17 नवंबर 2027 को ठाणे का पंचांग

बुधवार, 17 नवंबर 2027, ठाणे, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

बुधवार, 17 नवंबर 2027 को ठाणे में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण चतुर्थी (01:35, 18 नव॰ तक), नक्षत्र आर्द्रा (03:18, 18 नव॰ तक) और योग सिद्ध है। सूर्योदय 06:46 पर और सूर्यास्त 17:59 पर है। राहुकाल 12:22 से 13:47 तक है।

दिन और रात
दिन 06:46 – 17:59
रात 06:47 तक
तिथि
चतुर्थी, 01:35 तक
पंचमी
नक्षत्र
आर्द्रा, 03:18 तक
पुनर्वसु
चौघड़िया
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

17 नवंबर 2027 का पंचांग

वारबुधवार
तिथि
कृष्ण चतुर्थी 01:35, 18 नव॰ तक
कृष्ण पंचमी 23:27, 18 नव॰ तक
नक्षत्र
आर्द्रा 03:18, 18 नव॰ तक
पुनर्वसु 01:52, 19 नव॰ तक
योग
सिद्ध 09:48 तक
साध्य 06:53, 18 नव॰ तक
करण
बव 14:39 तक
बालव 01:35, 18 नव॰ तक
कौलव 12:31, 18 नव॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिवृश्चिक
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:46
सूर्यास्त
17:59
चंद्रोदय
21:02
चंद्रास्त
09:49
दिनमान
11h 13m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
कार्तिक
मास (पूर्णिमांत)
मार्गशीर्ष
विक्रम संवत
2084
शक संवत
1949, प्लवंग संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:04 – 05:55
अभिजीत मुहूर्त
12:00 – 12:45 (बुधवार को पारंपरिक रूप से वर्जित)

अशुभ समय

राहुकाल
12:22 – 13:47
यमगंड
08:10 – 09:34
गुलिक काल
10:58 – 12:22

17 नवंबर 2027 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
लाभ06:46 – 08:10शुभ
अमृत08:10 – 09:34शुभ
काल09:34 – 10:58टालें
शुभ10:58 – 12:22शुभ
रोग12:22 – 13:47टालें
उद्वेग13:47 – 15:11टालें
चर15:11 – 16:35सामान्य
लाभ16:35 – 17:59शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग17:59 – 19:35टालें
शुभ19:35 – 21:11शुभ
अमृत21:11 – 22:47शुभ
चर22:47 – 00:23सामान्य
रोग00:23 – 01:59टालें
काल01:59 – 03:35टालें
लाभ03:35 – 05:11शुभ
उद्वेग05:11 – 06:47टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
बुध06:4607:42दिन
चंद्र07:4208:38दिन
शनि08:3809:34दिन
गुरु09:3410:30दिन
मंगल10:3011:26दिन
सूर्य11:2612:22दिन
शुक्र12:2213:18दिन
बुध13:1814:15दिन
चंद्र14:1515:11दिन
शनि15:1116:07दिन
गुरु16:0717:03दिन
मंगल17:0317:59दिन
सूर्य17:5919:03रात
शुक्र19:0320:07रात
बुध20:0721:11रात
चंद्र21:1122:15रात
शनि22:1523:19रात
गुरु23:1900:23रात
मंगल00:2301:27रात
सूर्य01:2702:31रात
शुक्र02:3103:35रात
बुध03:3504:39रात
चंद्र04:3905:43रात
शनि05:4306:47रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
17 नव॰ 2027संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
17 नव॰ 2027वृश्चिक संक्रांतिसूर्य का वृश्चिक में प्रवेश
21 नव॰ 2027कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
24 नव॰ 2027कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
26 नव॰ 2027प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
28 नव॰ 2027मार्गशीर्ष अमावस्याअमावस्या
2 दिस॰ 2027विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
9 दिस॰ 2027शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
11 दिस॰ 2027प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
13 दिस॰ 2027मार्गशीर्ष पूर्णिमापूर्णिमा
16 दिस॰ 2027धनु संक्रांतिसूर्य का धनु में प्रवेश

तिथियां ठाणे में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2465° (लाहिड़ी)। समय ठाणे (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।