डेमो जन्म कुंडली के लिए नमूना रिपोर्ट। आपकी रिपोर्ट आपके अपने जन्म विवरण से बनाई जाती है।

BhagyAstro

संपूर्ण कुंडली रिपोर्ट

Aarav

जन्म: 15 अगस्त 1990, 10:30, New Delhi, Delhi (UTC+05:30)।

16 अक्टूबर 2026 को BhagyAstro द्वारा तैयार

1 जन्म विवरण और कुंडलियाँ

लग्न कुंडली (D1)

6लग्न789शᴿ10रा11121मं2चं34सूगुशुके5बु

उत्तर भारतीय शैली में अंक राशियां दर्शाते हैं (1 = मेष … 12 = मीन); दक्षिण और पूर्वी शैली में राशियों के नाम दिखते हैं। ᴿ वक्री ग्रह को दर्शाता है।

मूल विवरण

नाम
Aarav
तिथि और समय
15 अग॰ 1990, 10:30
वार (वैदिक)
बुधवार
स्थान
New Delhi, Delhi
अक्षांश, देशांतर
28.6139°, 77.2090°
उपयोग किया गया टाइम ज़ोन
Asia/Kolkata (UTC+05:30)
सूर्योदय / सूर्यास्त
05:50 / 19:00
अयनांश (लाहिड़ी)
23° 43′ 33″
लग्न
कन्या 28° 42′ 30″
चंद्र राशि
वृषभ
सूर्य राशि (निरयण)
कर्क
नक्षत्र
रोहिणी, पद 3 (स्वामी चंद्र)

जन्म के समय का पंचांग

तिथि
कृष्ण दशमी
योग
व्याघात
करण
वणिज
नक्षत्र
रोहिणी
वार
बुधवार

अवकहड़ा चक्र

वर्ण
वैश्य
वश्य
चतुष्पद
योनि
सर्प
गण
मनुष्य
नाड़ी
अंत्य
तत्व
पृथ्वी
पाया
रजत पाया
नाम का पहला अक्षर
“Vi” (नक्षत्र पद का अक्षर)

आज चल रही दशा

महादशा
गुरु 3 दिस॰ 2034 तक
अंतर्दशा
शुक्र 15 जून 2029 तक
प्रत्यंतर
शुक्र 27 मार्च 2027 तक

जन्म के समय दशा शेष: चंद्र 3 वर्ष 3 माह 19 दिन।

त्वरित जांच

  • मांगलिक दोष: उपस्थित
  • कालसर्प दोष: उपस्थित नहीं
  • अभी साढ़ेसाती: नहीं

नवांश कुंडली (D9)

6लग्नशु7के8बुशᴿ9मं101112सू1रा23चं45गु

चंद्र कुंडली

2चं34सूगुशुके5बु6789शᴿ10रा11121मं

ग्रह स्थिति

ग्रहराशिअंशनक्षत्र (पद)नक्षत्र स्वामीभावस्थिति
लग्नकन्या28° 42′ 30″चित्रा (2)मंगल1—
सूर्यकर्क28° 23′ 42″आश्लेषा (4)बुध11—
चंद्रवृषभ18° 55′ 48″रोहिणी (3)चंद्र9—
मंगलमेष27° 29′ 12″कृत्तिका (1)सूर्य8—
बुधसिंह25° 26′ 45″पूर्वा फाल्गुनी (4)शुक्र12—
गुरुकर्क5° 36′ 23″पुष्य (1)शनि11—
शुक्रकर्क7° 50′ 32″पुष्य (2)शनि11—
शनिधनु26° 08′ 52″पूर्वाषाढ़ा (4)शुक्र4वक्री
राहुमकर12° 45′ 12″श्रवण (1)चंद्र5—
केतुकर्क12° 45′ 12″पुष्य (3)शनि11—
यूरेनसधनु12° 14′ 48″मूल (4)केतु4वक्री
नेपच्यूनधनु18° 28′ 06″पूर्वाषाढ़ा (2)शुक्र4वक्री
प्लूटोतुला21° 21′ 17″विशाखा (1)गुरु2—

2 व्यक्तित्व

आपका लग्न: कन्या

आपका लग्न (कन्या) आपके शरीर, दृष्टिकोण और दुनिया से मिलने के ढंग को आकार देता है।

कन्या बुध के स्वामित्व वाली द्विस्वभाव पृथ्वी राशि है, और बुध यहीं उच्च का होता है। यह विश्लेषणात्मक, सेवाभावी राशि है जो बारीकियों, स्वास्थ्य और व्यवस्था पर ध्यान देती है।

आपके लग्न का स्वामी बुध आपके द्वादश भाव में (सिंह, मित्र राशि) स्थित है। लग्नेश दिखाता है कि आपकी जीवन-ऊर्जा स्वाभाविक रूप से किस दिशा में बहती है — यहां, खर्च, हानि, विदेश, नींद, एकांत, दान और मोक्ष की ओर।

स्वभाव

  • विश्लेषक और सटीक
  • विनम्र
  • मददगार
  • स्वयं के आलोचक

खूबियाँ

  • समस्याएँ सुलझाना
  • व्यवस्थित काम
  • स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता

चुनौतियाँ

  • हर चीज़ में पूर्णता की चाह
  • बेचैनी और चिंता
  • ज़रूरत से ज़्यादा आलोचना

आपकी चंद्र राशि: वृषभ

आपकी चंद्र राशि (वृषभ) आपके मन और भावनाओं को आकार देती है, और आपकी दशा व राशिफल का आधार है।

वृषभ शुक्र के स्वामित्व वाली स्थिर पृथ्वी राशि है, और इसी राशि में चंद्रमा उच्च का होता है। यह स्थिरता, धैर्य और सुख-सुविधा, सुंदरता व अच्छे भोजन के प्रति प्रेम देती है।

स्वभाव

  • शांत और भरोसेमंद
  • रसिक और कलाप्रेमी
  • पैसों के मामले में व्यावहारिक
  • एक बार ठान लें तो ज़िद्दी

खूबियाँ

  • लगन और दृढ़ता
  • आर्थिक समझ
  • रिश्तों में वफ़ादारी

चुनौतियाँ

  • बदलाव का विरोध
  • अधिकार-भावना
  • भोग-विलास में अति

आपका जन्म नक्षत्र रोहिणी (पद 3) है।

रोहिणी, जिसके स्वामी चंद्रमा और देवता सृष्टिकर्ता ब्रह्मा हैं, चंद्रमा का सबसे प्रिय नक्षत्र है। यह सुंदरता, उर्वरता, आकर्षण और सुख-सुविधा व विकास के प्रति प्रेम देता है।

आपके नक्षत्र के गुण

  • आकर्षक और कलाप्रेमी
  • स्थिर
  • रसिक
  • अधिकार-भावना वाले

उपयुक्त क्षेत्र

  • फ़ैशन और सौंदर्य
  • कृषि
  • संगीत और कला
  • आतिथ्य (हॉस्पिटैलिटी)

