7 दिसंबर 2029 को ईरोड का पंचांग

शुक्रवार, 7 दिसंबर 2029, ईरोड, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

शुक्रवार, 7 दिसंबर 2029 को ईरोड में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल द्वितीया (14:25 तक), नक्षत्र मूल (11:13 तक) और योग गंड है। सूर्योदय 06:25 पर और सूर्यास्त 17:55 पर है। राहुकाल 10:44 से 12:10 तक है।

दिन और रात
दिन 06:25 – 17:55
रात 06:26 तक
तिथि
द्वितीया, 14:25 तक
तृतीया
नक्षत्र
मूल, 11:13 तक
पूर्वाषाढ़ा
चौघड़िया
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

7 दिसंबर 2029 का पंचांग

वारशुक्रवार
तिथि
शुक्ल द्वितीया 14:25 तक
शुक्ल तृतीया 12:11, 8 दिस॰ तक
नक्षत्र
मूल 11:13 तक
पूर्वाषाढ़ा 09:37, 8 दिस॰ तक
योग
गंडअशुभ 01:04, 8 दिस॰ तक
वृद्धि 22:18, 8 दिस॰ तक
करण
कौलव 14:25 तक
तैतिल 01:14, 8 दिस॰ तक
गर 12:11, 8 दिस॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिवृश्चिक
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:25
सूर्यास्त
17:55
चंद्रोदय
07:58
चंद्रास्त
19:48
दिनमान
11h 29m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
मार्गशीर्ष
मास (पूर्णिमांत)
मार्गशीर्ष
विक्रम संवत
2086
शक संवत
1951, सौम्य संवत्सर
ऋतु
हेमंत
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:45 – 05:35
अभिजीत मुहूर्त
11:47 – 12:33

अशुभ समय

राहुकाल
10:44 – 12:10
यमगंड
15:02 – 16:28
गुलिक काल
07:52 – 09:18

7 दिसंबर 2029 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
चर06:25 – 07:52सामान्य
लाभ07:52 – 09:18शुभ
अमृत09:18 – 10:44शुभ
काल10:44 – 12:10टालें
शुभ12:10 – 13:36शुभ
रोग13:36 – 15:02टालें
उद्वेग15:02 – 16:28टालें
चर16:28 – 17:55सामान्य
रात का चौघड़ियासमयफल
रोग17:55 – 19:29टालें
काल19:29 – 21:02टालें
लाभ21:02 – 22:36शुभ
उद्वेग22:36 – 00:10टालें
शुभ00:10 – 01:44शुभ
अमृत01:44 – 03:18शुभ
चर03:18 – 04:52सामान्य
रोग04:52 – 06:26टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शुक्र06:2507:23दिन
बुध07:2308:20दिन
चंद्र08:2009:18दिन
शनि09:1810:15दिन
गुरु10:1511:13दिन
मंगल11:1312:10दिन
सूर्य12:1013:07दिन
शुक्र13:0714:05दिन
बुध14:0515:02दिन
चंद्र15:0216:00दिन
शनि16:0016:57दिन
गुरु16:5717:55दिन
मंगल17:5518:57रात
सूर्य18:5720:00रात
शुक्र20:0021:02रात
बुध21:0222:05रात
चंद्र22:0523:08रात
शनि23:0800:10रात
गुरु00:1001:13रात
मंगल01:1302:16रात
सूर्य02:1603:18रात
शुक्र03:1804:21रात
बुध04:2105:23रात
चंद्र05:2306:26रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
9 दिस॰ 2029विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
16 दिस॰ 2029शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
16 दिस॰ 2029धनु संक्रांतिसूर्य का धनु में प्रवेश
18 दिस॰ 2029प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
20 दिस॰ 2029मार्गशीर्ष पूर्णिमापूर्णिमा
25 दिस॰ 2029संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
28 दिस॰ 2029कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
31 दिस॰ 2029कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
2 जन॰ 2030प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
4 जन॰ 2030पौष अमावस्याअमावस्या

तिथियां ईरोड में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2752° (लाहिड़ी)। समय ईरोड (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।