24 जनवरी 2028 को कृष्णनगर का पंचांग

सोमवार, 24 जनवरी 2028, कृष्णनगर, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

सोमवार, 24 जनवरी 2028 को कृष्णनगर में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण त्रयोदशी (16:09 तक), नक्षत्र मूल (11:28 तक) और योग व्याघात है। सूर्योदय 06:18 पर और सूर्यास्त 17:17 पर है। राहुकाल 07:41 से 09:03 तक है।

दिन और रात
दिन 06:18 – 17:17
रात 06:18 तक
तिथि
त्रयोदशी, 16:09 तक
चतुर्दशी
नक्षत्र
मूल, 11:28 तक
पूर्वाषाढ़ा
चौघड़िया
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

24 जनवरी 2028 का पंचांग

वारसोमवार
तिथि
कृष्ण त्रयोदशी 16:09 तक
कृष्ण चतुर्दशी 18:17, 25 जन॰ तक
नक्षत्र
मूल 11:28 तक
पूर्वाषाढ़ा 13:59, 25 जन॰ तक
योग
व्याघातअशुभ 12:22 तक
हर्षण 12:50, 25 जन॰ तक
करण
वणिज 16:09 तक
विष्टि (भद्रा) 05:10, 25 जन॰ तक
शकुनि 18:17, 25 जन॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिमकर
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:18
सूर्यास्त
17:17
चंद्रोदय
04:31
चंद्रास्त
15:17
दिनमान
10h 58m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
पौष
मास (पूर्णिमांत)
माघ
विक्रम संवत
2084
शक संवत
1949, प्लवंग संवत्सर
ऋतु
हेमंत
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:34 – 05:26
अभिजीत मुहूर्त
11:26 – 12:09

अशुभ समय

राहुकाल
07:41 – 09:03
यमगंड
10:25 – 11:48
गुलिक काल
13:10 – 14:32

24 जनवरी 2028 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
अमृत06:18 – 07:41शुभ
काल07:41 – 09:03टालें
शुभ09:03 – 10:25शुभ
रोग10:25 – 11:48टालें
उद्वेग11:48 – 13:10टालें
चर13:10 – 14:32सामान्य
लाभ14:32 – 15:54शुभ
अमृत15:54 – 17:17शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
चर17:17 – 18:54सामान्य
रोग18:54 – 20:32टालें
काल20:32 – 22:10टालें
लाभ22:10 – 23:47शुभ
उद्वेग23:47 – 01:25टालें
शुभ01:25 – 03:03शुभ
अमृत03:03 – 04:41शुभ
चर04:41 – 06:18सामान्य

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
चंद्र06:1807:13दिन
शनि07:1308:08दिन
गुरु08:0809:03दिन
मंगल09:0309:58दिन
सूर्य09:5810:53दिन
शुक्र10:5311:48दिन
बुध11:4812:42दिन
चंद्र12:4213:37दिन
शनि13:3714:32दिन
गुरु14:3215:27दिन
मंगल15:2716:22दिन
सूर्य16:2217:17दिन
शुक्र17:1718:22रात
बुध18:2219:27रात
चंद्र19:2720:32रात
शनि20:3221:37रात
गुरु21:3722:42रात
मंगल22:4223:47रात
सूर्य23:4700:53रात
शुक्र00:5301:58रात
बुध01:5803:03रात
चंद्र03:0304:08रात
शनि04:0805:13रात
गुरु05:1306:18रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
24 जन॰ 2028प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
26 जन॰ 2028माघ अमावस्याअमावस्या
30 जन॰ 2028विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
7 फ़र॰ 2028शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
8 फ़र॰ 2028प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
10 फ़र॰ 2028माघ पूर्णिमापूर्णिमा
13 फ़र॰ 2028कुंभ संक्रांतिसूर्य का कुंभ में प्रवेश
14 फ़र॰ 2028संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
17 फ़र॰ 2028कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
20 फ़र॰ 2028कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी

तिथियां कृष्णनगर में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2491° (लाहिड़ी)। समय कृष्णनगर (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।