3 जीवन भविष्यफल

आपका लग्न: कन्या

स्वभाव और व्यक्तित्व

कन्या लग्न होने पर कुंडली का स्वामी बुध होता है, जो आपको तीक्ष्ण, व्यावहारिक और पैनी नज़र वाला मन देता है। आप वे बारीकियाँ देख लेते हैं जो दूसरों से छूट जाती हैं, आपको काम ठीक ढंग से होना पसंद है, और आप सबसे अधिक संतुष्ट तब होते हैं जब किसी के काम आ रहे हों। शास्त्रीय ग्रंथों में कन्या लग्न के जातक को बुद्धिमान, विनम्र, गणना और लेखन में कुशल, तथा वाणी और व्यवहार में परिष्कृत बताया गया है। अक्सर आप ही वह व्यक्ति होते हैं जो चुपचाप समस्याएँ सुलझाकर सब कुछ सुचारु रूप से चलाए रखता है। आपके विकास का क्षेत्र है पूर्णतावाद। चूँकि आपको हर कमी दिख जाती है, आप अपने या दूसरों के प्रति ज़रूरत से ज़्यादा आलोचनात्मक हो सकते हैं, छोटी-छोटी बातों पर चिंता कर सकते हैं या तब तक हिचकिचा सकते हैं जब तक सब कुछ बिल्कुल सही न लगे। 'इतना काफ़ी है' को स्वीकार करना, अपनी प्रगति की सराहना करना और दूसरों पर ज़िम्मेदारी का भरोसा करना सीख लें, तो आपका सावधान और मददगार स्वभाव आपको सच्चा संतोष देता है।

शारीरिक रूप-रंग

कन्या लग्न वाले लोग प्रायः सुघड़ और छरहरे शरीर के होते हैं, और उनका रूप-रंग साफ़-सुथरा और सँवरा हुआ रहता है। चेहरा अक्सर युवा और बुद्धिमान दिखता है, आँखें प्रायः साफ़ और सजग होती हैं। बहुत से लोगों का व्यवहार विनम्र और संयत होता है, और वे सादे, व्यावहारिक ढंग से कपड़े पहनते हैं। वे अक्सर अपनी उम्र से कम दिखते हैं और उनमें एक शांत, विचारशील भाव होता है जो दूसरों को आश्वस्त करता है और सहज ही पास आने देता है।

स्वास्थ्य

कालपुरुष में कन्या राशि आँतों और पाचन तंत्र की अधिपति है, और बुध का संबंध नसों से है। आप पा सकते हैं कि चिंता सीधे पेट पर असर करती है, जो अपच, अनियमित मल-त्याग या कुछ खाद्य पदार्थों के प्रति संवेदनशीलता के रूप में दिखती है। घबराहट, खराब नींद और ज़रूरत से ज़्यादा सोचना भी प्रवृत्तियाँ हो सकती हैं। आपका शरीर अच्छी दिनचर्या पर प्रायः अच्छी प्रतिक्रिया देता है। नियमित समय पर भोजन करें, रेशेदार और ताज़ा भोजन शामिल करें, अपनी रोज़ की आदतें सरल और एक-सी रखें, और हर दिन किसी ऐसी चीज़ के लिए समय निकालें जो सचमुच आपके मन को सुकून दे।

नक्षत्र फल: रोहिणी (3)

आपका जन्म नक्षत्र

चंद्रमा के सबसे प्रिय नक्षत्र रोहिणी में जन्म लेने के कारण आपसे प्रायः गर्मजोशी, आकर्षण और सुंदरता की स्वाभाविक समझ झलकती है। इसके देवता सृष्टिकर्ता ब्रह्मा हैं, और विकास इसका मुख्य विषय है: आप अक्सर चीज़ों को फलने-फूलने में मदद करते हैं — चाहे वह बगीचा हो, रिश्ते हों, व्यवसाय हो या रचनात्मक काम। शास्त्रों में इस नक्षत्र में जन्मे व्यक्ति को सत्यवादी, मधुरभाषी, स्थिर मन वाला और सुंदर रूप वाला बताया गया है। दूसरे लोग आपको आमतौर पर सौम्य, कलाप्रिय और साथ रहने में सुकून देने वाला मानते हैं — ऐसा व्यक्ति जो किसी भी जगह को अपनापन भरा बना देता है। आप स्थिरता, इंद्रियों के सुख, अच्छे भोजन, संगीत और वफ़ादार साथ को महत्व देते हैं। आपका आंतरिक जीवन भावुक और कल्पनाशील होता है; आप गहराई से महसूस करते हैं और किसी की दया या दिए हुए दुख को लंबे समय तक याद रख सकते हैं। मनुष्य गण का नक्षत्र होने के कारण रोहिणी सांसारिक आनंद और मानवीय गर्मजोशी में संतुलन रखता है। धैर्य, रचनात्मकता, स्थिर कार्य-नैतिकता और सहयोग आकर्षित करने की क्षमता आपकी विशेष ताकतें हैं। जिन आदतों पर ध्यान देना चाहिए वे हैं अधिकार-भाव, सुख-सुविधा से अत्यधिक लगाव, कभी-कभार की ज़िद और बदलाव का विरोध। जब आप बदलाव को विकास का हिस्सा बनने देते हैं, तो आपके मन की स्वाभाविक उर्वरता प्रायः हर उस चीज़ में स्थायी और सुंदर परिणाम लाती है जिसे आप सींचते हैं।

शिक्षा और आय

आप प्रायः शांत, सुखद माहौल में और जल्दबाज़ी के बजाय नियमित दोहराव से अच्छी तरह सीखते हैं। सौंदर्य से जुड़े और व्यावहारिक विषय अक्सर आपको आकर्षित करते हैं। अक्सर आपके अनुकूल क्षेत्रों में फ़ैशन, सौंदर्य और डिज़ाइन, कृषि, बागवानी और खाद्य, संगीत और कलाएँ, तथा आतिथ्य शामिल हैं। सुख-सुविधा रचने की आपकी क्षमता ग्राहकों से सीधे जुड़े कामों के लिए भी उपयुक्त हो सकती है। आय अक्सर धीरे-धीरे और स्थिरता से बनती है, विशेषकर ठोस संपत्तियों, रचनात्मक उत्पादों या भरोसेमंद संबंधों के ज़रिए। विलासिता की चीज़ों पर आवेग में खर्च करने से बचना आपके संसाधनों को बढ़ाने में मदद करता है।

पारिवारिक जीवन

परिवार और घर अक्सर आपकी खुशी के केंद्र में होते हैं। आप प्रायः एक गर्मजोशी भरा, आरामदायक घर बनाते हैं और साथ में भोजन, संगीत और उत्सवों का आनंद लेना पसंद करते हैं। साझेदारी में आप आमतौर पर स्नेही, वफ़ादार और रोमांटिक होते हैं, हालाँकि आपको ईर्ष्या या बार-बार आश्वासन पाने की ज़रूरत पर ध्यान देना पड़ सकता है। माँ या माँ-तुल्य व्यक्ति के साथ आपका रिश्ता अक्सर विशेष महत्व रखता है। बच्चों के साथ आप आमतौर पर कोमल और उदार होते हैं — उन्हें सुख-सुविधा देते हुए धीरे-धीरे अपनी क्षमताओं को निखारने के लिए प्रेरित करते हैं।

जीवन भविष्यफल

आपकी चंद्र राशि, वृषभ, से पढ़ा गया: आपका मन जीवन के हर पहलू से कैसे जुड़ता है।

चरित्र

वृषभ में चंद्रमा उच्च का होता है, और शास्त्रीय ग्रंथ इस स्थिति को शांत, स्थिर और सुखद स्वभाव देने वाली बताते हैं। आपकी भावनाएँ गहरी पर संतुलित हैं, और लोगों को आपकी उपस्थिति से भरोसा मिलता है। जिन पर आप विश्वास करते हैं, उनके प्रति आप वफ़ादार, धैर्यवान और उदार हैं, और आप सुख-सुविधा, सुंदरता व अच्छी संगत को महत्व देते हैं। राय बनाने में आप समय लेते हैं, पर एक बार तय कर लें तो अडिग रहते हैं। आपके विकास का क्षेत्र लचीलापन है: जीवन बदलने पर उसके अनुसार ढलना सीखना, और उन शिकायतों या आदतों को छोड़ना जो अब आपके काम की नहीं रहीं।

