16 मई 2025 को लखनऊ का पंचांग

शुक्रवार, 16 मई 2025, लखनऊ, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

शुक्रवार, 16 मई 2025 को लखनऊ में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण चतुर्थी (05:14, 17 मई तक), नक्षत्र मूल (16:07 तक) और योग सिद्ध है। सूर्योदय 05:18 पर और सूर्यास्त 18:47 पर है। राहुकाल 10:21 से 12:02 तक है।

दिन और रात
दिन 05:18 – 18:47
रात 05:17 तक
तिथि
चतुर्थी, 05:14 तक
नक्षत्र
मूल, 16:07 तक
पूर्वाषाढ़ा
चौघड़िया
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

16 मई 2025 का पंचांग

वारशुक्रवार
तिथि
कृष्ण चतुर्थी 05:14, 17 मई तक
कृष्ण पंचमी 05:58, 18 मई तक
नक्षत्र
मूल 16:07 तक
पूर्वाषाढ़ा 17:44, 17 मई तक
योग
सिद्ध 07:14 तक
साध्य 07:08, 17 मई तक
करण
बव 16:41 तक
बालव 05:14, 17 मई तक
कौलव 17:39, 17 मई तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिवृषभ
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:18
सूर्यास्त
18:47
चंद्रोदय
22:18
चंद्रास्त
07:40
दिनमान
13h 29m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
वैशाख
मास (पूर्णिमांत)
ज्येष्ठ
विक्रम संवत
2082
शक संवत
1947, विश्वावसु संवत्सर
ऋतु
वसंत
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
03:53 – 04:36
अभिजीत मुहूर्त
11:35 – 12:29

अशुभ समय

राहुकाल
10:21 – 12:02
यमगंड
15:24 – 17:06
गुलिक काल
06:59 – 08:40

16 मई 2025 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
चर05:18 – 06:59सामान्य
लाभ06:59 – 08:40शुभ
अमृत08:40 – 10:21शुभ
काल10:21 – 12:02टालें
शुभ12:02 – 13:43शुभ
रोग13:43 – 15:24टालें
उद्वेग15:24 – 17:06टालें
चर17:06 – 18:47सामान्य
रात का चौघड़ियासमयफल
रोग18:47 – 20:06टालें
काल20:06 – 21:24टालें
लाभ21:24 – 22:43शुभ
उद्वेग22:43 – 00:02टालें
शुभ00:02 – 01:21शुभ
अमृत01:21 – 02:40शुभ
चर02:40 – 03:58सामान्य
रोग03:58 – 05:17टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शुक्र05:1806:25दिन
बुध06:2507:33दिन
चंद्र07:3308:40दिन
शनि08:4009:47दिन
गुरु09:4710:55दिन
मंगल10:5512:02दिन
सूर्य12:0213:10दिन
शुक्र13:1014:17दिन
बुध14:1715:24दिन
चंद्र15:2416:32दिन
शनि16:3217:39दिन
गुरु17:3918:47दिन
मंगल18:4719:39रात
सूर्य19:3920:32रात
शुक्र20:3221:24रात
बुध21:2422:17रात
चंद्र22:1723:09रात
शनि23:0900:02रात
गुरु00:0200:54रात
मंगल00:5401:47रात
सूर्य01:4702:40रात
शुक्र02:4003:32रात
बुध03:3204:25रात
चंद्र04:2505:17रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
16 मई 2025संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
20 मई 2025कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
23 मई 2025कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
25 मई 2025प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
27 मई 2025ज्येष्ठ अमावस्याअमावस्या
30 मई 2025विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
6 जून 2025शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
9 जून 2025प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
11 जून 2025ज्येष्ठ पूर्णिमापूर्णिमा

तिथियां लखनऊ में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2115° (लाहिड़ी)। समय लखनऊ (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।