18 मई 2028 को लखनऊ का पंचांग

गुरुवार, 18 मई 2028, लखनऊ, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

गुरुवार, 18 मई 2028 को लखनऊ में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण नवमी (07:56 तक), नक्षत्र पूर्वा भाद्रपद (07:53, 19 मई तक) और योग वैधृति है। सूर्योदय 05:17 पर और सूर्यास्त 18:48 पर है। राहुकाल 13:44 से 15:25 तक है।

दिन और रात
दिन 05:17 – 18:48
रात 05:16 तक
तिथि
नवमी, 07:56 तक
दशमी
नक्षत्र
पूर्वा भाद्रपद
चौघड़िया
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

18 मई 2028 का पंचांग

वारगुरुवार
तिथि
कृष्ण नवमी 07:56 तक
कृष्ण दशमी 10:11, 19 मई तक
नक्षत्र
योग
वैधृतिअशुभ 17:32 तक
विष्कंभअशुभ 18:15, 19 मई तक
करण
गर 07:56 तक
वणिज 21:06 तक
विष्टि (भद्रा) 10:11, 19 मई तक
चंद्र राशि
कुंभ 01:12, 19 मई तक
सूर्य राशिवृषभ
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:17
सूर्यास्त
18:48
चंद्रोदय
01:18
चंद्रास्त
13:29
दिनमान
13h 31m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
वैशाख
मास (पूर्णिमांत)
ज्येष्ठ
विक्रम संवत
2085
शक संवत
1950, कीलक संवत्सर
ऋतु
वसंत
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
03:53 – 04:35
अभिजीत मुहूर्त
11:35 – 12:29

अशुभ समय

राहुकाल
13:44 – 15:25
यमगंड
05:17 – 06:58
गुलिक काल
08:39 – 10:21

18 मई 2028 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
शुभ05:17 – 06:58शुभ
रोग06:58 – 08:39टालें
उद्वेग08:39 – 10:21टालें
चर10:21 – 12:02सामान्य
लाभ12:02 – 13:44शुभ
अमृत13:44 – 15:25शुभ
काल15:25 – 17:07टालें
शुभ17:07 – 18:48शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
अमृत18:48 – 20:07शुभ
चर20:07 – 21:25सामान्य
रोग21:25 – 22:44टालें
काल22:44 – 00:02टालें
लाभ00:02 – 01:21शुभ
उद्वेग01:21 – 02:39टालें
शुभ02:39 – 03:58शुभ
अमृत03:58 – 05:16शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
गुरु05:1706:24दिन
मंगल06:2407:32दिन
सूर्य07:3208:39दिन
शुक्र08:3909:47दिन
बुध09:4710:55दिन
चंद्र10:5512:02दिन
शनि12:0213:10दिन
गुरु13:1014:18दिन
मंगल14:1815:25दिन
सूर्य15:2516:33दिन
शुक्र16:3317:40दिन
बुध17:4018:48दिन
चंद्र18:4819:40रात
शनि19:4020:33रात
गुरु20:3321:25रात
मंगल21:2522:17रात
सूर्य22:1723:10रात
शुक्र23:1000:02रात
बुध00:0200:54रात
चंद्र00:5401:47रात
शनि01:4702:39रात
गुरु02:3903:31रात
मंगल03:3104:24रात
सूर्य04:2405:16रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
20 मई 2028कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
22 मई 2028प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
24 मई 2028ज्येष्ठ अमावस्याअमावस्या
28 मई 2028विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
3 जून 2028शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
5 जून 2028प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
7 जून 2028ज्येष्ठ पूर्णिमापूर्णिमा
11 जून 2028संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
15 जून 2028कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
15 जून 2028मिथुन संक्रांतिसूर्य का मिथुन में प्रवेश

तिथियां लखनऊ में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2535° (लाहिड़ी)। समय लखनऊ (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।