सुख और संतोष

सुरक्षा और सरल आनंद आपको तृप्त करते हैं: आरामदायक घर, अच्छा भोजन, संगीत, प्रकृति और प्रियजनों का स्थिर साथ। जब आपके जीवन में एक भरोसेमंद लय होती है और आप अपने धैर्यपूर्ण प्रयास का फल देख पाते हैं, तब आप संतुष्ट रहते हैं। आपको थकाते हैं लगातार उथल-पुथल, जल्दबाज़ी, या अव्यवस्था और शोर में रहना। अचानक बदलाव आपको जितना दिखता है उससे ज़्यादा विचलित कर सकते हैं। आपकी खुशी तब गहरी होती है जब आप जो है उसका आनंद लेते हैं पर उसे बहुत कसकर नहीं पकड़ते, और कुछ नयापन भी आने देते हैं।

जीवनशैली

आपको व्यवस्थित दिनचर्या और सुखद वातावरण पसंद है। नियमित भोजन, आरामदायक बिस्तर और सुव्यवस्थित घर आपके लिए जितना आप मानते हैं उससे कहीं ज़्यादा मायने रखते हैं। आप प्रायः मात्रा से ज़्यादा गुणवत्ता को चुनते हैं — बहुत-सी सस्ती चीज़ों के बजाय कुछ अच्छी बनी चीज़ें। धीमी सुबह और बेफ़िक्र शामें आपको भाती हैं। चूँकि आपको आराम पसंद है, इसलिए सप्ताह में कुछ नियमित शारीरिक गतिविधि रखना और ज़रूरत से ज़्यादा भोग-विलास की आदतों पर नज़र रखना मददगार है। नाटकीय बदलावों के बजाय छोटे, स्थिर परिवर्तन आपके लिए कहीं बेहतर हैं।

प्रेम

आप स्थिर, समर्पित और स्पर्श से जुड़ा प्रेम करते हैं। आपके लिए स्नेह बड़े-बड़े इशारों से नहीं, बल्कि साथ रहने, परवाह करने, साथ खाना खाने और छोटी-छोटी सुविधाओं से दिखता है। प्रतिबद्ध होने में आप समय लेते हैं, पर एक बार हो जाएँ तो गहराई से वफ़ादार रहते हैं और बदले में भी यही चाहते हैं। आपको ऐसा साथी चाहिए जो भरोसेमंद, स्नेही हो और आप दोनों के बनाए जीवन की कद्र करे। असुरक्षा महसूस होने पर अधिकार-भाव आ सकता है, इसलिए अपनी ज़रूरतों के बारे में खुलकर बात करना और साथी को भी बढ़ने की जगह देना मददगार है।

रुचियाँ

इंद्रियों को जोड़ने वाले शौक आपके लिए बहुत सुंदर हैं। खाना पकाना, बागवानी, संगीत, गायन, चित्रकारी, मिट्टी के बर्तन बनाना, सुगंध या कपड़ों का काम आपको सच्चा संतोष दे सकता है। सुंदर वस्तुएँ इकट्ठा करना या पौधों की देखभाल करके उन्हें मौसम-दर-मौसम बढ़ते देखना भी आपको अच्छा लग सकता है। प्रकृति में लंबी सैर और सुंदर जगहों की बेफ़िक्र यात्राएँ भी आपको तरोताज़ा करती हैं। चूँकि आपको आराम पसंद है, कम से कम एक ऐसा शौक ज़रूर रखें जो आपको सक्रिय रखे, जैसे नृत्य या बागवानी, ताकि विश्राम और गतिविधि साथ-साथ चलें।

धन

पैसों के प्रति आपका रवैया प्रायः व्यावहारिक और सावधान होता है। आपको बचत बढ़ती देखना अच्छा लगता है और आप अक्सर अमूर्त योजनाओं के बजाय ठोस संपत्ति, जैसे ज़मीन-जायदाद, सोना या अच्छी तरह सजा घर, पसंद करते हैं। लंबी अवधि की योजनाओं में आप धैर्य रख सकते हैं। साथ ही, सुख-सुविधा और गुणवत्ता के प्रति आपका प्रेम बढ़िया चीज़ों पर ख़र्च करवा सकता है। ऐसा स्पष्ट बजट, जिसमें आनंद की गुंजाइश भी हो और स्थिर बचत भी, आपके लिए उपयुक्त है। किसी ख़राब निवेश को सिर्फ़ इसलिए न पकड़े रहें कि आपको बदलाव पसंद नहीं।

शिक्षा

आप स्थिरता और गहराई से सीखते हैं। एक बार कोई बात याद हो जाए तो प्रायः टिकी रहती है, हालाँकि शुरुआत करने में आपको दूसरों से थोड़ा ज़्यादा समय लग सकता है। पढ़ाई के लिए शांत, आरामदायक जगह, नियमित समय-सारिणी और व्यावहारिक उदाहरण आपकी सबसे ज़्यादा मदद करते हैं। जल्दबाज़ी में रटना आपको नहीं जमता। संगीत, रंग या सुखद माहौल पढ़ाई को और आनंददायक बना सकते हैं। आपकी चुनौती नए तरीकों के प्रति खुलापन है, इसलिए जब आपका सामान्य तरीका काम न करे, तो कठिन विषय को किसी दूसरे कोण से समझने की कोशिश करें।

4 जीवन के क्षेत्र

करियर और व्यवसाय संतुलित

करियर का विचार दशम भाव (कर्म भाव), उसके स्वामी, उसमें स्थित ग्रहों, और नैसर्गिक कारक सूर्य व शनि से किया जाता है। अधिक बारीकी से देखने के लिए आपकी दशमांश (D10) कुंडली नीचे दी गई है।

इस क्षेत्र के संकेत संतुलित हैं — लगातार प्रयास से फल मिलते हैं।

आपका दशम भाव मिथुन राशि में है। इसके स्वामी बुध आपके द्वादश भाव में (सिंह, मित्र राशि) स्थित हैं।

इस भाव में कोई ग्रह नहीं है, इसलिए मुख्य फल इसका स्वामी देता है।

  • नैसर्गिक कारक सूर्य आपके एकादश भाव में (कर्क, मित्र राशि) स्थित है। बलवान सूर्य आत्मविश्वास, अच्छा स्वास्थ्य, मान-सम्मान और नेतृत्व या जनसेवा में सफलता देता है।
  • नैसर्गिक कारक शनि आपके चतुर्थ भाव में (धनु, सम राशि) स्थित है। पीड़ित शनि देरी, बोझ, अकेलापन और लंबे समय तक चलने वाली समस्याएँ लाता है।

आपकी कुंडली के अनुकूल क्षेत्र

  • अकाउंटिंग और ऑडिट
  • चिकित्सा और फ़ार्मेसी
  • संपादन और शोध
  • डेटा विश्लेषण
  • बैंकिंग और वित्त
  • कृषि और खाद्य
  • संगीत, फ़ैशन और डिज़ाइन
  • रियल एस्टेट

दशमांश (D10) — करियर कुंडली

11लग्न121बुगु2शु34चंके5शᴿ6789सू10मंरा

धन और संपत्ति मज़बूत

धन का विचार द्वितीय भाव (बचत, पारिवारिक धन), एकादश भाव (आय और लाभ) और समृद्धि के नैसर्गिक कारक गुरु से किया जाता है।

कुल मिलाकर, इस क्षेत्र के शास्त्रीय संकेत मज़बूत हैं।

आपका द्वितीय भाव तुला राशि में है। इसके स्वामी शुक्र आपके एकादश भाव में (कर्क, शत्रु राशि) स्थित हैं।

