19 जनवरी 2029 को रामेश्वरम का पंचांग

शुक्रवार, 19 जनवरी 2029, रामेश्वरम, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

शुक्रवार, 19 जनवरी 2029 को रामेश्वरम में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल पंचमी (06:40, 20 जन॰ तक), नक्षत्र पूर्वा भाद्रपद (01:18, 20 जन॰ तक) और योग वरीयान है। सूर्योदय 06:33 पर और सूर्यास्त 18:13 पर है। राहुकाल 10:56 से 12:23 तक है।

दिन और रात
दिन 06:33 – 18:13
रात 06:33 तक
तिथि
पंचमी
नक्षत्र
पूर्वा भाद्रपद, 01:18 तक
उत्तरा भाद्रपद
चौघड़िया
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

19 जनवरी 2029 का पंचांग

वारशुक्रवार
तिथि
शुक्ल पंचमी 06:40, 20 जन॰ तक
नक्षत्र
पूर्वा भाद्रपद 01:18, 20 जन॰ तक
उत्तरा भाद्रपद 04:15, 21 जन॰ तक
योग
वरीयान 08:26 तक
परिघअशुभ 09:10, 20 जन॰ तक
करण
बव 17:26 तक
बालव 06:40, 20 जन॰ तक
चंद्र राशि
कुंभ 18:35 तक
सूर्य राशिमकर
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:33
सूर्यास्त
18:13
चंद्रोदय
09:32
चंद्रास्त
21:53
दिनमान
11h 40m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
माघ
मास (पूर्णिमांत)
माघ
विक्रम संवत
2085
शक संवत
1950, कीलक संवत्सर
ऋतु
शिशिर
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:54 – 05:44
अभिजीत मुहूर्त
12:00 – 12:46

अशुभ समय

राहुकाल
10:56 – 12:23
यमगंड
15:18 – 16:45
गुलिक काल
08:01 – 09:28

19 जनवरी 2029 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
चर06:33 – 08:01सामान्य
लाभ08:01 – 09:28शुभ
अमृत09:28 – 10:56शुभ
काल10:56 – 12:23टालें
शुभ12:23 – 13:50शुभ
रोग13:50 – 15:18टालें
उद्वेग15:18 – 16:45टालें
चर16:45 – 18:13सामान्य
रात का चौघड़ियासमयफल
रोग18:13 – 19:45टालें
काल19:45 – 21:18टालें
लाभ21:18 – 22:51शुभ
उद्वेग22:51 – 00:23टालें
शुभ00:23 – 01:56शुभ
अमृत01:56 – 03:28शुभ
चर03:28 – 05:01सामान्य
रोग05:01 – 06:33टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शुक्र06:3307:31दिन
बुध07:3108:30दिन
चंद्र08:3009:28दिन
शनि09:2810:26दिन
गुरु10:2611:25दिन
मंगल11:2512:23दिन
सूर्य12:2313:21दिन
शुक्र13:2114:20दिन
बुध14:2015:18दिन
चंद्र15:1816:16दिन
शनि16:1617:15दिन
गुरु17:1518:13दिन
मंगल18:1319:15रात
सूर्य19:1520:16रात
शुक्र20:1621:18रात
बुध21:1822:20रात
चंद्र22:2023:21रात
शनि23:2100:23रात
गुरु00:2301:25रात
मंगल01:2502:27रात
सूर्य02:2703:28रात
शुक्र03:2804:30रात
बुध04:3005:32रात
चंद्र05:3206:33रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
26 जन॰ 2029शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
28 जन॰ 2029प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
30 जन॰ 2029माघ पूर्णिमापूर्णिमा
2 फ़र॰ 2029संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
6 फ़र॰ 2029कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
9 फ़र॰ 2029कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
11 फ़र॰ 2029प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
12 फ़र॰ 2029कुंभ संक्रांतिसूर्य का कुंभ में प्रवेश
13 फ़र॰ 2029फाल्गुन अमावस्याअमावस्या
17 फ़र॰ 2029विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी

तिथियां रामेश्वरम में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2629° (लाहिड़ी)। समय रामेश्वरम (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।