2 अप्रैल 2028 को लखनऊ का पंचांग

रविवार, 2 अप्रैल 2028, लखनऊ, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

रविवार, 2 अप्रैल 2028 को लखनऊ में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल सप्तमी (13:22 तक), नक्षत्र आर्द्रा (01:57, 3 अप्रैल तक) और योग शोभन है। सूर्योदय 05:55 पर और सूर्यास्त 18:24 पर है। राहुकाल 16:50 से 18:24 तक है।

दिन और रात
दिन 05:55 – 18:24
रात 05:54 तक
तिथि
सप्तमी, 13:22 तक
अष्टमी
नक्षत्र
आर्द्रा, 01:57 तक
पुनर्वसु
चौघड़िया
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

2 अप्रैल 2028 का पंचांग

वाररविवार
तिथि
शुक्ल सप्तमी 13:22 तक
शुक्ल अष्टमी 12:00, 3 अप्रैल तक
नक्षत्र
आर्द्रा 01:57, 3 अप्रैल तक
पुनर्वसु 01:00, 4 अप्रैल तक
योग
शोभन 21:32 तक
अतिगंडअशुभ 19:10, 3 अप्रैल तक
करण
वणिज 13:22 तक
विष्टि (भद्रा) 00:45, 3 अप्रैल तक
बव 12:00, 3 अप्रैल तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिमीन
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:55
सूर्यास्त
18:24
चंद्रोदय
10:52
चंद्रास्त
00:18
दिनमान
12h 28m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
चैत्र
मास (पूर्णिमांत)
चैत्र
विक्रम संवत
2085
शक संवत
1950, कीलक संवत्सर
ऋतु
वसंत
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:23 – 05:09
अभिजीत मुहूर्त
11:44 – 12:34

अशुभ समय

राहुकाल
16:50 – 18:24
यमगंड
12:09 – 13:43
गुलिक काल
15:16 – 16:50

2 अप्रैल 2028 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग05:55 – 07:29टालें
चर07:29 – 09:02सामान्य
लाभ09:02 – 10:36शुभ
अमृत10:36 – 12:09शुभ
काल12:09 – 13:43टालें
शुभ13:43 – 15:16शुभ
रोग15:16 – 16:50टालें
उद्वेग16:50 – 18:24टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
शुभ18:24 – 19:50शुभ
अमृत19:50 – 21:16शुभ
चर21:16 – 22:43सामान्य
रोग22:43 – 00:09टालें
काल00:09 – 01:35टालें
लाभ01:35 – 03:02शुभ
उद्वेग03:02 – 04:28टालें
शुभ04:28 – 05:54शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
सूर्य05:5506:58दिन
शुक्र06:5808:00दिन
बुध08:0009:02दिन
चंद्र09:0210:05दिन
शनि10:0511:07दिन
गुरु11:0712:09दिन
मंगल12:0913:12दिन
सूर्य13:1214:14दिन
शुक्र14:1415:16दिन
बुध15:1616:19दिन
चंद्र16:1917:21दिन
शनि17:2118:24दिन
गुरु18:2419:21रात
मंगल19:2120:19रात
सूर्य20:1921:16रात
शुक्र21:1622:14रात
बुध22:1423:11रात
चंद्र23:1100:09रात
शनि00:0901:06रात
गुरु01:0602:04रात
मंगल02:0403:02रात
सूर्य03:0203:59रात
शुक्र03:5904:57रात
बुध04:5705:54रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
5 अप्रैल 2028शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
7 अप्रैल 2028प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
9 अप्रैल 2028चैत्र पूर्णिमापूर्णिमा
13 अप्रैल 2028संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
13 अप्रैल 2028मेष संक्रांतिसूर्य का मेष में प्रवेश
17 अप्रैल 2028कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
20 अप्रैल 2028कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
22 अप्रैल 2028प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
24 अप्रैल 2028वैशाख अमावस्याअमावस्या
28 अप्रैल 2028विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी

तिथियां लखनऊ में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2517° (लाहिड़ी)। समय लखनऊ (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।