29 अगस्त 2026 को कोलकाता का पंचांग

शनिवार, 29 अगस्त 2026, कोलकाता, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

शनिवार, 29 अगस्त 2026 को कोलकाता में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण प्रतिपदा (09:57 तक), नक्षत्र पूर्वा भाद्रपद (03:42, 30 अग॰ तक) और योग सुकर्मा है। सूर्योदय 05:18 पर और सूर्यास्त 17:56 पर है। राहुकाल 08:27 से 10:02 तक है।

दिन और रात
दिन 05:18 – 17:56
रात 05:18 तक
तिथि
प्रतिपदा, 09:57 तक
द्वितीया
नक्षत्र
पूर्वा भाद्रपद, 03:42 तक
चौघड़िया
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

29 अगस्त 2026 का पंचांग

वारशनिवार
तिथि
कृष्ण प्रतिपदा 09:57 तक
कृष्ण द्वितीया 09:37, 30 अग॰ तक
नक्षत्र
पूर्वा भाद्रपद 03:42, 30 अग॰ तक
उत्तरा भाद्रपद 03:45, 31 अग॰ तक
योग
सुकर्मा 06:36 तक
धृति 05:21, 30 अग॰ तक
करण
कौलव 09:57 तक
तैतिल 21:50 तक
गर 09:37, 30 अग॰ तक
चंद्र राशि
कुंभ 21:37 तक
सूर्य राशिसिंह
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:18
सूर्यास्त
17:56
चंद्रोदय
18:37
चंद्रास्त
06:05
दिनमान
12h 38m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
श्रावण
मास (पूर्णिमांत)
भाद्रपद
विक्रम संवत
2083
शक संवत
1948, पराभव संवत्सर
ऋतु
वर्षा
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
03:47 – 04:32
अभिजीत मुहूर्त
11:12 – 12:02

अशुभ समय

राहुकाल
08:27 – 10:02
यमगंड
13:12 – 14:47
गुलिक काल
05:18 – 06:52

29 अगस्त 2026 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
काल05:18 – 06:52टालें
शुभ06:52 – 08:27शुभ
रोग08:27 – 10:02टालें
उद्वेग10:02 – 11:37टालें
चर11:37 – 13:12सामान्य
लाभ13:12 – 14:47शुभ
अमृत14:47 – 16:21शुभ
काल16:21 – 17:56टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
लाभ17:56 – 19:21शुभ
उद्वेग19:21 – 20:47टालें
शुभ20:47 – 22:12शुभ
अमृत22:12 – 23:37शुभ
चर23:37 – 01:02सामान्य
रोग01:02 – 02:28टालें
काल02:28 – 03:53टालें
लाभ03:53 – 05:18शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शनि05:1806:21दिन
गुरु06:2107:24दिन
मंगल07:2408:27दिन
सूर्य08:2709:30दिन
शुक्र09:3010:34दिन
बुध10:3411:37दिन
चंद्र11:3712:40दिन
शनि12:4013:43दिन
गुरु13:4314:47दिन
मंगल14:4715:50दिन
सूर्य15:5016:53दिन
शुक्र16:5317:56दिन
बुध17:5618:53रात
चंद्र18:5319:50रात
शनि19:5020:47रात
गुरु20:4721:43रात
मंगल21:4322:40रात
सूर्य22:4023:37रात
शुक्र23:3700:34रात
बुध00:3401:31रात
चंद्र01:3102:28रात
शनि02:2803:24रात
गुरु03:2404:21रात
मंगल04:2105:18रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
1 सित॰ 2026संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
4 सित॰ 2026कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
7 सित॰ 2026कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
9 सित॰ 2026प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
11 सित॰ 2026भाद्रपद अमावस्याअमावस्या
15 सित॰ 2026विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
17 सित॰ 2026कन्या संक्रांतिसूर्य का कन्या में प्रवेश
22 सित॰ 2026शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
24 सित॰ 2026प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
26 सित॰ 2026भाद्रपद पूर्णिमापूर्णिमा

तिथियां कोलकाता में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2294° (लाहिड़ी)। समय कोलकाता (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।