9 फ़रवरी 2027 को वाराणसी का पंचांग

मंगलवार, 9 फ़रवरी 2027, वाराणसी, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

मंगलवार, 9 फ़रवरी 2027 को वाराणसी में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल तृतीया (02:20, 10 फ़र॰ तक), नक्षत्र पूर्वा भाद्रपद (03:40, 10 फ़र॰ तक) और योग शिव है। सूर्योदय 06:37 पर और सूर्यास्त 17:47 पर है। राहुकाल 15:00 से 16:23 तक है।

दिन और रात
दिन 06:37 – 17:47
रात 06:36 तक
तिथि
तृतीया, 02:20 तक
चतुर्थी
नक्षत्र
पूर्वा भाद्रपद, 03:40 तक
उत्तरा भाद्रपद
चौघड़िया
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

9 फ़रवरी 2027 का पंचांग

वारमंगलवार
तिथि
शुक्ल तृतीया 02:20, 10 फ़र॰ तक
शुक्ल चतुर्थी 03:05, 11 फ़र॰ तक
नक्षत्र
पूर्वा भाद्रपद 03:40, 10 फ़र॰ तक
उत्तरा भाद्रपद 04:56, 11 फ़र॰ तक
योग
शिव 21:43 तक
सिद्ध 21:13, 10 फ़र॰ तक
करण
तैतिल 13:47 तक
गर 02:20, 10 फ़र॰ तक
वणिज 14:46, 10 फ़र॰ तक
चंद्र राशि
कुंभ 21:17 तक
सूर्य राशिमकर
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:37
सूर्यास्त
17:47
चंद्रोदय
07:57
चंद्रास्त
20:12
दिनमान
11h 11m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
माघ
मास (पूर्णिमांत)
माघ
विक्रम संवत
2083
शक संवत
1948, पराभव संवत्सर
ऋतु
शिशिर
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:54 – 05:45
अभिजीत मुहूर्त
11:50 – 12:34

अशुभ समय

राहुकाल
15:00 – 16:23
यमगंड
09:24 – 10:48
गुलिक काल
12:12 – 13:36

9 फ़रवरी 2027 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
रोग06:37 – 08:00टालें
उद्वेग08:00 – 09:24टालें
चर09:24 – 10:48सामान्य
लाभ10:48 – 12:12शुभ
अमृत12:12 – 13:36शुभ
काल13:36 – 15:00टालें
शुभ15:00 – 16:23शुभ
रोग16:23 – 17:47टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
काल17:47 – 19:23टालें
लाभ19:23 – 20:59शुभ
उद्वेग20:59 – 22:36टालें
शुभ22:36 – 00:12शुभ
अमृत00:12 – 01:48शुभ
चर01:48 – 03:24सामान्य
रोग03:24 – 05:00टालें
काल05:00 – 06:36टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
मंगल06:3707:33दिन
सूर्य07:3308:28दिन
शुक्र08:2809:24दिन
बुध09:2410:20दिन
चंद्र10:2011:16दिन
शनि11:1612:12दिन
गुरु12:1213:08दिन
मंगल13:0814:04दिन
सूर्य14:0415:00दिन
शुक्र15:0015:55दिन
बुध15:5516:51दिन
चंद्र16:5117:47दिन
शनि17:4718:51रात
गुरु18:5119:55रात
मंगल19:5520:59रात
सूर्य20:5922:03रात
शुक्र22:0323:08रात
बुध23:0800:12रात
चंद्र00:1201:16रात
शनि01:1602:20रात
गुरु02:2003:24रात
मंगल03:2404:28रात
सूर्य04:2805:32रात
शुक्र05:3206:36रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
10 फ़र॰ 2027विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
13 फ़र॰ 2027कुंभ संक्रांतिसूर्य का कुंभ में प्रवेश
17 फ़र॰ 2027शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
19 फ़र॰ 2027प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
20 फ़र॰ 2027माघ पूर्णिमापूर्णिमा
24 फ़र॰ 2027संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
28 फ़र॰ 2027कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
3 मार्च 2027कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
6 मार्च 2027प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
8 मार्च 2027फाल्गुन अमावस्याअमावस्या

तिथियां वाराणसी में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2357° (लाहिड़ी)। समय वाराणसी (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।