10 अक्टूबर 2011 को कोलकाता का पंचांग

सोमवार, 10 अक्टूबर 2011, कोलकाता, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

सोमवार, 10 अक्टूबर 2011 को कोलकाता में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल चतुर्दशी (05:09, 11 अक्टू॰ तक), नक्षत्र पूर्वा भाद्रपद (13:08 तक) और योग वृद्धि है। सूर्योदय 05:30 पर और सूर्यास्त 17:16 पर है। राहुकाल 06:59 से 08:27 तक है।

दिन और रात
दिन 05:30 – 17:16
रात 05:31 तक
तिथि
चतुर्दशी, 05:09 तक
नक्षत्र
पूर्वा भाद्रपद, 13:08 तक
उत्तरा भाद्रपद
चौघड़िया
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

10 अक्टूबर 2011 का पंचांग

वारसोमवार
तिथि
शुक्ल चतुर्दशी 05:09, 11 अक्टू॰ तक
पूर्णिमा 07:35, 12 अक्टू॰ तक
नक्षत्र
उत्तरा भाद्रपद 15:59, 11 अक्टू॰ तक
योग
वृद्धि 14:26 तक
ध्रुव 15:14, 11 अक्टू॰ तक
करण
गर 15:59 तक
वणिज 05:09, 11 अक्टू॰ तक
विष्टि (भद्रा) 18:21, 11 अक्टू॰ तक
चंद्र राशि
कुंभ 06:27 तक
सूर्य राशिकन्या
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:30
सूर्यास्त
17:16
चंद्रोदय
16:03
चंद्रास्त
03:51
दिनमान
11h 45m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
आश्विन
मास (पूर्णिमांत)
आश्विन
विक्रम संवत
2068
शक संवत
1933, खर संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
03:53 – 04:41
अभिजीत मुहूर्त
11:00 – 11:47

अशुभ समय

राहुकाल
06:59 – 08:27
यमगंड
09:55 – 11:23
गुलिक काल
12:51 – 14:19

10 अक्टूबर 2011 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
अमृत05:30 – 06:59शुभ
काल06:59 – 08:27टालें
शुभ08:27 – 09:55शुभ
रोग09:55 – 11:23टालें
उद्वेग11:23 – 12:51टालें
चर12:51 – 14:19सामान्य
लाभ14:19 – 15:48शुभ
अमृत15:48 – 17:16शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
चर17:16 – 18:48सामान्य
रोग18:48 – 20:19टालें
काल20:19 – 21:51टालें
लाभ21:51 – 23:23शुभ
उद्वेग23:23 – 00:55टालें
शुभ00:55 – 02:27शुभ
अमृत02:27 – 03:59शुभ
चर03:59 – 05:31सामान्य

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
चंद्र05:3006:29दिन
शनि06:2907:28दिन
गुरु07:2808:27दिन
मंगल08:2709:25दिन
सूर्य09:2510:24दिन
शुक्र10:2411:23दिन
बुध11:2312:22दिन
चंद्र12:2213:21दिन
शनि13:2114:19दिन
गुरु14:1915:18दिन
मंगल15:1816:17दिन
सूर्य16:1717:16दिन
शुक्र17:1618:17रात
बुध18:1719:18रात
चंद्र19:1820:19रात
शनि20:1921:21रात
गुरु21:2122:22रात
मंगल22:2223:23रात
सूर्य23:2300:24रात
शुक्र00:2401:26रात
बुध01:2602:27रात
चंद्र02:2703:28रात
शनि03:2804:29रात
गुरु04:2905:31रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
11 अक्टू॰ 2011आश्विन पूर्णिमापूर्णिमा
16 अक्टू॰ 2011संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
17 अक्टू॰ 2011तुला संक्रांतिसूर्य का तुला में प्रवेश
20 अक्टू॰ 2011कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
23 अक्टू॰ 2011कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
25 अक्टू॰ 2011प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
26 अक्टू॰ 2011कार्तिक अमावस्याअमावस्या
30 अक्टू॰ 2011विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
6 नव॰ 2011शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
8 नव॰ 2011प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी

तिथियां कोलकाता में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.0215° (लाहिड़ी)। समय कोलकाता (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।