इस भाव में कोई ग्रह नहीं है, इसलिए मुख्य फल इसका स्वामी देता है।

आपका एकादश भाव कर्क राशि में है। इसके स्वामी चंद्र आपके नवम भाव में (वृषभ, मूलत्रिकोण) स्थित हैं।

  • सूर्य: एकादश भाव में सूर्य प्रभावशाली लोगों, सरकार या ऊँचे पदों के माध्यम से लाभ देता है। आय स्थिर रहती है और महत्वाकांक्षाएँ प्रायः पूरी होती हैं; मित्र अक्सर प्रभावशाली होते हैं।
  • गुरु: एकादश भाव में गुरु स्थिर लाभ, इच्छाओं की पूर्ति, प्रभावशाली मित्र और समय के साथ बढ़ती समृद्धि देता है।
  • शुक्र: एकादश भाव में शुक्र लाभ, विलासिता, अनेक मित्र और स्त्रियों व सामाजिक संपर्कों से सहयोग देता है।
  • केतु: एकादश भाव में केतु अप्रत्याशित लाभ और कम पर सार्थक मित्रताएँ देता है; समय के साथ इच्छाएँ कम होती जाती हैं।
  • नैसर्गिक कारक गुरु आपके एकादश भाव में (कर्क, उच्च) स्थित है। बलवान गुरु अच्छी निर्णय-क्षमता, नैतिकता, समृद्धि और सम्मान देता है।

विवाह और रिश्ते मज़बूत

विवाह का विचार सप्तम भाव, उसके स्वामी, और कारक शुक्र व गुरु से किया जाता है। आपकी नवांश (D9) कुंडली, यानी विवाह की कुंडली, खंड 1 में दी गई है। मांगलिक दोष का उल्लेख नीचे है।

कुल मिलाकर, इस क्षेत्र के शास्त्रीय संकेत मज़बूत हैं।

आपका सप्तम भाव मीन राशि में है। इसके स्वामी गुरु आपके एकादश भाव में (कर्क, उच्च) स्थित हैं।

इस भाव में कोई ग्रह नहीं है, इसलिए मुख्य फल इसका स्वामी देता है।

  • नैसर्गिक कारक शुक्र आपके एकादश भाव में (कर्क, शत्रु राशि) स्थित है।
  • नैसर्गिक कारक गुरु आपके एकादश भाव में (कर्क, उच्च) स्थित है। बलवान गुरु अच्छी निर्णय-क्षमता, नैतिकता, समृद्धि और सम्मान देता है।

मांगलिक स्थिति: उपस्थित।

स्वास्थ्य और जीवन शक्ति संतुलित

स्वास्थ्य का विचार लग्न (शरीर), उसके स्वामी, षष्ठ भाव (रोग और स्वस्थ होना), अष्टम भाव (आयु) तथा सूर्य और चंद्र से किया जाता है। यह चिकित्सा सलाह नहीं है — किसी भी स्वास्थ्य समस्या के लिए डॉक्टर से मिलें।

इस क्षेत्र के संकेत संतुलित हैं — लगातार प्रयास से फल मिलते हैं।

आपका प्रथम भाव कन्या राशि में है। इसके स्वामी बुध आपके द्वादश भाव में (सिंह, मित्र राशि) स्थित हैं।

इस भाव में कोई ग्रह नहीं है, इसलिए मुख्य फल इसका स्वामी देता है।

आपका षष्ठ भाव कुंभ राशि में है। इसके स्वामी शनि आपके चतुर्थ भाव में (धनु, सम राशि) स्थित हैं।

इस भाव में कोई ग्रह नहीं है, इसलिए मुख्य फल इसका स्वामी देता है।

आपका अष्टम भाव मेष राशि में है। इसके स्वामी मंगल आपके अष्टम भाव में (मेष, स्वराशि) स्थित हैं।

  • मंगल: आठवें भाव में मंगल दुर्घटना, सर्जरी और अचानक घटनाओं के प्रति सावधानी माँगता है, और शोध व गूढ़ विषयों में रुचि देता है। इसे मांगलिक दोष में गिना जाता है।
  • नैसर्गिक कारक सूर्य आपके एकादश भाव में (कर्क, मित्र राशि) स्थित है। बलवान सूर्य आत्मविश्वास, अच्छा स्वास्थ्य, मान-सम्मान और नेतृत्व या जनसेवा में सफलता देता है।
  • नैसर्गिक कारक चंद्र आपके नवम भाव में (वृषभ, मूलत्रिकोण) स्थित है। बलवान चंद्रमा भावनात्मक स्थिरता, अच्छी याददाश्त, लोकप्रियता और स्नेही स्वभाव देता है।

शिक्षा और बुद्धि मज़बूत

शिक्षा का विचार चतुर्थ भाव (विद्यालयी शिक्षा), पंचम भाव (बुद्धि) तथा बुद्धि और ज्ञान के ग्रह बुध और गुरु से किया जाता है।

कुल मिलाकर, इस क्षेत्र के शास्त्रीय संकेत मज़बूत हैं।

आपका चतुर्थ भाव धनु राशि में है। इसके स्वामी गुरु आपके एकादश भाव में (कर्क, उच्च) स्थित हैं।

  • शनि: चौथे भाव में शनि घर में कठिन ज़िम्मेदारियाँ, संपत्ति में देरी और माता के स्वास्थ्य की चिंता दे सकता है; परिपक्वता के साथ शांति आती है।

आपका पंचम भाव मकर राशि में है। इसके स्वामी शनि आपके चतुर्थ भाव में (धनु, सम राशि) स्थित हैं।

  • राहु: पाँचवें भाव में राहु अपरंपरागत बुद्धि, सट्टे और तकनीक में रुचि तथा संतान को लेकर कुछ चिंताएँ देता है।
  • नैसर्गिक कारक बुध आपके द्वादश भाव में (सिंह, मित्र राशि) स्थित है। कमज़ोर बुध अनिर्णय, घबराहट या बातचीत में दिक्कतों के रूप में दिख सकता है।
  • नैसर्गिक कारक गुरु आपके एकादश भाव में (कर्क, उच्च) स्थित है। बलवान गुरु अच्छी निर्णय-क्षमता, नैतिकता, समृद्धि और सम्मान देता है।

संतान मज़बूत

संतान का विचार पंचम भाव, उसके स्वामी और गुरु (पुत्र कारक) से किया जाता है।

कुल मिलाकर, इस क्षेत्र के शास्त्रीय संकेत मज़बूत हैं।

आपका पंचम भाव मकर राशि में है। इसके स्वामी शनि आपके चतुर्थ भाव में (धनु, सम राशि) स्थित हैं।

  • राहु: पाँचवें भाव में राहु अपरंपरागत बुद्धि, सट्टे और तकनीक में रुचि तथा संतान को लेकर कुछ चिंताएँ देता है।
  • नैसर्गिक कारक गुरु आपके एकादश भाव में (कर्क, उच्च) स्थित है। बलवान गुरु अच्छी निर्णय-क्षमता, नैतिकता, समृद्धि और सम्मान देता है।

