15 फ़रवरी 2029 को ईरोड का पंचांग

गुरुवार, 15 फ़रवरी 2029, ईरोड, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

गुरुवार, 15 फ़रवरी 2029 को ईरोड में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल द्वितीया (19:55 तक), नक्षत्र पूर्वा भाद्रपद (08:47, 16 फ़र॰ तक) और योग शिव है। सूर्योदय 06:40 पर और सूर्यास्त 18:26 पर है। राहुकाल 14:01 से 15:29 तक है।

दिन और रात
दिन 06:40 – 18:26
रात 06:39 तक
तिथि
द्वितीया, 19:55 तक
तृतीया
नक्षत्र
पूर्वा भाद्रपद
चौघड़िया
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

15 फ़रवरी 2029 का पंचांग

वारगुरुवार
तिथि
शुक्ल द्वितीया 19:55 तक
शुक्ल तृतीया 22:17, 16 फ़र॰ तक
नक्षत्र
पूर्वा भाद्रपद 08:47, 16 फ़र॰ तक
योग
शिव 14:03 तक
सिद्ध 14:43, 16 फ़र॰ तक
करण
बालव 06:50 तक
कौलव 19:55 तक
तैतिल 09:05, 16 फ़र॰ तक
चंद्र राशि
कुंभ 02:05, 16 फ़र॰ तक
सूर्य राशिकुंभ
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:40
सूर्यास्त
18:26
चंद्रोदय
07:37
चंद्रास्त
19:56
दिनमान
11h 46m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
फाल्गुन
मास (पूर्णिमांत)
फाल्गुन
विक्रम संवत
2085
शक संवत
1950, कीलक संवत्सर
ऋतु
शिशिर
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:02 – 05:51
अभिजीत मुहूर्त
12:09 – 12:56

अशुभ समय

राहुकाल
14:01 – 15:29
यमगंड
06:40 – 08:08
गुलिक काल
09:36 – 11:04

15 फ़रवरी 2029 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
शुभ06:40 – 08:08शुभ
रोग08:08 – 09:36टालें
उद्वेग09:36 – 11:04टालें
चर11:04 – 12:33सामान्य
लाभ12:33 – 14:01शुभ
अमृत14:01 – 15:29शुभ
काल15:29 – 16:58टालें
शुभ16:58 – 18:26शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
अमृत18:26 – 19:58शुभ
चर19:58 – 21:29सामान्य
रोग21:29 – 23:01टालें
काल23:01 – 00:33टालें
लाभ00:33 – 02:04शुभ
उद्वेग02:04 – 03:36टालें
शुभ03:36 – 05:08शुभ
अमृत05:08 – 06:39शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
गुरु06:4007:38दिन
मंगल07:3808:37दिन
सूर्य08:3709:36दिन
शुक्र09:3610:35दिन
बुध10:3511:34दिन
चंद्र11:3412:33दिन
शनि12:3313:32दिन
गुरु13:3214:30दिन
मंगल14:3015:29दिन
सूर्य15:2916:28दिन
शुक्र16:2817:27दिन
बुध17:2718:26दिन
चंद्र18:2619:27रात
शनि19:2720:28रात
गुरु20:2821:29रात
मंगल21:2922:30रात
सूर्य22:3023:31रात
शुक्र23:3100:33रात
बुध00:3301:34रात
चंद्र01:3402:35रात
शनि02:3503:36रात
गुरु03:3604:37रात
मंगल04:3705:38रात
सूर्य05:3806:39रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
17 फ़र॰ 2029विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
25 फ़र॰ 2029शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
26 फ़र॰ 2029प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
28 फ़र॰ 2029फाल्गुन पूर्णिमापूर्णिमा
4 मार्च 2029संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
7 मार्च 2029कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
10 मार्च 2029कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
12 मार्च 2029प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
14 मार्च 2029मीन संक्रांतिसूर्य का मीन में प्रवेश
15 मार्च 2029चैत्र अमावस्याअमावस्या

तिथियां ईरोड में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2639° (लाहिड़ी)। समय ईरोड (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।