15 दिसंबर 2027 को वाराणसी का पंचांग

बुधवार, 15 दिसंबर 2027, वाराणसी, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

बुधवार, 15 दिसंबर 2027 को वाराणसी में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण द्वितीया (16:13 तक), नक्षत्र आर्द्रा (11:21 तक) और योग शुक्ल है। सूर्योदय 06:35 पर और सूर्यास्त 17:10 पर है। राहुकाल 11:52 से 13:12 तक है।

दिन और रात
दिन 06:35 – 17:10
रात 06:36 तक
तिथि
द्वितीया, 16:13 तक
तृतीया
नक्षत्र
आर्द्रा, 11:21 तक
पुनर्वसु
चौघड़िया
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

15 दिसंबर 2027 का पंचांग

वारबुधवार
तिथि
कृष्ण द्वितीया 16:13 तक
कृष्ण तृतीया 13:22, 16 दिस॰ तक
नक्षत्र
पुनर्वसु 09:13, 16 दिस॰ तक
योग
शुक्ल 13:15 तक
ब्रह्म 09:42, 16 दिस॰ तक
करण
गर 16:13 तक
वणिज 02:47, 16 दिस॰ तक
विष्टि (भद्रा) 13:22, 16 दिस॰ तक
चंद्र राशि
मिथुन 03:45, 16 दिस॰ तक
सूर्य राशिवृश्चिक
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:35
सूर्यास्त
17:10
चंद्रोदय
18:58
चंद्रास्त
08:07
दिनमान
10h 35m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
मार्गशीर्ष
मास (पूर्णिमांत)
पौष
विक्रम संवत
2084
शक संवत
1949, प्लवंग संवत्सर
ऋतु
हेमंत
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:48 – 05:41
अभिजीत मुहूर्त
11:31 – 12:14 (बुधवार को पारंपरिक रूप से वर्जित)

अशुभ समय

राहुकाल
11:52 – 13:12
यमगंड
07:54 – 09:14
गुलिक काल
10:33 – 11:52

15 दिसंबर 2027 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
लाभ06:35 – 07:54शुभ
अमृत07:54 – 09:14शुभ
काल09:14 – 10:33टालें
शुभ10:33 – 11:52शुभ
रोग11:52 – 13:12टालें
उद्वेग13:12 – 14:31टालें
चर14:31 – 15:50सामान्य
लाभ15:50 – 17:10शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग17:10 – 18:50टालें
शुभ18:50 – 20:31शुभ
अमृत20:31 – 22:12शुभ
चर22:12 – 23:53सामान्य
रोग23:53 – 01:34टालें
काल01:34 – 03:14टालें
लाभ03:14 – 04:55शुभ
उद्वेग04:55 – 06:36टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
बुध06:3507:28दिन
चंद्र07:2808:21दिन
शनि08:2109:14दिन
गुरु09:1410:07दिन
मंगल10:0711:00दिन
सूर्य11:0011:52दिन
शुक्र11:5212:45दिन
बुध12:4513:38दिन
चंद्र13:3814:31दिन
शनि14:3115:24दिन
गुरु15:2416:17दिन
मंगल16:1717:10दिन
सूर्य17:1018:17रात
शुक्र18:1719:24रात
बुध19:2420:31रात
चंद्र20:3121:38रात
शनि21:3822:46रात
गुरु22:4623:53रात
मंगल23:5301:00रात
सूर्य01:0002:07रात
शुक्र02:0703:14रात
बुध03:1404:21रात
चंद्र04:2105:29रात
शनि05:2906:36रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
16 दिस॰ 2027धनु संक्रांतिसूर्य का धनु में प्रवेश
17 दिस॰ 2027संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
20 दिस॰ 2027कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
23 दिस॰ 2027कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
25 दिस॰ 2027प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
27 दिस॰ 2027पौष अमावस्याअमावस्या
1 जन॰ 2028विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
8 जन॰ 2028शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
10 जन॰ 2028प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
12 जन॰ 2028पौष पूर्णिमापूर्णिमा

तिथियां वाराणसी में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2475° (लाहिड़ी)। समय वाराणसी (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

सूची में से सबसे नज़दीकी शहर चुनें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।