5 अगस्त 2027 को लखनऊ का पंचांग

गुरुवार, 5 अगस्त 2027, लखनऊ, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

गुरुवार, 5 अगस्त 2027 को लखनऊ में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल चतुर्थी (02:27, 6 अग॰ तक), नक्षत्र पूर्वा फाल्गुनी (09:19 तक) और योग परिघ है। सूर्योदय 05:32 पर और सूर्यास्त 18:51 पर है। राहुकाल 13:52 से 15:31 तक है।

दिन और रात
दिन 05:32 – 18:51
रात 05:33 तक
तिथि
चतुर्थी, 02:27 तक
पंचमी
नक्षत्र
उत्तरा फाल्गुनी
चौघड़िया
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

5 अगस्त 2027 का पंचांग

वारगुरुवार
तिथि
शुक्ल चतुर्थी 02:27, 6 अग॰ तक
शुक्ल पंचमी 00:23, 7 अग॰ तक
नक्षत्र
योग
परिघअशुभ 06:48 तक
शिव 03:35, 6 अग॰ तक
सिद्ध 00:51, 7 अग॰ तक
करण
वणिज 15:44 तक
विष्टि (भद्रा) 02:27, 6 अग॰ तक
बव 13:20, 6 अग॰ तक
चंद्र राशि
सिंह 14:49 तक
सूर्य राशिकर्क
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:32
सूर्यास्त
18:51
चंद्रोदय
08:31
चंद्रास्त
20:50
दिनमान
13h 19m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
श्रावण
मास (पूर्णिमांत)
श्रावण
विक्रम संवत
2084
शक संवत
1949, प्लवंग संवत्सर
ऋतु
वर्षा
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:07 – 04:49
अभिजीत मुहूर्त
11:45 – 12:38

अशुभ समय

राहुकाल
13:52 – 15:31
यमगंड
05:32 – 07:12
गुलिक काल
08:52 – 10:32

5 अगस्त 2027 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
शुभ05:32 – 07:12शुभ
रोग07:12 – 08:52टालें
उद्वेग08:52 – 10:32टालें
चर10:32 – 12:12सामान्य
लाभ12:12 – 13:52शुभ
अमृत13:52 – 15:31शुभ
काल15:31 – 17:11टालें
शुभ17:11 – 18:51शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
अमृत18:51 – 20:11शुभ
चर20:11 – 21:32सामान्य
रोग21:32 – 22:52टालें
काल22:52 – 00:12टालें
लाभ00:12 – 01:32शुभ
उद्वेग01:32 – 02:52टालें
शुभ02:52 – 04:12शुभ
अमृत04:12 – 05:33शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
गुरु05:3206:39दिन
मंगल06:3907:45दिन
सूर्य07:4508:52दिन
शुक्र08:5209:58दिन
बुध09:5811:05दिन
चंद्र11:0512:12दिन
शनि12:1213:18दिन
गुरु13:1814:25दिन
मंगल14:2515:31दिन
सूर्य15:3116:38दिन
शुक्र16:3817:45दिन
बुध17:4518:51दिन
चंद्र18:5119:45रात
शनि19:4520:38रात
गुरु20:3821:32रात
मंगल21:3222:25रात
सूर्य22:2523:18रात
शुक्र23:1800:12रात
बुध00:1201:05रात
चंद्र01:0501:59रात
शनि01:5902:52रात
गुरु02:5203:46रात
मंगल03:4604:39रात
सूर्य04:3905:33रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
5 अग॰ 2027विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
12 अग॰ 2027शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
14 अग॰ 2027प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
17 अग॰ 2027श्रावण पूर्णिमापूर्णिमा
17 अग॰ 2027सिंह संक्रांतिसूर्य का सिंह में प्रवेश
21 अग॰ 2027संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
25 अग॰ 2027कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
28 अग॰ 2027कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
30 अग॰ 2027प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
31 अग॰ 2027भाद्रपद अमावस्याअमावस्या

तिथियां लखनऊ में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2425° (लाहिड़ी)। समय लखनऊ (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।