22 अप्रैल 2026 को लखनऊ का पंचांग

बुधवार, 22 अप्रैल 2026, लखनऊ, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

बुधवार, 22 अप्रैल 2026 को लखनऊ में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल षष्ठी (22:50 तक), नक्षत्र आर्द्रा (22:13 तक) और योग अतिगंड है। सूर्योदय 05:35 पर और सूर्यास्त 18:33 पर है। राहुकाल 12:04 से 13:42 तक है।

दिन और रात
दिन 05:35 – 18:33
रात 05:35 तक
तिथि
षष्ठी, 22:50 तक
सप्तमी
नक्षत्र
आर्द्रा, 22:13 तक
पुनर्वसु
चौघड़िया
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

22 अप्रैल 2026 का पंचांग

वारबुधवार
तिथि
शुक्ल षष्ठी 22:50 तक
शुक्ल सप्तमी 20:49, 23 अप्रैल तक
नक्षत्र
पुनर्वसु 20:57, 23 अप्रैल तक
योग
अतिगंडअशुभ 09:08 तक
सुकर्मा 06:07, 23 अप्रैल तक
करण
कौलव 12:01 तक
तैतिल 22:50 तक
गर 09:45, 23 अप्रैल तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिमेष
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:35
सूर्यास्त
18:33
चंद्रोदय
09:34
चंद्रास्त
इस दिन चंद्रास्त नहीं
दिनमान
12h 58m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
वैशाख
मास (पूर्णिमांत)
वैशाख
विक्रम संवत
2083
शक संवत
1948, पराभव संवत्सर
ऋतु
वसंत
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:07 – 04:51
अभिजीत मुहूर्त
11:39 – 12:30 (बुधवार को पारंपरिक रूप से वर्जित)

अशुभ समय

राहुकाल
12:04 – 13:42
यमगंड
07:13 – 08:50
गुलिक काल
10:27 – 12:04

22 अप्रैल 2026 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
लाभ05:35 – 07:13शुभ
अमृत07:13 – 08:50शुभ
काल08:50 – 10:27टालें
शुभ10:27 – 12:04शुभ
रोग12:04 – 13:42टालें
उद्वेग13:42 – 15:19टालें
चर15:19 – 16:56सामान्य
लाभ16:56 – 18:33शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग18:33 – 19:56टालें
शुभ19:56 – 21:19शुभ
अमृत21:19 – 22:41शुभ
चर22:41 – 00:04सामान्य
रोग00:04 – 01:27टालें
काल01:27 – 02:49टालें
लाभ02:49 – 04:12शुभ
उद्वेग04:12 – 05:35टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
बुध05:3506:40दिन
चंद्र06:4007:45दिन
शनि07:4508:50दिन
गुरु08:5009:55दिन
मंगल09:5511:00दिन
सूर्य11:0012:04दिन
शुक्र12:0413:09दिन
बुध13:0914:14दिन
चंद्र14:1415:19दिन
शनि15:1916:24दिन
गुरु16:2417:29दिन
मंगल17:2918:33दिन
सूर्य18:3319:28रात
शुक्र19:2820:24रात
बुध20:2421:19रात
चंद्र21:1922:14रात
शनि22:1423:09रात
गुरु23:0900:04रात
मंगल00:0400:59रात
सूर्य00:5901:54रात
शुक्र01:5402:49रात
बुध02:4903:44रात
चंद्र03:4404:39रात
शनि04:3905:35रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
27 अप्रैल 2026शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
29 अप्रैल 2026प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
1 मई 2026वैशाख पूर्णिमापूर्णिमा
5 मई 2026संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
10 मई 2026कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
13 मई 2026कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
15 मई 2026प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
15 मई 2026वृषभ संक्रांतिसूर्य का वृषभ में प्रवेश
16 मई 2026ज्येष्ठ अमावस्याअमावस्या
20 मई 2026विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी

तिथियां लखनऊ में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2245° (लाहिड़ी)। समय लखनऊ (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।