19 अगस्त 2029 को मुंबई का पंचांग

रविवार, 19 अगस्त 2029, मुंबई, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

रविवार, 19 अगस्त 2029 को मुंबई में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल दशमी (08:27 तक), नक्षत्र मूल (04:21, 20 अग॰ तक) और योग विष्कंभ है। सूर्योदय 06:20 पर और सूर्यास्त 19:03 पर है। राहुकाल 17:27 से 19:03 तक है।

दिन और रात
दिन 06:20 – 19:03
रात 06:20 तक
तिथि
एकादशी
नक्षत्र
मूल, 04:21 तक
पूर्वाषाढ़ा
चौघड़िया
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

19 अगस्त 2029 का पंचांग

वाररविवार
तिथि
शुक्ल दशमी 08:27 तक
शुक्ल एकादशी 07:30, 20 अग॰ तक
नक्षत्र
मूल 04:21, 20 अग॰ तक
पूर्वाषाढ़ा 04:26, 21 अग॰ तक
योग
विष्कंभअशुभ 23:25 तक
प्रीति 21:47, 20 अग॰ तक
करण
गर 08:27 तक
वणिज 19:56 तक
विष्टि (भद्रा) 07:30, 20 अग॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिसिंह
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:20
सूर्यास्त
19:03
चंद्रोदय
15:23
चंद्रास्त
01:39
दिनमान
12h 43m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
श्रावण
मास (पूर्णिमांत)
श्रावण
विक्रम संवत
2086
शक संवत
1951, सौम्य संवत्सर
ऋतु
वर्षा
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:50 – 05:35
अभिजीत मुहूर्त
12:16 – 13:07

अशुभ समय

राहुकाल
17:27 – 19:03
यमगंड
12:41 – 14:17
गुलिक काल
15:52 – 17:27

19 अगस्त 2029 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग06:20 – 07:55टालें
चर07:55 – 09:31सामान्य
लाभ09:31 – 11:06शुभ
अमृत11:06 – 12:41शुभ
काल12:41 – 14:17टालें
शुभ14:17 – 15:52शुभ
रोग15:52 – 17:27टालें
उद्वेग17:27 – 19:03टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
शुभ19:03 – 20:28शुभ
अमृत20:28 – 21:52शुभ
चर21:52 – 23:17सामान्य
रोग23:17 – 00:42टालें
काल00:42 – 02:06टालें
लाभ02:06 – 03:31शुभ
उद्वेग03:31 – 04:56टालें
शुभ04:56 – 06:20शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
सूर्य06:2007:24दिन
शुक्र07:2408:27दिन
बुध08:2709:31दिन
चंद्र09:3110:34दिन
शनि10:3411:38दिन
गुरु11:3812:41दिन
मंगल12:4113:45दिन
सूर्य13:4514:49दिन
शुक्र14:4915:52दिन
बुध15:5216:56दिन
चंद्र16:5617:59दिन
शनि17:5919:03दिन
गुरु19:0319:59रात
मंगल19:5920:56रात
सूर्य20:5621:52रात
शुक्र21:5222:49रात
बुध22:4923:45रात
चंद्र23:4500:42रात
शनि00:4201:38रात
गुरु01:3802:35रात
मंगल02:3503:31रात
सूर्य03:3104:27रात
शुक्र04:2705:24रात
बुध05:2406:20रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
20 अग॰ 2029शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
22 अग॰ 2029प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
24 अग॰ 2029श्रावण पूर्णिमापूर्णिमा
28 अग॰ 2029संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
1 सित॰ 2029कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
4 सित॰ 2029कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
6 सित॰ 2029प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
8 सित॰ 2029भाद्रपद अमावस्याअमावस्या
11 सित॰ 2029विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
17 सित॰ 2029कन्या संक्रांतिसूर्य का कन्या में प्रवेश

तिथियां मुंबई में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2710° (लाहिड़ी)। समय मुंबई (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।