15 अप्रैल 2026 को लखनऊ का पंचांग

बुधवार, 15 अप्रैल 2026, लखनऊ, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

बुधवार, 15 अप्रैल 2026 को लखनऊ में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण त्रयोदशी (22:31 तक), नक्षत्र पूर्वा भाद्रपद (15:22 तक) और योग ब्रह्म है। सूर्योदय 05:42 पर और सूर्यास्त 18:30 पर है। राहुकाल 12:06 से 13:42 तक है।

दिन और रात
दिन 05:42 – 18:30
रात 05:41 तक
तिथि
त्रयोदशी, 22:31 तक
चतुर्दशी
नक्षत्र
पूर्वा भाद्रपद, 15:22 तक
उत्तरा भाद्रपद
चौघड़िया
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

15 अप्रैल 2026 का पंचांग

वारबुधवार
तिथि
कृष्ण त्रयोदशी 22:31 तक
कृष्ण चतुर्दशी 20:11, 16 अप्रैल तक
नक्षत्र
उत्तरा भाद्रपद 13:59, 16 अप्रैल तक
योग
ब्रह्म 13:25 तक
इंद्र 10:37, 16 अप्रैल तक
करण
गर 11:27 तक
वणिज 22:31 तक
विष्टि (भद्रा) 09:26, 16 अप्रैल तक
चंद्र राशि
कुंभ 09:37 तक
सूर्य राशिमेष
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:42
सूर्यास्त
18:30
चंद्रोदय
04:04
चंद्रास्त
16:23
दिनमान
12h 48m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
चैत्र
मास (पूर्णिमांत)
वैशाख
विक्रम संवत
2083
शक संवत
1948, पराभव संवत्सर
ऋतु
वसंत
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:12 – 04:57
अभिजीत मुहूर्त
11:40 – 12:32 (बुधवार को पारंपरिक रूप से वर्जित)

अशुभ समय

राहुकाल
12:06 – 13:42
यमगंड
07:18 – 08:54
गुलिक काल
10:30 – 12:06

15 अप्रैल 2026 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
लाभ05:42 – 07:18शुभ
अमृत07:18 – 08:54शुभ
काल08:54 – 10:30टालें
शुभ10:30 – 12:06शुभ
रोग12:06 – 13:42टालें
उद्वेग13:42 – 15:18टालें
चर15:18 – 16:54सामान्य
लाभ16:54 – 18:30शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग18:30 – 19:54टालें
शुभ19:54 – 21:18शुभ
अमृत21:18 – 22:42शुभ
चर22:42 – 00:05सामान्य
रोग00:05 – 01:29टालें
काल01:29 – 02:53टालें
लाभ02:53 – 04:17शुभ
उद्वेग04:17 – 05:41टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
बुध05:4206:46दिन
चंद्र06:4607:50दिन
शनि07:5008:54दिन
गुरु08:5409:58दिन
मंगल09:5811:02दिन
सूर्य11:0212:06दिन
शुक्र12:0613:10दिन
बुध13:1014:14दिन
चंद्र14:1415:18दिन
शनि15:1816:22दिन
गुरु16:2217:26दिन
मंगल17:2618:30दिन
सूर्य18:3019:26रात
शुक्र19:2620:22रात
बुध20:2221:18रात
चंद्र21:1822:14रात
शनि22:1423:10रात
गुरु23:1000:05रात
मंगल00:0501:01रात
सूर्य01:0101:57रात
शुक्र01:5702:53रात
बुध02:5303:49रात
चंद्र03:4904:45रात
शनि04:4505:41रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
15 अप्रैल 2026प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
17 अप्रैल 2026वैशाख अमावस्याअमावस्या
20 अप्रैल 2026विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
27 अप्रैल 2026शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
29 अप्रैल 2026प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
1 मई 2026वैशाख पूर्णिमापूर्णिमा
5 मई 2026संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
10 मई 2026कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
13 मई 2026कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी

तिथियां लखनऊ में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2242° (लाहिड़ी)। समय लखनऊ (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

सूची में से सबसे नज़दीकी शहर चुनें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।