6 अक्टूबर 2091 को कोलकाता का पंचांग

शनिवार, 6 अक्टूबर 2091, कोलकाता, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

शनिवार, 6 अक्टूबर 2091 को कोलकाता में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण अष्टमी (13:47 तक), नक्षत्र आर्द्रा (05:47 तक) और योग परिघ है। सूर्योदय 05:29 पर और सूर्यास्त 17:19 पर है। राहुकाल 08:27 से 09:55 तक है।

दिन और रात
दिन 05:29 – 17:19
रात 05:30 तक
तिथि
अष्टमी, 13:47 तक
नवमी
नक्षत्र
पुनर्वसु
चौघड़िया
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

6 अक्टूबर 2091 का पंचांग

वारशनिवार
तिथि
कृष्ण अष्टमी 13:47 तक
कृष्ण नवमी 13:57, 7 अक्टू॰ तक
नक्षत्र
पुनर्वसु 06:50, 7 अक्टू॰ तक
योग
परिघअशुभ 15:23 तक
शिव 14:24, 7 अक्टू॰ तक
करण
कौलव 13:47 तक
तैतिल 01:58, 7 अक्टू॰ तक
गर 13:57, 7 अक्टू॰ तक
चंद्र राशि
मिथुन 00:38, 7 अक्टू॰ तक
सूर्य राशिकन्या
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:29
सूर्यास्त
17:19
चंद्रोदय
23:47
चंद्रास्त
12:26
दिनमान
11h 50m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
भाद्रपद
मास (पूर्णिमांत)
आश्विन
विक्रम संवत
2148
शक संवत
2013, विरोधकृत संवत्सर
ऋतु
वर्षा
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
03:52 – 04:41
अभिजीत मुहूर्त
11:00 – 11:48

अशुभ समय

राहुकाल
08:27 – 09:55
यमगंड
12:53 – 14:21
गुलिक काल
05:29 – 06:58

6 अक्टूबर 2091 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
काल05:29 – 06:58टालें
शुभ06:58 – 08:27शुभ
रोग08:27 – 09:55टालें
उद्वेग09:55 – 11:24टालें
चर11:24 – 12:53सामान्य
लाभ12:53 – 14:21शुभ
अमृत14:21 – 15:50शुभ
काल15:50 – 17:19टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
लाभ17:19 – 18:50शुभ
उद्वेग18:50 – 20:21टालें
शुभ20:21 – 21:53शुभ
अमृत21:53 – 23:24शुभ
चर23:24 – 00:55सामान्य
रोग00:55 – 02:27टालें
काल02:27 – 03:58टालें
लाभ03:58 – 05:30शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शनि05:2906:28दिन
गुरु06:2807:27दिन
मंगल07:2708:27दिन
सूर्य08:2709:26दिन
शुक्र09:2610:25दिन
बुध10:2511:24दिन
चंद्र11:2412:23दिन
शनि12:2313:22दिन
गुरु13:2214:21दिन
मंगल14:2115:21दिन
सूर्य15:2116:20दिन
शुक्र16:2017:19दिन
बुध17:1918:20रात
चंद्र18:2019:21रात
शनि19:2120:21रात
गुरु20:2121:22रात
मंगल21:2222:23रात
सूर्य22:2323:24रात
शुक्र23:2400:25रात
बुध00:2501:26रात
चंद्र01:2602:27रात
शनि02:2703:28रात
गुरु03:2804:29रात
मंगल04:2905:30रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
6 अक्टू॰ 2091कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
9 अक्टू॰ 2091कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
11 अक्टू॰ 2091प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
12 अक्टू॰ 2091आश्विन अमावस्याअमावस्या
16 अक्टू॰ 2091विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
18 अक्टू॰ 2091तुला संक्रांतिसूर्य का तुला में प्रवेश
22 अक्टू॰ 2091शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
25 अक्टू॰ 2091प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
27 अक्टू॰ 2091आश्विन पूर्णिमापूर्णिमा
31 अक्टू॰ 2091संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
4 नव॰ 2091कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी

तिथियां कोलकाता में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 25.1391° (लाहिड़ी)। समय कोलकाता (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।