03:25 – 04:59टालें
लाभ04:59 – 06:34शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शनि06:3307:31दिन
गुरु07:3108:28दिन
मंगल08:2809:25दिन
सूर्य09:2510:22दिन
शुक्र10:2211:19दिन
बुध11:1912:16दिन
चंद्र12:1613:13दिन
शनि13:1314:10दिन
गुरु14:1015:07दिन
मंगल15:0716:04दिन
सूर्य16:0417:01दिन
शुक्र17:0117:58दिन
बुध17:5819:01रात
चंद्र19:0120:04रात
शनि20:0421:07रात
गुरु21:0722:10रात
मंगल22:1023:13रात
सूर्य23:1300:16रात
शुक्र00:1601:19रात
बुध01:1902:22रात
चंद्र02:2203:25रात
शनि03:2504:28रात
गुरु04:2805:31रात
मंगल05:3106:34रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
13 जन॰ 2015कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
14 जन॰ 2015मकर संक्रांतिसूर्य का मकर में प्रवेश
16 जन॰ 2015कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
18 जन॰ 2015प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
20 जन॰ 2015माघ अमावस्याअमावस्या
23 जन॰ 2015विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
30 जन॰ 2015शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
1 फ़र॰ 2015प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
3 फ़र॰ 2015माघ पूर्णिमापूर्णिमा
8 फ़र॰ 2015संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी

तिथियां चेन्नई में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.0669° (लाहिड़ी)। समय चेन्नई (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।