31 अक्टूबर 2012 को कोलकाता का पंचांग

बुधवार, 31 अक्टूबर 2012, कोलकाता, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

बुधवार, 31 अक्टूबर 2012 को कोलकाता में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण द्वितीया (06:16, 1 नव॰ तक), नक्षत्र कृत्तिका (08:23, 1 नव॰ तक) और योग व्यतीपात है। सूर्योदय 05:40 पर और सूर्यास्त 16:59 पर है। राहुकाल 11:20 से 12:44 तक है।

दिन और रात
दिन 05:40 – 16:59
रात 05:41 तक
तिथि
द्वितीया
नक्षत्र
कृत्तिका
चौघड़िया
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

31 अक्टूबर 2012 का पंचांग

वारबुधवार
तिथि
कृष्ण द्वितीया 06:16, 1 नव॰ तक
नक्षत्र
कृत्तिका 08:23, 1 नव॰ तक
योग
व्यतीपातअशुभ 16:40 तक
वरीयान 17:40, 1 नव॰ तक
करण
तैतिल 16:57 तक
गर 06:16, 1 नव॰ तक
चंद्र राशि
मेष 12:04 तक
सूर्य राशितुला
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:40
सूर्यास्त
16:59
चंद्रोदय
18:01
चंद्रास्त
06:44
दिनमान
11h 19m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
आश्विन
मास (पूर्णिमांत)
कार्तिक
विक्रम संवत
2069
शक संवत
1934, नंदन संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
03:59 – 04:49
अभिजीत मुहूर्त
10:57 – 11:42 (बुधवार को पारंपरिक रूप से वर्जित)

अशुभ समय

राहुकाल
11:20 – 12:44
यमगंड
07:05 – 08:30
गुलिक काल
09:55 – 11:20

31 अक्टूबर 2012 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
लाभ05:40 – 07:05शुभ
अमृत07:05 – 08:30शुभ
काल08:30 – 09:55टालें
शुभ09:55 – 11:20शुभ
रोग11:20 – 12:44टालें
उद्वेग12:44 – 14:09टालें
चर14:09 – 15:34सामान्य
लाभ15:34 – 16:59शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग16:59 – 18:34टालें
शुभ18:34 – 20:09शुभ
अमृत20:09 – 21:45शुभ
चर21:45 – 23:20सामान्य
रोग23:20 – 00:55टालें
काल00:55 – 02:30टालें
लाभ02:30 – 04:05शुभ
उद्वेग04:05 – 05:41टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
बुध05:4006:37दिन
चंद्र06:3707:33दिन
शनि07:3308:30दिन
गुरु08:3009:26दिन
मंगल09:2610:23दिन
सूर्य10:2311:20दिन
शुक्र11:2012:16दिन
बुध12:1613:13दिन
चंद्र13:1314:09दिन
शनि14:0915:06दिन
गुरु15:0616:02दिन
मंगल16:0216:59दिन
सूर्य16:5918:02रात
शुक्र18:0219:06रात
बुध19:0620:09रात
चंद्र20:0921:13रात
शनि21:1322:16रात
गुरु22:1623:20रात
मंगल23:2000:23रात
सूर्य00:2301:27रात
शुक्र01:2702:30रात
बुध02:3003:34रात
चंद्र03:3404:37रात
शनि04:3705:41रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
3 नव॰ 2012संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
7 नव॰ 2012कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
10 नव॰ 2012कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
12 नव॰ 2012प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
13 नव॰ 2012कार्तिक अमावस्याअमावस्या
16 नव॰ 2012वृश्चिक संक्रांतिसूर्य का वृश्चिक में प्रवेश
17 नव॰ 2012विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
24 नव॰ 2012शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
26 नव॰ 2012प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
28 नव॰ 2012कार्तिक पूर्णिमापूर्णिमा

तिथियां कोलकाता में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.0363° (लाहिड़ी)। समय कोलकाता (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।