5 आपकी कुंडली के ग्रह

ग्रहराशिअंशनक्षत्र (पद)नक्षत्र स्वामीभावअवस्थास्थिति
लग्नकन्या28° 42′ 30″चित्रा (2)मंगल1——
सूर्यकर्क28° 23′ 42″आश्लेषा (4)बुध11मित्र राशि—
चंद्रवृषभ18° 55′ 48″रोहिणी (3)चंद्र9मूलत्रिकोण—
मंगलमेष27° 29′ 12″कृत्तिका (1)सूर्य8स्वराशि—
बुधसिंह25° 26′ 45″पूर्वा फाल्गुनी (4)शुक्र12मित्र राशि—
गुरुकर्क5° 36′ 23″पुष्य (1)शनि11उच्च—
शुक्रकर्क7° 50′ 32″पुष्य (2)शनि11शत्रु राशि—
शनिधनु26° 08′ 52″पूर्वाषाढ़ा (4)शुक्र4सम राशिवक्री
राहुमकर12° 45′ 12″श्रवण (1)चंद्र5——
केतुकर्क12° 45′ 12″पुष्य (3)शनि11——
यूरेनसधनु12° 14′ 48″मूल (4)केतु4—वक्री
नेपच्यूनधनु18° 28′ 06″पूर्वाषाढ़ा (2)शुक्र4—वक्री
प्लूटोतुला21° 21′ 17″विशाखा (1)गुरु2——

अंश राशि के भीतर के हैं। स्थितियां निरयण (लाहिड़ी) हैं। राहु और केतु हमेशा वक्री होते हैं (मध्यम पात)। यूरेनस, नेपच्यून और प्लूटो केवल संदर्भ के लिए दिखाए गए हैं और पारंपरिक पाराशरी फलादेश में इनका उपयोग नहीं होता।

भाव स्वामी

भावराशिस्वामीस्वामी किस भाव मेंस्थित ग्रह
1कन्याबुधद्वादश भाव (सिंह)—
2तुलाशुक्रएकादश भाव (कर्क)—
3वृश्चिकमंगलअष्टम भाव (मेष)—
4धनुगुरुएकादश भाव (कर्क)शनि
5मकरशनिचतुर्थ भाव (धनु)राहु
6कुंभशनिचतुर्थ भाव (धनु)—
7मीनगुरुएकादश भाव (कर्क)—
8मेषमंगलअष्टम भाव (मेष)मंगल
9वृषभशुक्रएकादश भाव (कर्क)चंद्र
10मिथुनबुधद्वादश भाव (सिंह)—
11कर्कचंद्रनवम भाव (वृषभ)सूर्य, गुरु, शुक्र, केतु
12सिंहसूर्यएकादश भाव (कर्क)बुध

सूर्य अच्छी स्थिति में

एकादश भाव में सूर्य · कर्क, मित्र राशि

सूर्य ग्रहों में राजा हैं और आत्मा के नैसर्गिक कारक (आत्मकारक) माने जाते हैं। ये जीवन-शक्ति, अधिकार, पिता और व्यक्ति के आत्मबोध का प्रतिनिधित्व करते हैं।

कारकत्व: आत्मा और आत्मविश्वास · पिता और सरकार · नेतृत्व और प्रतिष्ठा · हृदय, आँखें और हड्डियाँ

एकादश भाव में सूर्य प्रभावशाली लोगों, सरकार या ऊँचे पदों के माध्यम से लाभ देता है। आय स्थिर रहती है और महत्वाकांक्षाएँ प्रायः पूरी होती हैं; मित्र अक्सर प्रभावशाली होते हैं।

बलवान सूर्य आत्मविश्वास, अच्छा स्वास्थ्य, मान-सम्मान और नेतृत्व या जनसेवा में सफलता देता है।

चंद्र अच्छी स्थिति में

नवम भाव में चंद्र · वृषभ, मूलत्रिकोण

चंद्रमा मन और भावनाओं के स्वामी हैं। वैदिक ज्योतिष में चंद्र राशि और चंद्रमा का नक्षत्र राशिफल, दशा और कुंडली मिलान के केंद्र में होते हैं।

कारकत्व: मन और भावनाएँ · माता और पालन-पोषण · लोकप्रियता · शरीर के तरल, नींद और प्रजनन क्षमता

नवम भाव में चंद्र आस्था, तीर्थयात्रा का प्रेम और भाग्यशाली, उदार स्वभाव देता है। माता अक्सर धार्मिक होती हैं या भाग्य का स्रोत बनती हैं।

बलवान चंद्रमा भावनात्मक स्थिरता, अच्छी याददाश्त, लोकप्रियता और स्नेही स्वभाव देता है।

मंगल सामान्य

अष्टम भाव में मंगल · मेष, स्वराशि

मंगल ग्रहों के सेनापति हैं। ये साहस, ऊर्जा और कर्म करने की प्रेरणा देते हैं, और विवाह मिलान में मांगलिक दोष का आधार भी यही हैं।

कारकत्व: साहस और ऊर्जा · भाई-बहन · संपत्ति और भूमि · रक्त, मांसपेशियाँ और सर्जरी

आठवें भाव में मंगल दुर्घटना, सर्जरी और अचानक घटनाओं के प्रति सावधानी माँगता है, और शोध व गूढ़ विषयों में रुचि देता है। इसे मांगलिक दोष में गिना जाता है।

बुध सहारे की ज़रूरत

द्वादश भाव में बुध · सिंह, मित्र राशि

बुध ग्रहों के राजकुमार हैं — बुद्धिमान, फुर्तीले और संवादप्रिय। ये वाणी, व्यापार, गणित और शिक्षा के कारक हैं।

कारकत्व: बुद्धि और वाणी · व्यवसाय और व्यापार · लेखन और गणित · तंत्रिका तंत्र और त्वचा

द्वादश भाव में बुध विचारों और खर्च को बिखेर सकता है; विदेशी व्यापार, शोध और शांत बौद्धिक काम के अनुकूल है। कागज़ी काम में सावधानी रखें।

कमज़ोर बुध अनिर्णय, घबराहट या बातचीत में दिक्कतों के रूप में दिख सकता है।

गुरु अच्छी स्थिति में

एकादश भाव में गुरु · कर्क, उच्च

गुरु (बृहस्पति) देवताओं के गुरु और सबसे बड़े नैसर्गिक शुभ ग्रह हैं। ये ज्ञान, धर्म, संतान और सौभाग्य लाते हैं।

कारकत्व: ज्ञान और उच्च शिक्षा · संतान और गुरुजन · धन और भाग्य · लीवर और चर्बी

एकादश भाव में गुरु स्थिर लाभ, इच्छाओं की पूर्ति, प्रभावशाली मित्र और समय के साथ बढ़ती समृद्धि देता है।

बलवान गुरु अच्छी निर्णय-क्षमता, नैतिकता, समृद्धि और सम्मान देता है।

शुक्र सामान्य

एकादश भाव में शुक्र · कर्क, शत्रु राशि

शुक्र असुरों के गुरु और प्रेम, सौंदर्य व सुख-सुविधा के ग्रह हैं। पुरुषों की कुंडली में ये विवाह के मुख्य कारक हैं।

कारकत्व: प्रेम और विवाह · कला और सौंदर्य · विलासिता और वाहन · प्रजनन स्वास्थ्य

एकादश भाव में शुक्र लाभ, विलासिता, अनेक मित्र और स्त्रियों व सामाजिक संपर्कों से सहयोग देता है।

शनि सहारे की ज़रूरत

चतुर्थ भाव में शनि · धनु, सम राशि · वक्री

शनि पारंपरिक ग्रहों में सबसे धीमी गति वाले ग्रह और धैर्य के महान शिक्षक हैं। ये अनुशासन का फल देते हैं और साढ़ेसाती के लिए ज़िम्मेदार हैं।

कारकत्व: अनुशासन और कड़ी मेहनत · आयु · सेवक और श्रमिक वर्ग · हड्डियाँ, दाँत और पुराने रोग

चौथे भाव में शनि घर में कठिन ज़िम्मेदारियाँ, संपत्ति में देरी और माता के स्वास्थ्य की चिंता दे सकता है; परिपक्वता के साथ शांति आती है।

