9 अक्टूबर 2100 को कोलकाता का पंचांग

शनिवार, 9 अक्टूबर 2100, कोलकाता, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

शनिवार, 9 अक्टूबर 2100 को कोलकाता में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल सप्तमी (02:41, 10 अक्टू॰ तक), नक्षत्र मूल (23:05 तक) और योग शोभन है। सूर्योदय 05:30 पर और सूर्यास्त 17:16 पर है। राहुकाल 08:27 से 09:55 तक है।

दिन और रात
दिन 05:30 – 17:16
रात 05:31 तक
तिथि
सप्तमी, 02:41 तक
अष्टमी
नक्षत्र
मूल, 23:05 तक
पूर्वाषाढ़ा
चौघड़िया
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

9 अक्टूबर 2100 का पंचांग

वारशनिवार
तिथि
शुक्ल सप्तमी 02:41, 10 अक्टू॰ तक
शुक्ल अष्टमी 01:37, 11 अक्टू॰ तक
नक्षत्र
मूल 23:05 तक
पूर्वाषाढ़ा 22:36, 10 अक्टू॰ तक
योग
शोभन 02:27, 10 अक्टू॰ तक
अतिगंडअशुभ 00:27, 11 अक्टू॰ तक
करण
गर 15:28 तक
वणिज 02:41, 10 अक्टू॰ तक
विष्टि (भद्रा) 14:04, 10 अक्टू॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिकन्या
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:30
सूर्यास्त
17:16
चंद्रोदय
11:25
चंद्रास्त
22:08
दिनमान
11h 46m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
आश्विन
मास (पूर्णिमांत)
आश्विन
विक्रम संवत
2157
शक संवत
2022, रौद्र संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
03:52 – 04:41
अभिजीत मुहूर्त
11:00 – 11:47

अशुभ समय

राहुकाल
08:27 – 09:55
यमगंड
12:51 – 14:20
गुलिक काल
05:30 – 06:58

9 अक्टूबर 2100 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
काल05:30 – 06:58टालें
शुभ06:58 – 08:27शुभ
रोग08:27 – 09:55टालें
उद्वेग09:55 – 11:23टालें
चर11:23 – 12:51सामान्य
लाभ12:51 – 14:20शुभ
अमृत14:20 – 15:48शुभ
काल15:48 – 17:16टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
लाभ17:16 – 18:48शुभ
उद्वेग18:48 – 20:20टालें
शुभ20:20 – 21:52शुभ
अमृत21:52 – 23:23शुभ
चर23:23 – 00:55सामान्य
रोग00:55 – 02:27टालें
काल02:27 – 03:59टालें
लाभ03:59 – 05:31शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शनि05:3006:29दिन
गुरु06:2907:28दिन
मंगल07:2808:27दिन
सूर्य08:2709:26दिन
शुक्र09:2610:24दिन
बुध10:2411:23दिन
चंद्र11:2312:22दिन
शनि12:2213:21दिन
गुरु13:2114:20दिन
मंगल14:2015:19दिन
सूर्य15:1916:17दिन
शुक्र16:1717:16दिन
बुध17:1618:17रात
चंद्र18:1719:19रात
शनि19:1920:20रात
गुरु20:2021:21रात
मंगल21:2122:22रात
सूर्य22:2223:23रात
शुक्र23:2300:25रात
बुध00:2501:26रात
चंद्र01:2602:27रात
शनि02:2703:28रात
गुरु03:2804:29रात
मंगल04:2905:31रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
13 अक्टू॰ 2100शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
15 अक्टू॰ 2100प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
18 अक्टू॰ 2100आश्विन पूर्णिमापूर्णिमा
18 अक्टू॰ 2100तुला संक्रांतिसूर्य का तुला में प्रवेश
22 अक्टू॰ 2100संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
26 अक्टू॰ 2100कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
29 अक्टू॰ 2100कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
31 अक्टू॰ 2100प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
2 नव॰ 2100कार्तिक अमावस्याअमावस्या
5 नव॰ 2100विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी

तिथियां कोलकाता में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 25.2650° (लाहिड़ी)। समय कोलकाता (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।