10 मई 2027 को लखनऊ का पंचांग

सोमवार, 10 मई 2027, लखनऊ, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

सोमवार, 10 मई 2027 को लखनऊ में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल चतुर्थी (06:23 तक), नक्षत्र आर्द्रा (18:08 तक) और योग धृति है। सूर्योदय 05:21 पर और सूर्यास्त 18:43 पर है। राहुकाल 07:02 से 08:42 तक है।

दिन और रात
दिन 05:21 – 18:43
रात 05:21 तक
तिथि
पंचमी, 03:48 तक
षष्ठी
नक्षत्र
आर्द्रा, 18:08 तक
पुनर्वसु
चौघड़िया
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

10 मई 2027 का पंचांग

वारसोमवार
तिथि
शुक्ल चतुर्थी 06:23 तक
शुक्ल पंचमी 03:48, 11 मई तक
शुक्ल षष्ठी 01:24, 12 मई तक
नक्षत्र
पुनर्वसु 16:26, 11 मई तक
योग
धृति 20:06 तक
शूलअशुभ 17:00, 11 मई तक
करण
विष्टि (भद्रा) 06:23 तक
बव 17:05 तक
बालव 03:48, 11 मई तक
कौलव 14:34, 11 मई तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिमेष
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:21
सूर्यास्त
18:43
चंद्रोदय
08:36
चंद्रास्त
23:01
दिनमान
13h 22m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
वैशाख
मास (पूर्णिमांत)
वैशाख
विक्रम संवत
2084
शक संवत
1949, प्लवंग संवत्सर
ऋतु
वसंत
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
03:56 – 04:39
अभिजीत मुहूर्त
11:36 – 12:29

अशुभ समय

राहुकाल
07:02 – 08:42
यमगंड
10:22 – 12:02
गुलिक काल
13:43 – 15:23

10 मई 2027 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
अमृत05:21 – 07:02शुभ
काल07:02 – 08:42टालें
शुभ08:42 – 10:22शुभ
रोग10:22 – 12:02टालें
उद्वेग12:02 – 13:43टालें
चर13:43 – 15:23सामान्य
लाभ15:23 – 17:03शुभ
अमृत17:03 – 18:43शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
चर18:43 – 20:03सामान्य
रोग20:03 – 21:23टालें
काल21:23 – 22:42टालें
लाभ22:42 – 00:02शुभ
उद्वेग00:02 – 01:22टालें
शुभ01:22 – 02:41शुभ
अमृत02:41 – 04:01शुभ
चर04:01 – 05:21सामान्य

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
चंद्र05:2106:28दिन
शनि06:2807:35दिन
गुरु07:3508:42दिन
मंगल08:4209:49दिन
सूर्य09:4910:56दिन
शुक्र10:5612:02दिन
बुध12:0213:09दिन
चंद्र13:0914:16दिन
शनि14:1615:23दिन
गुरु15:2316:30दिन
मंगल16:3017:36दिन
सूर्य17:3618:43दिन
शुक्र18:4319:36रात
बुध19:3620:29रात
चंद्र20:2921:23रात
शनि21:2322:16रात
गुरु22:1623:09रात
मंगल23:0900:02रात
सूर्य00:0200:55रात
शुक्र00:5501:48रात
बुध01:4802:41रात
चंद्र02:4103:35रात
शनि03:3504:28रात
गुरु04:2805:21रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
10 मई 2027विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
15 मई 2027वृषभ संक्रांतिसूर्य का वृषभ में प्रवेश
16 मई 2027शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
18 मई 2027प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
20 मई 2027वैशाख पूर्णिमापूर्णिमा
24 मई 2027संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
29 मई 2027कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
1 जून 2027कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
3 जून 2027प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
4 जून 2027ज्येष्ठ अमावस्याअमावस्या
8 जून 2027विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी

तिथियां लखनऊ में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2392° (लाहिड़ी)। समय लखनऊ (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।