16 जनवरी 2045 को चेन्नई का पंचांग

सोमवार, 16 जनवरी 2045, चेन्नई, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

सोमवार, 16 जनवरी 2045 को चेन्नई में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण चतुर्दशी (07:16, 17 जन॰ तक), नक्षत्र मूल (16:02 तक) और योग व्याघात है। सूर्योदय 06:35 पर और सूर्यास्त 18:02 पर है। राहुकाल 08:01 से 09:26 तक है।

दिन और रात
दिन 06:35 – 18:02
रात 06:35 तक
तिथि
चतुर्दशी
नक्षत्र
मूल, 16:02 तक
पूर्वाषाढ़ा
चौघड़िया
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

16 जनवरी 2045 का पंचांग

वारसोमवार
तिथि
कृष्ण चतुर्दशी 07:16, 17 जन॰ तक
नक्षत्र
मूल 16:02 तक
पूर्वाषाढ़ा 19:03, 17 जन॰ तक
योग
व्याघातअशुभ 06:34, 17 जन॰ तक
हर्षण 07:29, 18 जन॰ तक
करण
विष्टि (भद्रा) 17:58 तक
शकुनि 07:16, 17 जन॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिमकर
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:35
सूर्यास्त
18:02
चंद्रोदय
05:05
चंद्रास्त
16:31
दिनमान
11h 27m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
पौष
मास (पूर्णिमांत)
माघ
विक्रम संवत
2101
शक संवत
1966, रक्ताक्षी संवत्सर
ऋतु
हेमंत
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:54 – 05:45
अभिजीत मुहूर्त
11:55 – 12:41

अशुभ समय

राहुकाल
08:01 – 09:26
यमगंड
10:52 – 12:18
गुलिक काल
13:44 – 15:10

16 जनवरी 2045 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
अमृत06:35 – 08:01शुभ
काल08:01 – 09:26टालें
शुभ09:26 – 10:52शुभ
रोग10:52 – 12:18टालें
उद्वेग12:18 – 13:44टालें
चर13:44 – 15:10सामान्य
लाभ15:10 – 16:36शुभ
अमृत16:36 – 18:02शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
चर18:02 – 19:36सामान्य
रोग19:36 – 21:10टालें
काल21:10 – 22:44टालें
लाभ22:44 – 00:18शुभ
उद्वेग00:18 – 01:52टालें
शुभ01:52 – 03:27शुभ
अमृत03:27 – 05:01शुभ
चर05:01 – 06:35सामान्य

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
चंद्र06:3507:32दिन
शनि07:3208:29दिन
गुरु08:2909:26दिन
मंगल09:2610:24दिन
सूर्य10:2411:21दिन
शुक्र11:2112:18दिन
बुध12:1813:15दिन
चंद्र13:1514:13दिन
शनि14:1315:10दिन
गुरु15:1016:07दिन
मंगल16:0717:04दिन
सूर्य17:0418:02दिन
शुक्र18:0219:04रात
बुध19:0420:07रात
चंद्र20:0721:10रात
शनि21:1022:13रात
गुरु22:1323:16रात
मंगल23:1600:18रात
सूर्य00:1801:21रात
शुक्र01:2102:24रात
बुध02:2403:27रात
चंद्र03:2704:29रात
शनि04:2905:32रात
गुरु05:3206:35रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
18 जन॰ 2045माघ अमावस्याअमावस्या
22 जन॰ 2045विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
29 जन॰ 2045शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
31 जन॰ 2045प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
1 फ़र॰ 2045माघ पूर्णिमापूर्णिमा
5 फ़र॰ 2045संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
9 फ़र॰ 2045कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
12 फ़र॰ 2045कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
13 फ़र॰ 2045कुंभ संक्रांतिसूर्य का कुंभ में प्रवेश
14 फ़र॰ 2045प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी

तिथियां चेन्नई में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.4863° (लाहिड़ी)। समय चेन्नई (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।