सातवें भाव में मंगल साझेदारी को जोशीला और कभी-कभी झगड़ालू बनाता है। यह मांगलिक दोष की प्रमुख स्थिति है; परंपरा के अनुसार समान ऊर्जा वाला या मांगलिक जीवनसाथी उचित माना जाता है।
सप्तम भाव किसका कारक है
सप्तम भाव, यानी कलत्र भाव, विवाह, जीवनसाथी, साझेदारी, व्यापारिक लेन-देन और सार्वजनिक जीवन से जुड़ा है। यह केंद्र भाव है, कुंडली के स्तंभों में से एक।
मंगल क्या देता है
मंगल ग्रहों के सेनापति हैं। ये साहस, ऊर्जा और कर्म करने की प्रेरणा देते हैं, और विवाह मिलान में मांगलिक दोष का आधार भी यही हैं।
परिणाम किन बातों से बदलता है
- राशि और अवस्था: मंगल उच्च या स्वराशि में हो तो इस स्थिति का सबसे अच्छा रूप मिलता है; नीच या शत्रु राशि में हो तो कमज़ोर रूप।
- भाव स्वामित्व: आपके लग्न के लिए मंगल किन भावों का स्वामी है, यह तय करता है कि वह सप्तम भाव में किन मामलों को लेकर आता है।
- दृष्टि और युति: गुरु की दृष्टि रक्षा करती है; शनि, मंगल या राहु दबाव बढ़ाते हैं।
- दशा: यह स्थिति मंगल की अपनी महादशा या अंतर्दशा (7 वर्ष की महादशा) में सबसे अधिक फल देती है।