9 दिसंबर 2028 को कोलकाता का पंचांग

शनिवार, 9 दिसंबर 2028, कोलकाता, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

शनिवार, 9 दिसंबर 2028 को कोलकाता में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण अष्टमी (22:05 तक), नक्षत्र पूर्वा फाल्गुनी (16:40 तक) और योग प्रीति है। सूर्योदय 06:05 पर और सूर्यास्त 16:52 पर है। राहुकाल 08:47 से 10:08 तक है।

दिन और रात
दिन 06:05 – 16:52
रात 06:05 तक
तिथि
अष्टमी, 22:05 तक
नवमी
नक्षत्र
पूर्वा फाल्गुनी, 16:40 तक
उत्तरा फाल्गुनी
चौघड़िया
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

9 दिसंबर 2028 का पंचांग

वारशनिवार
तिथि
कृष्ण अष्टमी 22:05 तक
कृष्ण नवमी 19:52, 10 दिस॰ तक
नक्षत्र
उत्तरा फाल्गुनी 15:10, 10 दिस॰ तक
योग
प्रीति 02:42, 10 दिस॰ तक
आयुष्मान 23:39, 10 दिस॰ तक
करण
बालव 11:08 तक
कौलव 22:05 तक
तैतिल 09:00, 10 दिस॰ तक
चंद्र राशि
सिंह 22:18 तक
सूर्य राशिवृश्चिक
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:05
सूर्यास्त
16:52
चंद्रोदय
इस दिन चंद्रोदय नहीं
चंद्रास्त
11:30
दिनमान
10h 47m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
मार्गशीर्ष
मास (पूर्णिमांत)
पौष
विक्रम संवत
2085
शक संवत
1950, कीलक संवत्सर
ऋतु
हेमंत
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:19 – 05:12
अभिजीत मुहूर्त
11:07 – 11:50

अशुभ समय

राहुकाल
08:47 – 10:08
यमगंड
12:49 – 14:10
गुलिक काल
06:05 – 07:26

9 दिसंबर 2028 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
काल06:05 – 07:26टालें
शुभ07:26 – 08:47शुभ
रोग08:47 – 10:08टालें
उद्वेग10:08 – 11:28टालें
चर11:28 – 12:49सामान्य
लाभ12:49 – 14:10शुभ
अमृत14:10 – 15:31शुभ
काल15:31 – 16:52टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
लाभ16:52 – 18:31शुभ
उद्वेग18:31 – 20:10टालें
शुभ20:10 – 21:50शुभ
अमृत21:50 – 23:29शुभ
चर23:29 – 01:08सामान्य
रोग01:08 – 02:47टालें
काल02:47 – 04:26टालें
लाभ04:26 – 06:05शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शनि06:0506:59दिन
गुरु06:5907:53दिन
मंगल07:5308:47दिन
सूर्य08:4709:41दिन
शुक्र09:4110:34दिन
बुध10:3411:28दिन
चंद्र11:2812:22दिन
शनि12:2213:16दिन
गुरु13:1614:10दिन
मंगल14:1015:04दिन
सूर्य15:0415:58दिन
शुक्र15:5816:52दिन
बुध16:5217:58रात
चंद्र17:5819:04रात
शनि19:0420:10रात
गुरु20:1021:17रात
मंगल21:1722:23रात
सूर्य22:2323:29रात
शुक्र23:2900:35रात
बुध00:3501:41रात
चंद्र01:4102:47रात
शनि02:4703:53रात
गुरु03:5304:59रात
मंगल04:5906:05रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
9 दिस॰ 2028कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
12 दिस॰ 2028कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
14 दिस॰ 2028प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
15 दिस॰ 2028धनु संक्रांतिसूर्य का धनु में प्रवेश
16 दिस॰ 2028पौष अमावस्याअमावस्या
20 दिस॰ 2028विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
27 दिस॰ 2028शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
29 दिस॰ 2028प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
31 दिस॰ 2028पौष पूर्णिमापूर्णिमा
4 जन॰ 2029संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
7 जन॰ 2029कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी

तिथियां कोलकाता में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2613° (लाहिड़ी)। समय कोलकाता (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।