26 सितंबर 2026 को लखनऊ का पंचांग

शनिवार, 26 सितंबर 2026, लखनऊ, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

शनिवार, 26 सितंबर 2026 को लखनऊ में सूर्योदय के समय तिथि पूर्णिमा (22:18 तक), नक्षत्र पूर्वा भाद्रपद (11:32 तक) और योग गंड है। सूर्योदय 05:56 पर और सूर्यास्त 17:58 पर है। राहुकाल 08:56 से 10:27 तक है।

दिन और रात
दिन 05:56 – 17:58
रात 05:56 तक
तिथि
पूर्णिमा, 22:18 तक
प्रतिपदा
नक्षत्र
पूर्वा भाद्रपद, 11:32 तक
उत्तरा भाद्रपद
चौघड़िया
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

26 सितंबर 2026 का पंचांग

वारशनिवार
तिथि
पूर्णिमा 22:18 तक
कृष्ण प्रतिपदा 20:59, 27 सित॰ तक
नक्षत्र
उत्तरा भाद्रपद 11:08, 27 सित॰ तक
योग
गंडअशुभ 13:17 तक
वृद्धि 11:17, 27 सित॰ तक
करण
विष्टि (भद्रा) 10:47 तक
बव 22:19 तक
बालव 09:42, 27 सित॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिकन्या
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:56
सूर्यास्त
17:58
चंद्रोदय
17:39
चंद्रास्त
05:20
दिनमान
12h 2m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
भाद्रपद
मास (पूर्णिमांत)
भाद्रपद
विक्रम संवत
2083
शक संवत
1948, पराभव संवत्सर
ऋतु
वर्षा
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:20 – 05:08
अभिजीत मुहूर्त
11:33 – 12:21

अशुभ समय

राहुकाल
08:56 – 10:27
यमगंड
13:27 – 14:57
गुलिक काल
05:56 – 07:26

26 सितंबर 2026 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
काल05:56 – 07:26टालें
शुभ07:26 – 08:56शुभ
रोग08:56 – 10:27टालें
उद्वेग10:27 – 11:57टालें
चर11:57 – 13:27सामान्य
लाभ13:27 – 14:57शुभ
अमृत14:57 – 16:28शुभ
काल16:28 – 17:58टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
लाभ17:58 – 19:28शुभ
उद्वेग19:28 – 20:58टालें
शुभ20:58 – 22:27शुभ
अमृत22:27 – 23:57शुभ
चर23:57 – 01:27सामान्य
रोग01:27 – 02:57टालें
काल02:57 – 04:27टालें
लाभ04:27 – 05:56शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शनि05:5606:56दिन
गुरु06:5607:56दिन
मंगल07:5608:56दिन
सूर्य08:5609:57दिन
शुक्र09:5710:57दिन
बुध10:5711:57दिन
चंद्र11:5712:57दिन
शनि12:5713:57दिन
गुरु13:5714:57दिन
मंगल14:5715:58दिन
सूर्य15:5816:58दिन
शुक्र16:5817:58दिन
बुध17:5818:58रात
चंद्र18:5819:58रात
शनि19:5820:58रात
गुरु20:5821:57रात
मंगल21:5722:57रात
सूर्य22:5723:57रात
शुक्र23:5700:57रात
बुध00:5701:57रात
चंद्र01:5702:57रात
शनि02:5703:57रात
गुरु03:5704:56रात
मंगल04:5605:56रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
26 सित॰ 2026भाद्रपद पूर्णिमापूर्णिमा
30 सित॰ 2026संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
3 अक्टू॰ 2026कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
6 अक्टू॰ 2026कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
8 अक्टू॰ 2026प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
10 अक्टू॰ 2026आश्विन अमावस्याअमावस्या
14 अक्टू॰ 2026विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
17 अक्टू॰ 2026तुला संक्रांतिसूर्य का तुला में प्रवेश
22 अक्टू॰ 2026शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
24 अक्टू॰ 2026प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी

तिथियां लखनऊ में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2305° (लाहिड़ी)। समय लखनऊ (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।