30 जनवरी 2028 को हावड़ा का पंचांग

रविवार, 30 जनवरी 2028, हावड़ा, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

रविवार, 30 जनवरी 2028 को हावड़ा में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल चतुर्थी (07:15, 31 जन॰ तक), नक्षत्र पूर्वा भाद्रपद (05:01, 31 जन॰ तक) और योग परिघ है। सूर्योदय 06:17 पर और सूर्यास्त 17:23 पर है। राहुकाल 16:00 से 17:23 तक है।

दिन और रात
दिन 06:17 – 17:23
रात 06:16 तक
तिथि
चतुर्थी
नक्षत्र
पूर्वा भाद्रपद, 05:01 तक
चौघड़िया
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

30 जनवरी 2028 का पंचांग

वाररविवार
तिथि
शुक्ल चतुर्थी 07:15, 31 जन॰ तक
नक्षत्र
पूर्वा भाद्रपद 05:01, 31 जन॰ तक
उत्तरा भाद्रपद 07:42, 1 फ़र॰ तक
योग
परिघअशुभ 17:12 तक
शिव 17:57, 31 जन॰ तक
करण
वणिज 18:01 तक
विष्टि (भद्रा) 07:15, 31 जन॰ तक
चंद्र राशि
कुंभ 22:17 तक
सूर्य राशिमकर
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:17
सूर्यास्त
17:23
चंद्रोदय
08:11
चंद्रास्त
20:30
दिनमान
11h 6m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
माघ
मास (पूर्णिमांत)
माघ
विक्रम संवत
2084
शक संवत
1949, प्लवंग संवत्सर
ऋतु
शिशिर
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:33 – 05:25
अभिजीत मुहूर्त
11:27 – 12:12

अशुभ समय

राहुकाल
16:00 – 17:23
यमगंड
11:50 – 13:13
गुलिक काल
14:36 – 16:00

30 जनवरी 2028 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग06:17 – 07:40टालें
चर07:40 – 09:03सामान्य
लाभ09:03 – 10:26शुभ
अमृत10:26 – 11:50शुभ
काल11:50 – 13:13टालें
शुभ13:13 – 14:36शुभ
रोग14:36 – 16:00टालें
उद्वेग16:00 – 17:23टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
शुभ17:23 – 19:00शुभ
अमृत19:00 – 20:36शुभ
चर20:36 – 22:13सामान्य
रोग22:13 – 23:50टालें
काल23:50 – 01:26टालें
लाभ01:26 – 03:03शुभ
उद्वेग03:03 – 04:40टालें
शुभ04:40 – 06:16शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
सूर्य06:1707:12दिन
शुक्र07:1208:08दिन
बुध08:0809:03दिन
चंद्र09:0309:59दिन
शनि09:5910:54दिन
गुरु10:5411:50दिन
मंगल11:5012:45दिन
सूर्य12:4513:41दिन
शुक्र13:4114:36दिन
बुध14:3615:32दिन
चंद्र15:3216:27दिन
शनि16:2717:23दिन
गुरु17:2318:27रात
मंगल18:2719:32रात
सूर्य19:3220:36रात
शुक्र20:3621:41रात
बुध21:4122:45रात
चंद्र22:4523:50रात
शनि23:5000:54रात
गुरु00:5401:58रात
मंगल01:5803:03रात
सूर्य03:0304:07रात
शुक्र04:0705:12रात
बुध05:1206:16रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
30 जन॰ 2028विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
7 फ़र॰ 2028शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
8 फ़र॰ 2028प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
10 फ़र॰ 2028माघ पूर्णिमापूर्णिमा
13 फ़र॰ 2028कुंभ संक्रांतिसूर्य का कुंभ में प्रवेश
14 फ़र॰ 2028संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
17 फ़र॰ 2028कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
20 फ़र॰ 2028कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
23 फ़र॰ 2028प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
25 फ़र॰ 2028फाल्गुन अमावस्याअमावस्या

तिथियां हावड़ा में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2493° (लाहिड़ी)। समय हावड़ा (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।