पीड़ित शनि देरी, बोझ, अकेलापन और लंबे समय तक चलने वाली समस्याएँ लाता है।

राहु सहारे की ज़रूरत

पंचम भाव में राहु · मकर

राहु चंद्रमा का उत्तरी पात (नोड) है, एक छाया ग्रह। यह इच्छा, महत्वाकांक्षा और लीक से हटकर चीज़ों को बढ़ा देता है, और विदेश व तकनीक से जुड़ा है।

कारकत्व: महत्वाकांक्षा और जुनून · विदेश यात्रा · तकनीक और नवाचार · भ्रम और उलझन

पाँचवें भाव में राहु अपरंपरागत बुद्धि, सट्टे और तकनीक में रुचि तथा संतान को लेकर कुछ चिंताएँ देता है।

पीड़ित राहु भ्रम, धोखा, लत और चिंता लाता है।

केतु अच्छी स्थिति में

एकादश भाव में केतु · कर्क

केतु चंद्रमा का दक्षिणी पात (नोड) है। यह वैराग्य, पूर्वजन्म के कौशल, आध्यात्मिकता और मोक्ष का प्रतिनिधित्व करता है।

कारकत्व: आध्यात्मिकता और मोक्ष · अंतर्ज्ञान · वैराग्य · शोध और गूढ़ विद्याएँ

एकादश भाव में केतु अप्रत्याशित लाभ और कम पर सार्थक मित्रताएँ देता है; समय के साथ इच्छाएँ कम होती जाती हैं।

शुभ स्थिति में केतु अंतर्दृष्टि, आध्यात्मिक गहराई और सूक्ष्म विषयों पर पकड़ देता है।

6 दशा अवधियाँ

विंशोत्तरी दशा ग्रहों की अवधियों का 120 वर्ष का चक्र है, जो आपके जन्म नक्षत्र के स्वामी से शुरू होता है — आपका जन्म नक्षत्र रोहिणी है, जिसके स्वामी चंद्र हैं। जन्म के समय चंद्र महादशा का 3 वर्ष 3 माह 19 दिन शेष था।

आपकी महादशा का क्रम

महादशाआरंभसमाप्ति
चंद्र4 दिस॰ 19833 दिस॰ 1993
मंगल3 दिस॰ 19933 दिस॰ 2000
राहु3 दिस॰ 20003 दिस॰ 2018
गुरुचल रही3 दिस॰ 20183 दिस॰ 2034
शनि3 दिस॰ 20343 दिस॰ 2053
बुध3 दिस॰ 20533 दिस॰ 2070
केतु3 दिस॰ 20702 दिस॰ 2077
शुक्र2 दिस॰ 20772 दिस॰ 2097
सूर्य2 दिस॰ 20974 दिस॰ 2103

राहु महादशा (3 दिस॰ 2000 – 3 दिस॰ 2018)

राहु की दशा तीव्र महत्वाकांक्षा और लीक से हटकर रास्ते लाती है: विदेश से संबंध, तकनीक, राजनीति, मीडिया और अचानक मिलने वाले अवसर। यह आपको तेज़ी से ऊपर उठा सकती है, पर भ्रम, बेचैनी और मोह भी ला सकती है। शॉर्टकट, नशे और बहुत अच्छे लगने वाले सौदों से बचें।

आपकी कुंडली में राहु पंचम भाव में (मकर) स्थित है — इसलिए यह अवधि विशेष रूप से संतान, बुद्धि, रचनात्मकता, प्रेम, मंत्र और पूर्व जन्म के पुण्य को प्रभावित करती है।

राहु महादशा में अंतर्दशाएँ

अंतर्दशाआरंभसमाप्ति
राहु3 दिस॰ 200016 अग॰ 2003
गुरु16 अग॰ 20039 जन॰ 2006
शनि9 जन॰ 200615 नव॰ 2008
बुध15 नव॰ 20084 जून 2011
केतु4 जून 201121 जून 2012
शुक्र21 जून 201222 जून 2015
सूर्य22 जून 201516 मई 2016
चंद्र16 मई 201615 नव॰ 2017
मंगल15 नव॰ 20173 दिस॰ 2018

गुरु महादशा (3 दिस॰ 2018 – 3 दिस॰ 2034)

गुरु की दशा परंपरागत रूप से सबसे सहायक दशाओं में मानी जाती है: ज्ञान, शिक्षा, धन, संतान, गुरुजनों और आस्था में वृद्धि। अक्सर इसी समय विवाह, पदोन्नति और सम्मानजनक भूमिकाएँ मिलती हैं। अति-भोग और ज़रूरत से ज़्यादा ज़िम्मेदारियाँ लेने से बचें; वज़न और लीवर का ध्यान रखें।

आपकी कुंडली में गुरु एकादश भाव में (कर्क, उच्च) स्थित है — इसलिए यह अवधि विशेष रूप से लाभ, आय, बड़े भाई-बहन, मित्र, संपर्क और इच्छाओं की पूर्ति को प्रभावित करती है। आपके लग्न के लिए गुरु आपके चतुर्थ भाव और सप्तम भाव का स्वामी है।

गुरु महादशा में अंतर्दशाएँ

अंतर्दशाआरंभसमाप्ति
गुरु3 दिस॰ 201820 जन॰ 2021
शनि20 जन॰ 20214 अग॰ 2023
बुध4 अग॰ 20239 नव॰ 2025
केतु9 नव॰ 202515 अक्टू॰ 2026
शुक्र15 अक्टू॰ 202615 जून 2029
सूर्य15 जून 20294 अप्रैल 2030
चंद्र4 अप्रैल 20304 अग॰ 2031
मंगल4 अग॰ 20319 जुल॰ 2032
राहु9 जुल॰ 20323 दिस॰ 2034

शनि महादशा (3 दिस॰ 2034 – 3 दिस॰ 2053)

शनि की दशा अनुशासन, धैर्य और परिश्रम का स्थायी फल देती है। यह ज़िम्मेदारी, व्यवस्था, सेवा और दीर्घकालिक परियोजनाएँ लाती है, कभी-कभी देरी और भारी कार्यभार के साथ। यहाँ धीमी और स्थिर चाल ही जीतती है; जोड़ों, दाँतों और पुराने रोगों का ध्यान रखें।

आपकी कुंडली में शनि चतुर्थ भाव में (धनु, सम राशि) स्थित है — इसलिए यह अवधि विशेष रूप से माता, घर, संपत्ति, वाहन, मानसिक शांति और स्कूली शिक्षा को प्रभावित करती है। आपके लग्न के लिए शनि आपके पंचम भाव और षष्ठ भाव का स्वामी है।

शनि महादशा में अंतर्दशाएँ

अंतर्दशाआरंभसमाप्ति
शनि3 दिस॰ 20346 दिस॰ 2037
बुध6 दिस॰ 203715 अग॰ 2040
केतु15 अग॰ 204024 सित॰ 2041
शुक्र24 सित॰ 204123 नव॰ 2044
सूर्य23 नव॰ 20445 नव॰ 2045
चंद्र5 नव॰ 20457 जून 2047
मंगल7 जून 204715 जुल॰ 2048
राहु15 जुल॰ 204822 मई 2051
गुरु22 मई 20513 दिस॰ 2053

बुध महादशा (3 दिस॰ 2053 – 3 दिस॰ 2070)

बुध की दशा पढ़ाई, संवाद, व्यापार, व्यवसाय, लेखन, लेखा-कार्य और तकनीक के लिए अनुकूल है, और मित्रों व संपर्कों को महत्व देती है। निर्णय व्यावहारिक रखें — ज़्यादा सोचना, बिखरा हुआ प्रयास और घबराहट इसकी सामान्य कमियाँ हैं।

