29 सितंबर 2025 को कोल्हापुर का पंचांग

सोमवार, 29 सितंबर 2025, कोल्हापुर, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

सोमवार, 29 सितंबर 2025 को कोल्हापुर में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल सप्तमी (16:32 तक), नक्षत्र मूल (06:17, 30 सित॰ तक) और योग सौभाग्य है। सूर्योदय 06:22 पर और सूर्यास्त 18:23 पर है। राहुकाल 07:53 से 09:23 तक है।

दिन और रात
दिन 06:22 – 18:23
रात 06:23 तक
तिथि
सप्तमी, 16:32 तक
अष्टमी
नक्षत्र
मूल, 06:17 तक
चौघड़िया
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

29 सितंबर 2025 का पंचांग

वारसोमवार
तिथि
शुक्ल सप्तमी 16:32 तक
शुक्ल अष्टमी 18:06, 30 सित॰ तक
नक्षत्र
मूल 06:17, 30 सित॰ तक
पूर्वाषाढ़ा 08:06, 1 अक्टू॰ तक
योग
सौभाग्य 01:00, 30 सित॰ तक
शोभन 01:03, 1 अक्टू॰ तक
करण
वणिज 16:32 तक
विष्टि (भद्रा) 05:23, 30 सित॰ तक
बव 18:06, 30 सित॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिकन्या
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:22
सूर्यास्त
18:23
चंद्रोदय
12:31
चंद्रास्त
23:39
दिनमान
12h 1m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
आश्विन
मास (पूर्णिमांत)
आश्विन
विक्रम संवत
2082
शक संवत
1947, विश्वावसु संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:47 – 05:35
अभिजीत मुहूर्त
11:59 – 12:47

अशुभ समय

राहुकाल
07:53 – 09:23
यमगंड
10:53 – 12:23
गुलिक काल
13:53 – 15:23

29 सितंबर 2025 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
अमृत06:22 – 07:53शुभ
काल07:53 – 09:23टालें
शुभ09:23 – 10:53शुभ
रोग10:53 – 12:23टालें
उद्वेग12:23 – 13:53टालें
चर13:53 – 15:23सामान्य
लाभ15:23 – 16:53शुभ
अमृत16:53 – 18:23शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
चर18:23 – 19:53सामान्य
रोग19:53 – 21:23टालें
काल21:23 – 22:53टालें
लाभ22:53 – 00:23शुभ
उद्वेग00:23 – 01:53टालें
शुभ01:53 – 03:23शुभ
अमृत03:23 – 04:53शुभ
चर04:53 – 06:23सामान्य

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
चंद्र06:2207:22दिन
शनि07:2208:23दिन
गुरु08:2309:23दिन
मंगल09:2310:23दिन
सूर्य10:2311:23दिन
शुक्र11:2312:23दिन
बुध12:2313:23दिन
चंद्र13:2314:23दिन
शनि14:2315:23दिन
गुरु15:2316:23दिन
मंगल16:2317:23दिन
सूर्य17:2318:23दिन
शुक्र18:2319:23रात
बुध19:2320:23रात
चंद्र20:2321:23रात
शनि21:2322:23रात
गुरु22:2323:23रात
मंगल23:2300:23रात
सूर्य00:2301:23रात
शुक्र01:2302:23रात
बुध02:2303:23रात
चंद्र03:2304:23रात
शनि04:2305:23रात
गुरु05:2306:23रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
3 अक्टू॰ 2025शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
5 अक्टू॰ 2025प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
7 अक्टू॰ 2025आश्विन पूर्णिमापूर्णिमा
10 अक्टू॰ 2025संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
14 अक्टू॰ 2025कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
17 अक्टू॰ 2025कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
17 अक्टू॰ 2025तुला संक्रांतिसूर्य का तुला में प्रवेश
19 अक्टू॰ 2025प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
21 अक्टू॰ 2025कार्तिक अमावस्याअमावस्या
25 अक्टू॰ 2025विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी

तिथियां कोल्हापुर में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2167° (लाहिड़ी)। समय कोल्हापुर (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।