27 सितंबर 2029 को लखनऊ का पंचांग

गुरुवार, 27 सितंबर 2029, लखनऊ, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

गुरुवार, 27 सितंबर 2029 को लखनऊ में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण चतुर्थी (07:20 तक), नक्षत्र कृत्तिका (07:42, 28 सित॰ तक) और योग वज्र है। सूर्योदय 05:56 पर और सूर्यास्त 17:57 पर है। राहुकाल 13:26 से 14:56 तक है।

दिन और रात
दिन 05:56 – 17:57
रात 05:57 तक
तिथि
पंचमी
नक्षत्र
कृत्तिका
चौघड़िया
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

27 सितंबर 2029 का पंचांग

वारगुरुवार
तिथि
कृष्ण चतुर्थी 07:20 तक
कृष्ण पंचमी 09:50, 28 सित॰ तक
नक्षत्र
कृत्तिका 07:42, 28 सित॰ तक
योग
वज्रअशुभ 05:53, 28 सित॰ तक
सिद्धि 06:40, 29 सित॰ तक
करण
बालव 07:20 तक
कौलव 20:36 तक
तैतिल 09:50, 28 सित॰ तक
चंद्र राशि
मेष 11:27 तक
सूर्य राशिकन्या
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:56
सूर्यास्त
17:57
चंद्रोदय
20:35
चंद्रास्त
09:47
दिनमान
12h 0m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
भाद्रपद
मास (पूर्णिमांत)
आश्विन
विक्रम संवत
2086
शक संवत
1951, सौम्य संवत्सर
ऋतु
वर्षा
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:21 – 05:08
अभिजीत मुहूर्त
11:32 – 12:20

अशुभ समय

राहुकाल
13:26 – 14:56
यमगंड
05:56 – 07:26
गुलिक काल
08:56 – 10:26

27 सितंबर 2029 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
शुभ05:56 – 07:26शुभ
रोग07:26 – 08:56टालें
उद्वेग08:56 – 10:26टालें
चर10:26 – 11:56सामान्य
लाभ11:56 – 13:26शुभ
अमृत13:26 – 14:56शुभ
काल14:56 – 16:27टालें
शुभ16:27 – 17:57शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
अमृत17:57 – 19:27शुभ
चर19:27 – 20:57सामान्य
रोग20:57 – 22:27टालें
काल22:27 – 23:57टालें
लाभ23:57 – 01:27शुभ
उद्वेग01:27 – 02:57टालें
शुभ02:57 – 04:27शुभ
अमृत04:27 – 05:57शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
गुरु05:5606:56दिन
मंगल06:5607:56दिन
सूर्य07:5608:56दिन
शुक्र08:5609:56दिन
बुध09:5610:56दिन
चंद्र10:5611:56दिन
शनि11:5612:56दिन
गुरु12:5613:56दिन
मंगल13:5614:56दिन
सूर्य14:5615:57दिन
शुक्र15:5716:57दिन
बुध16:5717:57दिन
चंद्र17:5718:57रात
शनि18:5719:57रात
गुरु19:5720:57रात
मंगल20:5721:57रात
सूर्य21:5722:57रात
शुक्र22:5723:57रात
बुध23:5700:57रात
चंद्र00:5701:57रात
शनि01:5702:57रात
गुरु02:5703:57रात
मंगल03:5704:57रात
सूर्य04:5705:57रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
1 अक्टू॰ 2029कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
4 अक्टू॰ 2029कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
6 अक्टू॰ 2029प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
7 अक्टू॰ 2029आश्विन अमावस्याअमावस्या
11 अक्टू॰ 2029विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
17 अक्टू॰ 2029शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
17 अक्टू॰ 2029तुला संक्रांतिसूर्य का तुला में प्रवेश
20 अक्टू॰ 2029प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
22 अक्टू॰ 2029आश्विन पूर्णिमापूर्णिमा
26 अक्टू॰ 2029संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी

तिथियां लखनऊ में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2725° (लाहिड़ी)। समय लखनऊ (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

सूची में से सबसे नज़दीकी शहर चुनें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।