8 जुलाई 2027 को पुणे का पंचांग

गुरुवार, 8 जुलाई 2027, पुणे, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

गुरुवार, 8 जुलाई 2027 को पुणे में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल पंचमी (16:07 तक), नक्षत्र पूर्वा फाल्गुनी (00:18, 9 जुल॰ तक) और योग व्यतीपात है। सूर्योदय 06:03 पर और सूर्यास्त 19:15 पर है। राहुकाल 14:18 से 15:57 तक है।

दिन और रात
दिन 06:03 – 19:15
रात 06:04 तक
तिथि
पंचमी, 16:07 तक
षष्ठी
नक्षत्र
पूर्वा फाल्गुनी, 00:18 तक
उत्तरा फाल्गुनी
चौघड़िया
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

8 जुलाई 2027 का पंचांग

वारगुरुवार
तिथि
शुक्ल पंचमी 16:07 तक
शुक्ल षष्ठी 14:04, 9 जुल॰ तक
नक्षत्र
पूर्वा फाल्गुनी 00:18, 9 जुल॰ तक
उत्तरा फाल्गुनी 23:16, 9 जुल॰ तक
योग
व्यतीपातअशुभ 20:53 तक
वरीयान 18:16, 9 जुल॰ तक
करण
बालव 16:07 तक
कौलव 03:01, 9 जुल॰ तक
तैतिल 14:04, 9 जुल॰ तक
चंद्र राशि
सिंह 05:59, 9 जुल॰ तक
सूर्य राशिमिथुन
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:03
सूर्यास्त
19:15
चंद्रोदय
10:17
चंद्रास्त
22:47
दिनमान
13h 11m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
आषाढ़
मास (पूर्णिमांत)
आषाढ़
विक्रम संवत
2084
शक संवत
1949, प्लवंग संवत्सर
ऋतु
ग्रीष्म
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:37 – 05:20
अभिजीत मुहूर्त
12:13 – 13:05

अशुभ समय

राहुकाल
14:18 – 15:57
यमगंड
06:03 – 07:42
गुलिक काल
09:21 – 11:00

8 जुलाई 2027 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
शुभ06:03 – 07:42शुभ
रोग07:42 – 09:21टालें
उद्वेग09:21 – 11:00टालें
चर11:00 – 12:39सामान्य
लाभ12:39 – 14:18शुभ
अमृत14:18 – 15:57शुभ
काल15:57 – 17:36टालें
शुभ17:36 – 19:15शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
अमृत19:15 – 20:36शुभ
चर20:36 – 21:57सामान्य
रोग21:57 – 23:18टालें
काल23:18 – 00:39टालें
लाभ00:39 – 02:00शुभ
उद्वेग02:00 – 03:21टालें
शुभ03:21 – 04:43शुभ
अमृत04:43 – 06:04शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
गुरु06:0307:09दिन
मंगल07:0908:15दिन
सूर्य08:1509:21दिन
शुक्र09:2110:27दिन
बुध10:2711:33दिन
चंद्र11:3312:39दिन
शनि12:3913:45दिन
गुरु13:4514:51दिन
मंगल14:5115:57दिन
सूर्य15:5717:03दिन
शुक्र17:0318:09दिन
बुध18:0919:15दिन
चंद्र19:1520:09रात
शनि20:0921:03रात
गुरु21:0321:57रात
मंगल21:5722:51रात
सूर्य22:5123:45रात
शुक्र23:4500:39रात
बुध00:3901:33रात
चंद्र01:3302:27रात
शनि02:2703:21रात
गुरु03:2104:16रात
मंगल04:1605:10रात
सूर्य05:1006:04रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
14 जुल॰ 2027शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
16 जुल॰ 2027प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
17 जुल॰ 2027कर्क संक्रांतिसूर्य का कर्क में प्रवेश
18 जुल॰ 2027आषाढ़ पूर्णिमापूर्णिमा
22 जुल॰ 2027संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
27 जुल॰ 2027कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
29 जुल॰ 2027कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
31 जुल॰ 2027प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
2 अग॰ 2027श्रावण अमावस्याअमावस्या
5 अग॰ 2027विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी

तिथियां पुणे में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2414° (लाहिड़ी)। समय पुणे (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।