13 अगस्त 2027 को लखनऊ का पंचांग

शुक्रवार, 13 अगस्त 2027, लखनऊ, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

शुक्रवार, 13 अगस्त 2027 को लखनऊ में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल द्वादशी (05:21, 14 अग॰ तक), नक्षत्र मूल (14:19 तक) और योग विष्कंभ है। सूर्योदय 05:36 पर और सूर्यास्त 18:45 पर है। राहुकाल 10:32 से 12:10 तक है।

दिन और रात
दिन 05:36 – 18:45
रात 05:37 तक
तिथि
द्वादशी, 05:21 तक
नक्षत्र
मूल, 14:19 तक
पूर्वाषाढ़ा
चौघड़िया
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

13 अगस्त 2027 का पंचांग

वारशुक्रवार
तिथि
शुक्ल द्वादशी 05:21, 14 अग॰ तक
शुक्ल त्रयोदशी 07:54, 15 अग॰ तक
नक्षत्र
मूल 14:19 तक
पूर्वाषाढ़ा 17:20, 14 अग॰ तक
योग
विष्कंभअशुभ 21:30 तक
प्रीति 22:31, 14 अग॰ तक
करण
बव 16:08 तक
बालव 05:21, 14 अग॰ तक
कौलव 18:37, 14 अग॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिकर्क
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:36
सूर्यास्त
18:45
चंद्रोदय
16:15
चंद्रास्त
01:48
दिनमान
13h 9m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
श्रावण
मास (पूर्णिमांत)
श्रावण
विक्रम संवत
2084
शक संवत
1949, प्लवंग संवत्सर
ऋतु
वर्षा
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:09 – 04:53
अभिजीत मुहूर्त
11:44 – 12:37

अशुभ समय

राहुकाल
10:32 – 12:10
यमगंड
15:28 – 17:06
गुलिक काल
07:15 – 08:53

13 अगस्त 2027 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
चर05:36 – 07:15सामान्य
लाभ07:15 – 08:53शुभ
अमृत08:53 – 10:32शुभ
काल10:32 – 12:10टालें
शुभ12:10 – 13:49शुभ
रोग13:49 – 15:28टालें
उद्वेग15:28 – 17:06टालें
चर17:06 – 18:45सामान्य
रात का चौघड़ियासमयफल
रोग18:45 – 20:06टालें
काल20:06 – 21:28टालें
लाभ21:28 – 22:49शुभ
उद्वेग22:49 – 00:11टालें
शुभ00:11 – 01:32शुभ
अमृत01:32 – 02:54शुभ
चर02:54 – 04:15सामान्य
रोग04:15 – 05:37टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शुक्र05:3606:42दिन
बुध06:4207:48दिन
चंद्र07:4808:53दिन
शनि08:5309:59दिन
गुरु09:5911:05दिन
मंगल11:0512:10दिन
सूर्य12:1013:16दिन
शुक्र13:1614:22दिन
बुध14:2215:28दिन
चंद्र15:2816:33दिन
शनि16:3317:39दिन
गुरु17:3918:45दिन
मंगल18:4519:39रात
सूर्य19:3920:33रात
शुक्र20:3321:28रात
बुध21:2822:22रात
चंद्र22:2223:16रात
शनि23:1600:11रात
गुरु00:1101:05रात
मंगल01:0501:59रात
सूर्य01:5902:54रात
शुक्र02:5403:48रात
बुध03:4804:42रात
चंद्र04:4205:37रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
14 अग॰ 2027प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
17 अग॰ 2027श्रावण पूर्णिमापूर्णिमा
17 अग॰ 2027सिंह संक्रांतिसूर्य का सिंह में प्रवेश
21 अग॰ 2027संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
25 अग॰ 2027कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
28 अग॰ 2027कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
30 अग॰ 2027प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
31 अग॰ 2027भाद्रपद अमावस्याअमावस्या
4 सित॰ 2027विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
11 सित॰ 2027शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी

तिथियां लखनऊ में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2428° (लाहिड़ी)। समय लखनऊ (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

सूची में से सबसे नज़दीकी शहर चुनें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।