9 जुलाई 2025 को लखनऊ का पंचांग

बुधवार, 9 जुलाई 2025, लखनऊ, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

बुधवार, 9 जुलाई 2025 को लखनऊ में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल चतुर्दशी (01:37, 10 जुल॰ तक), नक्षत्र मूल (04:49, 10 जुल॰ तक) और योग ब्रह्म है। सूर्योदय 05:19 पर और सूर्यास्त 19:03 पर है। राहुकाल 12:11 से 13:54 तक है।

दिन और रात
दिन 05:19 – 19:03
रात 05:19 तक
तिथि
चतुर्दशी, 01:37 तक
पूर्णिमा
नक्षत्र
मूल, 04:49 तक
चौघड़िया
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

9 जुलाई 2025 का पंचांग

वारबुधवार
तिथि
शुक्ल चतुर्दशी 01:37, 10 जुल॰ तक
पूर्णिमा 02:06, 11 जुल॰ तक
नक्षत्र
मूल 04:49, 10 जुल॰ तक
पूर्वाषाढ़ा 05:56, 11 जुल॰ तक
योग
ब्रह्म 22:08 तक
इंद्र 21:37, 10 जुल॰ तक
करण
गर 13:11 तक
वणिज 01:37, 10 जुल॰ तक
विष्टि (भद्रा) 13:55, 10 जुल॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिमिथुन
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:19
सूर्यास्त
19:03
चंद्रोदय
18:08
चंद्रास्त
03:28
दिनमान
13h 44m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
आषाढ़
मास (पूर्णिमांत)
आषाढ़
विक्रम संवत
2082
शक संवत
1947, विश्वावसु संवत्सर
ऋतु
ग्रीष्म
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
03:57 – 04:38
अभिजीत मुहूर्त
11:43 – 12:38 (बुधवार को पारंपरिक रूप से वर्जित)

अशुभ समय

राहुकाल
12:11 – 13:54
यमगंड
07:02 – 08:45
गुलिक काल
10:28 – 12:11

9 जुलाई 2025 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
लाभ05:19 – 07:02शुभ
अमृत07:02 – 08:45शुभ
काल08:45 – 10:28टालें
शुभ10:28 – 12:11शुभ
रोग12:11 – 13:54टालें
उद्वेग13:54 – 15:37टालें
चर15:37 – 17:20सामान्य
लाभ17:20 – 19:03शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग19:03 – 20:20टालें
शुभ20:20 – 21:37शुभ
अमृत21:37 – 22:54शुभ
चर22:54 – 00:11सामान्य
रोग00:11 – 01:28टालें
काल01:28 – 02:45टालें
लाभ02:45 – 04:02शुभ
उद्वेग04:02 – 05:19टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
बुध05:1906:27दिन
चंद्र06:2707:36दिन
शनि07:3608:45दिन
गुरु08:4509:54दिन
मंगल09:5411:02दिन
सूर्य11:0212:11दिन
शुक्र12:1113:20दिन
बुध13:2014:28दिन
चंद्र14:2815:37दिन
शनि15:3716:46दिन
गुरु16:4617:54दिन
मंगल17:5419:03दिन
सूर्य19:0319:54रात
शुक्र19:5420:46रात
बुध20:4621:37रात
चंद्र21:3722:28रात
शनि22:2823:20रात
गुरु23:2000:11रात
मंगल00:1101:02रात
सूर्य01:0201:54रात
शुक्र01:5402:45रात
बुध02:4503:37रात
चंद्र03:3704:28रात
शनि04:2805:19रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
10 जुल॰ 2025आषाढ़ पूर्णिमापूर्णिमा
14 जुल॰ 2025संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
16 जुल॰ 2025कर्क संक्रांतिसूर्य का कर्क में प्रवेश
18 जुल॰ 2025कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
21 जुल॰ 2025कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
22 जुल॰ 2025प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
24 जुल॰ 2025श्रावण अमावस्याअमावस्या
28 जुल॰ 2025विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
5 अग॰ 2025शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
7 अग॰ 2025प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी

तिथियां लखनऊ में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2135° (लाहिड़ी)। समय लखनऊ (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

सूची में से सबसे नज़दीकी शहर चुनें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।