8 जून 2028 को लखनऊ का पंचांग

गुरुवार, 8 जून 2028, लखनऊ, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

गुरुवार, 8 जून 2028 को लखनऊ में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण प्रतिपदा (11:20 तक), नक्षत्र मूल (01:32, 9 जून तक) और योग शुभ है। सूर्योदय 05:11 पर और सूर्यास्त 18:58 पर है। राहुकाल 13:48 से 15:32 तक है।

दिन और रात
दिन 05:11 – 18:58
रात 05:11 तक
तिथि
प्रतिपदा, 11:20 तक
द्वितीया
नक्षत्र
मूल, 01:32 तक
पूर्वाषाढ़ा
चौघड़िया
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

8 जून 2028 का पंचांग

वारगुरुवार
तिथि
कृष्ण प्रतिपदा 11:20 तक
कृष्ण द्वितीया 11:37, 9 जून तक
नक्षत्र
मूल 01:32, 9 जून तक
पूर्वाषाढ़ा 02:52, 10 जून तक
योग
शुभ 23:53 तक
शुक्ल 23:23, 9 जून तक
करण
कौलव 11:20 तक
तैतिल 23:24 तक
गर 11:37, 9 जून तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिवृषभ
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:11
सूर्यास्त
18:58
चंद्रोदय
20:12
चंद्रास्त
05:48
दिनमान
13h 47m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
ज्येष्ठ
मास (पूर्णिमांत)
आषाढ़
विक्रम संवत
2085
शक संवत
1950, कीलक संवत्सर
ऋतु
ग्रीष्म
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
03:50 – 04:30
अभिजीत मुहूर्त
11:37 – 12:32

अशुभ समय

राहुकाल
13:48 – 15:32
यमगंड
05:11 – 06:55
गुलिक काल
08:38 – 10:22

8 जून 2028 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
शुभ05:11 – 06:55शुभ
रोग06:55 – 08:38टालें
उद्वेग08:38 – 10:22टालें
चर10:22 – 12:05सामान्य
लाभ12:05 – 13:48शुभ
अमृत13:48 – 15:32शुभ
काल15:32 – 17:15टालें
शुभ17:15 – 18:58शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
अमृत18:58 – 20:15शुभ
चर20:15 – 21:32सामान्य
रोग21:32 – 22:48टालें
काल22:48 – 00:05टालें
लाभ00:05 – 01:22शुभ
उद्वेग01:22 – 02:38टालें
शुभ02:38 – 03:55शुभ
अमृत03:55 – 05:11शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
गुरु05:1106:20दिन
मंगल06:2007:29दिन
सूर्य07:2908:38दिन
शुक्र08:3809:47दिन
बुध09:4710:56दिन
चंद्र10:5612:05दिन
शनि12:0513:14दिन
गुरु13:1414:23दिन
मंगल14:2315:32दिन
सूर्य15:3216:41दिन
शुक्र16:4117:50दिन
बुध17:5018:58दिन
चंद्र18:5819:50रात
शनि19:5020:41रात
गुरु20:4121:32रात
मंगल21:3222:23रात
सूर्य22:2323:14रात
शुक्र23:1400:05रात
बुध00:0500:56रात
चंद्र00:5601:47रात
शनि01:4702:38रात
गुरु02:3803:29रात
मंगल03:2904:20रात
सूर्य04:2005:11रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
11 जून 2028संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
15 जून 2028कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
15 जून 2028मिथुन संक्रांतिसूर्य का मिथुन में प्रवेश
18 जून 2028कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
20 जून 2028प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
22 जून 2028आषाढ़ अमावस्याअमावस्या
26 जून 2028विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
2 जुल॰ 2028शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
4 जुल॰ 2028प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
6 जुल॰ 2028आषाढ़ पूर्णिमापूर्णिमा

तिथियां लखनऊ में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2543° (लाहिड़ी)। समय लखनऊ (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

सूची में से सबसे नज़दीकी शहर चुनें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।