14 नवंबर 2025 को नांदेड़ का पंचांग

शुक्रवार, 14 नवंबर 2025, नांदेड़, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

शुक्रवार, 14 नवंबर 2025 को नांदेड़ में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण दशमी (00:50, 15 नव॰ तक), नक्षत्र पूर्वा फाल्गुनी (21:20 तक) और योग वैधृति है। सूर्योदय 06:27 पर और सूर्यास्त 17:42 पर है। राहुकाल 10:40 से 12:05 तक है।

दिन और रात
दिन 06:27 – 17:42
रात 06:28 तक
तिथि
दशमी, 00:50 तक
एकादशी
नक्षत्र
पूर्वा फाल्गुनी, 21:20 तक
उत्तरा फाल्गुनी
चौघड़िया
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

14 नवंबर 2025 का पंचांग

वारशुक्रवार
तिथि
कृष्ण दशमी 00:50, 15 नव॰ तक
कृष्ण एकादशी 02:37, 16 नव॰ तक
नक्षत्र
योग
वैधृतिअशुभ 06:25, 15 नव॰ तक
विष्कंभअशुभ 06:46, 16 नव॰ तक
करण
वणिज 12:07 तक
विष्टि (भद्रा) 00:50, 15 नव॰ तक
बव 13:40, 15 नव॰ तक
चंद्र राशि
सिंह 03:51, 15 नव॰ तक
सूर्य राशितुला
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:27
सूर्यास्त
17:42
चंद्रोदय
01:26
चंद्रास्त
14:05
दिनमान
11h 15m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
कार्तिक
मास (पूर्णिमांत)
मार्गशीर्ष
विक्रम संवत
2082
शक संवत
1947, विश्वावसु संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:45 – 05:36
अभिजीत मुहूर्त
11:42 – 12:27

अशुभ समय

राहुकाल
10:40 – 12:05
यमगंड
14:53 – 16:18
गुलिक काल
07:52 – 09:16

14 नवंबर 2025 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
चर06:27 – 07:52सामान्य
लाभ07:52 – 09:16शुभ
अमृत09:16 – 10:40शुभ
काल10:40 – 12:05टालें
शुभ12:05 – 13:29शुभ
रोग13:29 – 14:53टालें
उद्वेग14:53 – 16:18टालें
चर16:18 – 17:42सामान्य
रात का चौघड़ियासमयफल
रोग17:42 – 19:18टालें
काल19:18 – 20:53टालें
लाभ20:53 – 22:29शुभ
उद्वेग22:29 – 00:05टालें
शुभ00:05 – 01:41शुभ
अमृत01:41 – 03:16शुभ
चर03:16 – 04:52सामान्य
रोग04:52 – 06:28टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शुक्र06:2707:23दिन
बुध07:2308:20दिन
चंद्र08:2009:16दिन
शनि09:1610:12दिन
गुरु10:1211:08दिन
मंगल11:0812:05दिन
सूर्य12:0513:01दिन
शुक्र13:0113:57दिन
बुध13:5714:53दिन
चंद्र14:5315:49दिन
शनि15:4916:46दिन
गुरु16:4617:42दिन
मंगल17:4218:46रात
सूर्य18:4619:50रात
शुक्र19:5020:53रात
बुध20:5321:57रात
चंद्र21:5723:01रात
शनि23:0100:05रात
गुरु00:0501:09रात
मंगल01:0902:12रात
सूर्य02:1203:16रात
शुक्र03:1604:20रात
बुध04:2005:24रात
चंद्र05:2406:28रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
15 नव॰ 2025कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
16 नव॰ 2025वृश्चिक संक्रांतिसूर्य का वृश्चिक में प्रवेश
17 नव॰ 2025प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
20 नव॰ 2025मार्गशीर्ष अमावस्याअमावस्या
24 नव॰ 2025विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
1 दिस॰ 2025शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
3 दिस॰ 2025प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
4 दिस॰ 2025मार्गशीर्ष पूर्णिमापूर्णिमा
8 दिस॰ 2025संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
12 दिस॰ 2025कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी

तिथियां नांदेड़ में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2184° (लाहिड़ी)। समय नांदेड़ (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।