आपकी कुंडली में बुध द्वादश भाव में (सिंह, मित्र राशि) स्थित है — इसलिए यह अवधि विशेष रूप से खर्च, हानि, विदेश, नींद, एकांत, दान और मोक्ष को प्रभावित करती है। आपके लग्न के लिए बुध आपके प्रथम भाव और दशम भाव का स्वामी है।

बुध महादशा में अंतर्दशाएँ

अंतर्दशाआरंभसमाप्ति
बुध3 दिस॰ 205330 अप्रैल 2056
केतु30 अप्रैल 205627 अप्रैल 2057
शुक्र27 अप्रैल 205726 फ़र॰ 2060
सूर्य26 फ़र॰ 20602 जन॰ 2061
चंद्र2 जन॰ 20613 जून 2062
मंगल3 जून 206231 मई 2063
राहु31 मई 206318 दिस॰ 2065
गुरु18 दिस॰ 206525 मार्च 2068
शनि25 मार्च 20683 दिस॰ 2070

दशा वर्ष 365.2425 दिनों का माना गया है। प्रत्यंतर दशा चल रही अंतर्दशा के अंतर्गत दी गई है।

7 प्रत्यंतर दशा · योगिनी दशा

प्रत्यंतर दशा

चल रही अंतर्दशा और अगली अंतर्दशा की उप-अवधियाँ (प्रत्यंतर)।

गुरु / शुक्र
अंतर्दशाआरंभसमाप्ति
शुक्र15 अक्टू॰ 202627 मार्च 2027
सूर्य27 मार्च 202714 मई 2027
चंद्र14 मई 20274 अग॰ 2027
मंगल4 अग॰ 202729 सित॰ 2027
राहु29 सित॰ 202723 फ़र॰ 2028
गुरु23 फ़र॰ 20281 जुल॰ 2028
शनि1 जुल॰ 20283 दिस॰ 2028
बुध3 दिस॰ 202820 अप्रैल 2029
केतु20 अप्रैल 202915 जून 2029
गुरु / सूर्य
अंतर्दशाआरंभसमाप्ति
सूर्य15 जून 202930 जून 2029
चंद्र30 जून 202924 जुल॰ 2029
मंगल24 जुल॰ 202910 अग॰ 2029
राहु10 अग॰ 202923 सित॰ 2029
गुरु23 सित॰ 20291 नव॰ 2029
शनि1 नव॰ 202917 दिस॰ 2029
बुध17 दिस॰ 202928 जन॰ 2030
केतु28 जन॰ 203014 फ़र॰ 2030
शुक्र14 फ़र॰ 20304 अप्रैल 2030

योगिनी दशा

36 वर्षों के चक्र वाली आठ योगिनियों की दूसरी दशा पद्धति, जिसे परंपरागत रूप से समय की पुष्टि के लिए विंशोत्तरी के साथ पढ़ा जाता है।

योगिनीग्रहसेतक
उल्काशनि7 दिस॰ 20156 दिस॰ 2021
सिद्धाचालूशुक्र6 दिस॰ 20216 दिस॰ 2028
संकटाराहु6 दिस॰ 20286 दिस॰ 2036
मंगलाचंद्र6 दिस॰ 20366 दिस॰ 2037
पिंगलासूर्य6 दिस॰ 20377 दिस॰ 2039
धान्यागुरु7 दिस॰ 20396 दिस॰ 2042
भ्रामरीमंगल6 दिस॰ 20426 दिस॰ 2046
भद्रिकाबुध6 दिस॰ 20467 दिस॰ 2051
सिद्धा — अंतर्दशा
सिद्धा (शुक्र)6 दिस॰ 202117 अप्रैल 2023
संकटा (राहु)17 अप्रैल 20236 नव॰ 2024
मंगला (चंद्र)6 नव॰ 202416 जन॰ 2025
पिंगला (सूर्य)16 जन॰ 20257 जून 2025
धान्या (गुरु)7 जून 20256 जन॰ 2026
भ्रामरी (मंगल)6 जन॰ 202617 अक्टू॰ 2026
भद्रिका (बुध)17 अक्टू॰ 20267 अक्टू॰ 2027
उल्का (शनि)7 अक्टू॰ 20276 दिस॰ 2028

8 दोष

मांगलिक (कुज) दोष: उपस्थित

मंगल लग्न से 8वें भाव में और चंद्रमा से 12वें भाव में है। शास्त्रीय परिहार कारक मौजूद हैं, जो दोष को कम करते हैं।

  • लग्न से मंगल: भाव 8 मांगलिक भाव
  • चंद्रमा से मंगल: भाव 12 मांगलिक भाव
  • शुक्र से मंगल: भाव 10 मांगलिक भाव नहीं

मिले परिहार कारक

  • मंगल अपनी स्वराशि (मेष) में है।

मांगलिक दोष की जांच मंगल के 1, 2, 4, 7, 8 या 12वें भाव में होने पर की जाती है। परिहार के नियमों पर परंपराओं में मतभेद है; विवाह के निर्णय के लिए कुंडली मिलान से दोनों कुंडलियों की तुलना करें और किसी ज्योतिषी से सलाह लें।

कालसर्प दोष: नहीं है

ग्रह राहु–केतु अक्ष के दोनों ओर बंटे हुए हैं, इसलिए कालसर्प दोष नहीं बनता।

साढ़ेसाती और ढैय्या

शनि अभी मीन में है, जो आपकी चंद्र राशि (वृषभ) से एकादश भाव है। अभी आप पर न साढ़ेसाती है, न ढैय्या।

