28 जुलाई 2025 को वाराणसी का पंचांग

सोमवार, 28 जुलाई 2025, वाराणसी, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

सोमवार, 28 जुलाई 2025 को वाराणसी में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल चतुर्थी (23:24 तक), नक्षत्र पूर्वा फाल्गुनी (17:35 तक) और योग परिघ है। सूर्योदय 05:23 पर और सूर्यास्त 18:45 पर है। राहुकाल 07:03 से 08:43 तक है।

दिन और रात
दिन 05:23 – 18:45
रात 05:23 तक
तिथि
चतुर्थी, 23:24 तक
पंचमी
नक्षत्र
पूर्वा फाल्गुनी, 17:35 तक
उत्तरा फाल्गुनी
चौघड़िया
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

28 जुलाई 2025 का पंचांग

वारसोमवार
तिथि
शुक्ल चतुर्थी 23:24 तक
शुक्ल पंचमी 00:47, 30 जुल॰ तक
नक्षत्र
उत्तरा फाल्गुनी 19:27, 29 जुल॰ तक
योग
परिघअशुभ 02:53, 29 जुल॰ तक
शिव 03:04, 30 जुल॰ तक
करण
वणिज 10:58 तक
विष्टि (भद्रा) 23:24 तक
बव 12:01, 29 जुल॰ तक
चंद्र राशि
सिंह 00:00, 29 जुल॰ तक
सूर्य राशिकर्क
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:23
सूर्यास्त
18:45
चंद्रोदय
08:32
चंद्रास्त
21:09
दिनमान
13h 22m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
श्रावण
मास (पूर्णिमांत)
श्रावण
विक्रम संवत
2082
शक संवत
1947, विश्वावसु संवत्सर
ऋतु
वर्षा
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
03:58 – 04:40
अभिजीत मुहूर्त
11:37 – 12:31

अशुभ समय

राहुकाल
07:03 – 08:43
यमगंड
10:24 – 12:04
गुलिक काल
13:44 – 15:25

28 जुलाई 2025 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
अमृत05:23 – 07:03शुभ
काल07:03 – 08:43टालें
शुभ08:43 – 10:24शुभ
रोग10:24 – 12:04टालें
उद्वेग12:04 – 13:44टालें
चर13:44 – 15:25सामान्य
लाभ15:25 – 17:05शुभ
अमृत17:05 – 18:45शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
चर18:45 – 20:05सामान्य
रोग20:05 – 21:25टालें
काल21:25 – 22:44टालें
लाभ22:44 – 00:04शुभ
उद्वेग00:04 – 01:24टालें
शुभ01:24 – 02:44शुभ
अमृत02:44 – 04:04शुभ
चर04:04 – 05:23सामान्य

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
चंद्र05:2306:30दिन
शनि06:3007:37दिन
गुरु07:3708:43दिन
मंगल08:4309:50दिन
सूर्य09:5010:57दिन
शुक्र10:5712:04दिन
बुध12:0413:11दिन
चंद्र13:1114:18दिन
शनि14:1815:25दिन
गुरु15:2516:31दिन
मंगल16:3117:38दिन
सूर्य17:3818:45दिन
शुक्र18:4519:38रात
बुध19:3820:32रात
चंद्र20:3221:25रात
शनि21:2522:18रात
गुरु22:1823:11रात
मंगल23:1100:04रात
सूर्य00:0400:57रात
शुक्र00:5701:51रात
बुध01:5102:44रात
चंद्र02:4403:37रात
शनि03:3704:30रात
गुरु04:3005:23रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
28 जुल॰ 2025विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
5 अग॰ 2025शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
7 अग॰ 2025प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
9 अग॰ 2025श्रावण पूर्णिमापूर्णिमा
13 अग॰ 2025संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
16 अग॰ 2025कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
17 अग॰ 2025सिंह संक्रांतिसूर्य का सिंह में प्रवेश
19 अग॰ 2025कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
21 अग॰ 2025प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
23 अग॰ 2025भाद्रपद अमावस्याअमावस्या

तिथियां वाराणसी में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2143° (लाहिड़ी)। समय वाराणसी (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।