27 फ़रवरी 2028 को नांदेड़ का पंचांग

रविवार, 27 फ़रवरी 2028, नांदेड़, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

रविवार, 27 फ़रवरी 2028 को नांदेड़ में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल द्वितीया (21:00 तक), नक्षत्र पूर्वा भाद्रपद (11:01 तक) और योग साध्य है। सूर्योदय 06:42 पर और सूर्यास्त 18:25 पर है। राहुकाल 16:57 से 18:25 तक है।

दिन और रात
दिन 06:42 – 18:25
रात 06:41 तक
तिथि
द्वितीया, 21:00 तक
तृतीया
नक्षत्र
पूर्वा भाद्रपद, 11:01 तक
उत्तरा भाद्रपद
चौघड़िया
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

27 फ़रवरी 2028 का पंचांग

वाररविवार
तिथि
शुक्ल द्वितीया 21:00 तक
शुक्ल तृतीया 23:02, 28 फ़र॰ तक
नक्षत्र
उत्तरा भाद्रपद 13:39, 28 फ़र॰ तक
योग
साध्य 22:19 तक
शुभ 22:48, 28 फ़र॰ तक
करण
बालव 07:52 तक
कौलव 21:00 तक
तैतिल 10:03, 28 फ़र॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिकुंभ
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:42
सूर्यास्त
18:25
चंद्रोदय
07:30
चंद्रास्त
19:59
दिनमान
11h 43m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
फाल्गुन
मास (पूर्णिमांत)
फाल्गुन
विक्रम संवत
2084
शक संवत
1949, प्लवंग संवत्सर
ऋतु
शिशिर
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:03 – 05:52
अभिजीत मुहूर्त
12:10 – 12:57

अशुभ समय

राहुकाल
16:57 – 18:25
यमगंड
12:33 – 14:01
गुलिक काल
15:29 – 16:57

27 फ़रवरी 2028 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग06:42 – 08:09टालें
चर08:09 – 09:37सामान्य
लाभ09:37 – 11:05शुभ
अमृत11:05 – 12:33शुभ
काल12:33 – 14:01टालें
शुभ14:01 – 15:29शुभ
रोग15:29 – 16:57टालें
उद्वेग16:57 – 18:25टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
शुभ18:25 – 19:57शुभ
अमृत19:57 – 21:29शुभ
चर21:29 – 23:01सामान्य
रोग23:01 – 00:33टालें
काल00:33 – 02:05टालें
लाभ02:05 – 03:37शुभ
उद्वेग03:37 – 05:09टालें
शुभ05:09 – 06:41शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
सूर्य06:4207:40दिन
शुक्र07:4008:39दिन
बुध08:3909:37दिन
चंद्र09:3710:36दिन
शनि10:3611:35दिन
गुरु11:3512:33दिन
मंगल12:3313:32दिन
सूर्य13:3214:30दिन
शुक्र14:3015:29दिन
बुध15:2916:28दिन
चंद्र16:2817:26दिन
शनि17:2618:25दिन
गुरु18:2519:26रात
मंगल19:2620:27रात
सूर्य20:2721:29रात
शुक्र21:2922:30रात
बुध22:3023:31रात
चंद्र23:3100:33रात
शनि00:3301:34रात
गुरु01:3402:35रात
मंगल02:3503:37रात
सूर्य03:3704:38रात
शुक्र04:3805:39रात
बुध05:3906:41रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
29 फ़र॰ 2028विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
7 मार्च 2028शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
9 मार्च 2028प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
11 मार्च 2028फाल्गुन पूर्णिमापूर्णिमा
14 मार्च 2028संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
14 मार्च 2028मीन संक्रांतिसूर्य का मीन में प्रवेश
18 मार्च 2028कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
21 मार्च 2028कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
23 मार्च 2028प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
26 मार्च 2028चैत्र अमावस्याअमावस्या

तिथियां नांदेड़ में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2504° (लाहिड़ी)। समय नांदेड़ (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।