18 अक्टूबर 2002 को कोलकाता का पंचांग

शुक्रवार, 18 अक्टूबर 2002, कोलकाता, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

शुक्रवार, 18 अक्टूबर 2002 को कोलकाता में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल त्रयोदशी (07:48, 19 अक्टू॰ तक), नक्षत्र पूर्वा भाद्रपद (23:07 तक) और योग वृद्धि है। सूर्योदय 05:34 पर और सूर्यास्त 17:09 पर है। राहुकाल 09:54 से 11:21 तक है।

दिन और रात
दिन 05:34 – 17:09
रात 05:34 तक
तिथि
त्रयोदशी
नक्षत्र
पूर्वा भाद्रपद, 23:07 तक
उत्तरा भाद्रपद
चौघड़िया
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

18 अक्टूबर 2002 का पंचांग

वारशुक्रवार
तिथि
शुक्ल त्रयोदशी 07:48, 19 अक्टू॰ तक
नक्षत्र
उत्तरा भाद्रपद 02:04, 20 अक्टू॰ तक
योग
वृद्धि 08:20 तक
ध्रुव 09:10, 19 अक्टू॰ तक
करण
कौलव 18:35 तक
तैतिल 07:48, 19 अक्टू॰ तक
चंद्र राशि
कुंभ 16:23 तक
सूर्य राशितुला
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:34
सूर्यास्त
17:09
चंद्रोदय
15:46
चंद्रास्त
02:55
दिनमान
11h 35m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
आश्विन
मास (पूर्णिमांत)
आश्विन
विक्रम संवत
2059
शक संवत
1924, चित्रभानु संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
03:54 – 04:44
अभिजीत मुहूर्त
10:58 – 11:44

अशुभ समय

राहुकाल
09:54 – 11:21
यमगंड
14:15 – 15:42
गुलिक काल
07:00 – 08:27

18 अक्टूबर 2002 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
चर05:34 – 07:00सामान्य
लाभ07:00 – 08:27शुभ
अमृत08:27 – 09:54शुभ
काल09:54 – 11:21टालें
शुभ11:21 – 12:48शुभ
रोग12:48 – 14:15टालें
उद्वेग14:15 – 15:42टालें
चर15:42 – 17:09सामान्य
रात का चौघड़ियासमयफल
रोग17:09 – 18:42टालें
काल18:42 – 20:15टालें
लाभ20:15 – 21:48शुभ
उद्वेग21:48 – 23:21टालें
शुभ23:21 – 00:55शुभ
अमृत00:55 – 02:28शुभ
चर02:28 – 04:01सामान्य
रोग04:01 – 05:34टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शुक्र05:3406:32दिन
बुध06:3207:29दिन
चंद्र07:2908:27दिन
शनि08:2709:25दिन
गुरु09:2510:23दिन
मंगल10:2311:21दिन
सूर्य11:2112:19दिन
शुक्र12:1913:17दिन
बुध13:1714:15दिन
चंद्र14:1515:13दिन
शनि15:1316:11दिन
गुरु16:1117:09दिन
मंगल17:0918:11रात
सूर्य18:1119:13रात
शुक्र19:1320:15रात
बुध20:1521:17रात
चंद्र21:1722:19रात
शनि22:1923:21रात
गुरु23:2100:23रात
मंगल00:2301:26रात
सूर्य01:2602:28रात
शुक्र02:2803:30रात
बुध03:3004:32रात
चंद्र04:3205:34रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
18 अक्टू॰ 2002प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
21 अक्टू॰ 2002आश्विन पूर्णिमापूर्णिमा
25 अक्टू॰ 2002संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
29 अक्टू॰ 2002कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
1 नव॰ 2002कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
3 नव॰ 2002प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
4 नव॰ 2002कार्तिक अमावस्याअमावस्या
8 नव॰ 2002विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
15 नव॰ 2002शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
16 नव॰ 2002वृश्चिक संक्रांतिसूर्य का वृश्चिक में प्रवेश

तिथियां कोलकाता में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 23.8961° (लाहिड़ी)। समय कोलकाता (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।