25 जनवरी 2027 को पुणे का पंचांग

सोमवार, 25 जनवरी 2027, पुणे, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

सोमवार, 25 जनवरी 2027 को पुणे में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण तृतीया (08:10 तक), नक्षत्र पूर्वा फाल्गुनी (01:03, 26 जन॰ तक) और योग शोभन है। सूर्योदय 07:09 पर और सूर्यास्त 18:24 पर है। राहुकाल 08:33 से 09:58 तक है।

दिन और रात
दिन 07:09 – 18:24
रात 07:09 तक
तिथि
चतुर्थी, 06:00 तक
पंचमी
नक्षत्र
पूर्वा फाल्गुनी, 01:03 तक
उत्तरा फाल्गुनी
चौघड़िया
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

25 जनवरी 2027 का पंचांग

वारसोमवार
तिथि
कृष्ण तृतीया 08:10 तक
कृष्ण चतुर्थी 06:00, 26 जन॰ तक
कृष्ण पंचमी 04:33, 27 जन॰ तक
नक्षत्र
योग
शोभन 22:54 तक
अतिगंडअशुभ 20:18, 26 जन॰ तक
करण
विष्टि (भद्रा) 08:10 तक
बव 19:00 तक
बालव 06:00, 26 जन॰ तक
कौलव 17:11, 26 जन॰ तक
चंद्र राशि
सिंह 06:45, 26 जन॰ तक
सूर्य राशिमकर
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
07:09
सूर्यास्त
18:24
चंद्रोदय
21:28
चंद्रास्त
09:13
दिनमान
11h 15m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
पौष
मास (पूर्णिमांत)
माघ
विक्रम संवत
2083
शक संवत
1948, पराभव संवत्सर
ऋतु
हेमंत
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:27 – 06:18
अभिजीत मुहूर्त
12:24 – 13:09

अशुभ समय

राहुकाल
08:33 – 09:58
यमगंड
11:22 – 12:46
गुलिक काल
14:11 – 15:35

25 जनवरी 2027 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
अमृत07:09 – 08:33शुभ
काल08:33 – 09:58टालें
शुभ09:58 – 11:22शुभ
रोग11:22 – 12:46टालें
उद्वेग12:46 – 14:11टालें
चर14:11 – 15:35सामान्य
लाभ15:35 – 16:59शुभ
अमृत16:59 – 18:24शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
चर18:24 – 19:59सामान्य
रोग19:59 – 21:35टालें
काल21:35 – 23:11टालें
लाभ23:11 – 00:46शुभ
उद्वेग00:46 – 02:22टालें
शुभ02:22 – 03:58शुभ
अमृत03:58 – 05:33शुभ
चर05:33 – 07:09सामान्य

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
चंद्र07:0908:05दिन
शनि08:0509:01दिन
गुरु09:0109:58दिन
मंगल09:5810:54दिन
सूर्य10:5411:50दिन
शुक्र11:5012:46दिन
बुध12:4613:43दिन
चंद्र13:4314:39दिन
शनि14:3915:35दिन
गुरु15:3516:31दिन
मंगल16:3117:27दिन
सूर्य17:2718:24दिन
शुक्र18:2419:27रात
बुध19:2720:31रात
चंद्र20:3121:35रात
शनि21:3522:39रात
गुरु22:3923:43रात
मंगल23:4300:46रात
सूर्य00:4601:50रात
शुक्र01:5002:54रात
बुध02:5403:58रात
चंद्र03:5805:01रात
शनि05:0106:05रात
गुरु06:0507:09रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
25 जन॰ 2027संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
29 जन॰ 2027कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
2 फ़र॰ 2027कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
4 फ़र॰ 2027प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
6 फ़र॰ 2027माघ अमावस्याअमावस्या
10 फ़र॰ 2027विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
13 फ़र॰ 2027कुंभ संक्रांतिसूर्य का कुंभ में प्रवेश
17 फ़र॰ 2027शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
19 फ़र॰ 2027प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
20 फ़र॰ 2027माघ पूर्णिमापूर्णिमा

तिथियां पुणे में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2351° (लाहिड़ी)। समय पुणे (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।