अवधिसेतकशनि की राशि
अष्टम शनि (ढैय्या)जन्म के समय से ही चल रही15 दिस॰ 1990धनु
साढ़ेसाती17 अप्रैल 199826 मई 2005मेष, वृषभ, मिथुन
उदय (पहला) चरण17 अप्रैल 19987 जून 2000मेष
शिखर (दूसरा) चरण7 जून 200023 जुल॰ 2002वृषभ
अस्त (तीसरा) चरण23 जुल॰ 20028 जन॰ 2003मिथुन
शिखर (दूसरा) चरण8 जन॰ 20037 अप्रैल 2003वृषभ
अस्त (तीसरा) चरण7 अप्रैल 20036 सित॰ 2004मिथुन
अस्त (तीसरा) चरण13 जन॰ 200526 मई 2005मिथुन
कंटक शनि (ढैय्या)1 नव॰ 200610 सित॰ 2009सिंह
शनि की सटीक अवधियाँ1 नव॰ 200610 जन॰ 2007सिंह
शनि की सटीक अवधियाँ16 जुल॰ 200710 सित॰ 2009सिंह
अष्टम शनि (ढैय्या)26 जन॰ 201724 जन॰ 2020धनु
शनि की सटीक अवधियाँ26 जन॰ 201721 जून 2017धनु
शनि की सटीक अवधियाँ26 अक्टू॰ 201724 जन॰ 2020धनु
साढ़ेसाती3 जून 202713 जुल॰ 2034मेष, वृषभ, मिथुन
उदय (पहला) चरण3 जून 202720 अक्टू॰ 2027मेष
उदय (पहला) चरण23 फ़र॰ 20288 अग॰ 2029मेष
शिखर (दूसरा) चरण8 अग॰ 20295 अक्टू॰ 2029वृषभ
उदय (पहला) चरण5 अक्टू॰ 202917 अप्रैल 2030मेष
शिखर (दूसरा) चरण17 अप्रैल 203031 मई 2032वृषभ
अस्त (तीसरा) चरण31 मई 203213 जुल॰ 2034मिथुन
कंटक शनि (ढैय्या)27 अग॰ 203613 जुल॰ 2039सिंह
शनि की सटीक अवधियाँ27 अग॰ 203622 अक्टू॰ 2038सिंह
शनि की सटीक अवधियाँ5 अप्रैल 203913 जुल॰ 2039सिंह
अष्टम शनि (ढैय्या)8 दिस॰ 20464 दिस॰ 2049धनु
शनि की सटीक अवधियाँ8 दिस॰ 20466 मार्च 2049धनु
शनि की सटीक अवधियाँ10 जुल॰ 20494 दिस॰ 2049धनु
साढ़ेसाती7 अप्रैल 20579 मई 2064मेष, वृषभ, मिथुन
उदय (पहला) चरण7 अप्रैल 205728 मई 2059मेष
शिखर (दूसरा) चरण28 मई 205911 जुल॰ 2061वृषभ
अस्त (तीसरा) चरण11 जुल॰ 206113 फ़र॰ 2062मिथुन
शिखर (दूसरा) चरण13 फ़र॰ 20627 मार्च 2062वृषभ
अस्त (तीसरा) चरण7 मार्च 206224 अग॰ 2063मिथुन
अस्त (तीसरा) चरण6 फ़र॰ 20649 मई 2064मिथुन
कंटक शनि (ढैय्या)13 अक्टू॰ 206530 अग॰ 2068सिंह
शनि की सटीक अवधियाँ13 अक्टू॰ 20653 फ़र॰ 2066सिंह
शनि की सटीक अवधियाँ3 जुल॰ 206630 अग॰ 2068सिंह
अष्टम शनि (ढैय्या)16 जन॰ 207615 जन॰ 2079धनु
शनि की सटीक अवधियाँ16 जन॰ 207611 जुल॰ 2076धनु
शनि की सटीक अवधियाँ11 अक्टू॰ 207615 जन॰ 2079धनु
साढ़ेसाती21 मई 2086100 वर्ष के बादमेष, वृषभ
उदय (पहला) चरण21 मई 208610 नव॰ 2086मेष
उदय (पहला) चरण8 फ़र॰ 208718 जुल॰ 2088मेष
शिखर (दूसरा) चरण18 जुल॰ 208831 अक्टू॰ 2088वृषभ
उदय (पहला) चरण31 अक्टू॰ 20885 अप्रैल 2089मेष
शिखर (दूसरा) चरण5 अप्रैल 2089100 वर्ष के बादवृषभ

अवधियों में शनि के वक्री होकर राशि सीमा के आर-पार आने-जाने को शामिल किया गया है। जन्म से 100 वर्ष तक की गणना।

9 योग

कुंडली में बने योग

हम जिन योगों की जांच करते हैं, उनमें से कोई नहीं बना। ऐसा होना आम है और अपने आप में कोई नकारात्मक संकेत नहीं है।

जांचे गए, पर नहीं बने

  • गजकेसरी योग: चंद्र से केंद्र (1, 4, 7 या 10वें भाव) में गुरु। परंपरागत रूप से ज्ञान, प्रतिष्ठा और दूसरों के सहयोग से जुड़ा है।
  • बुधादित्य योग: सूर्य और बुध एक ही राशि में। बुद्धि, संवाद और विश्लेषण क्षमता से जुड़ा है।
  • रुचक योग (पंच महापुरुष): लग्न से केंद्र में अपनी या उच्च राशि में मंगल। साहस, नेतृत्व और शारीरिक बल देता है।
  • भद्र योग (पंच महापुरुष): लग्न से केंद्र में अपनी या उच्च राशि में बुध। बुद्धि, वाक्पटुता और व्यापारिक कौशल देता है।
  • हंस योग (पंच महापुरुष): लग्न से केंद्र में अपनी या उच्च राशि में गुरु। ज्ञान, नैतिकता और सम्मान देता है।
  • मालव्य योग (पंच महापुरुष): लग्न से केंद्र में अपनी या उच्च राशि में शुक्र। सुख-सुविधा, सौंदर्य, कला और विलासिता देता है।
  • शश योग (पंच महापुरुष): लग्न से केंद्र में अपनी या उच्च राशि में शनि। अनुशासन, अधिकार और सहनशीलता देता है।
  • चंद्र-मंगल योग: चंद्र और मंगल एक ही राशि में। कमाने की क्षमता, उत्साह और उद्यमशीलता से जुड़ा है।
  • केमद्रुम योग: चंद्र से दूसरे या बारहवें भाव में कोई ग्रह (सूर्य और राहु-केतु को छोड़कर) नहीं। परंपरागत रूप से संघर्ष या अकेलेपन के दौर का संकेत देता है।
  • अधि योग: बुध, गुरु और शुक्र तीनों चंद्र से छठे, सातवें या आठवें भाव में। नेतृत्व और सुखी जीवन का संकेत देता है।

योगों का फल संबंधित ग्रहों की शक्ति, उनकी दशा और पूरी कुंडली पर निर्भर करता है। इस सूची को केवल शुरुआती संकेत मानें।

10 वर्तमान गोचर

16 अक्टू॰ 2026 को धीमी गति वाले ग्रह कहाँ हैं, आपकी चंद्र राशि से गिनकर:

  • गुरु कर्क में, आपके तृतीय भाव में चुनौतीपूर्ण
    तीसरे भाव में गुरु प्रयासों की गति धीमी कर सकता है और धैर्य की परीक्षा ले सकता है। लगातार काम करते रहें।
  • शनि मीन में, आपके एकादश भाव में अनुकूल
    एकादश भाव में शनि फलदायी समय है — स्थिर लाभ, पहचान और दीर्घकालिक लक्ष्यों की पूर्ति।
  • राहु कुंभ में, आपके दशम भाव में मिश्रित
    दशम भाव में राहु महत्वाकांक्षा और करियर में अपरंपरागत क़दमों को बढ़ावा देता है, कुछ अस्थिरता के साथ।
  • केतु सिंह में, आपके चतुर्थ भाव में चुनौतीपूर्ण
    चौथे भाव में केतु घर में बेचैनी ला सकता है। शांति और परिवार के लिए समय निकालें।

रिपोर्ट के महीने में तेज़ गति वाले ग्रह

  • सूर्य कन्या में, आपके पंचम भाव में चुनौतीपूर्ण
    पाँचवें भाव में सूर्य मन को बेचैन कर सकता है और योजनाएँ अटकी हुई लग सकती हैं। सट्टे से बचें और संतान या रचनात्मक कामों पर शांत मन से ध्यान दें।
  • बुध तुला में, आपके षष्ठ भाव में अनुकूल
    छठे भाव में बुध समस्याएँ सुलझाने के लिए आपकी बुद्धि तेज़ करता है और प्रतिस्पर्धा में चतुराई से आगे निकलने में मदद करता है।
  • शुक्र तुला में, आपके षष्ठ भाव में चुनौतीपूर्ण
    छठे भाव में शुक्र छोटे-मोटे विवाद या भोग-विलास से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याएँ ला सकता है। संयम से मदद मिलती है।
  • मंगल कर्क में, आपके तृतीय भाव में अनुकूल
    तीसरे भाव में मंगल साहस और जीतने का जज़्बा देता है। साहसिक क़दम, खेल-कूद और प्रतिस्पर्धी काम अच्छे चलते हैं।

11 षड्बल (छह प्रकार का बल) · अष्टकवर्ग

षड्बल (छह प्रकार का बल)

षड्बल मापता है कि हर ग्रह के पास अपने फल देने के लिए कितना बल है, विरूप में (60 विरूप = 1 रूप)। जो ग्रह अपने आवश्यक बल के बराबर या उससे अधिक हो, वह अपने फल पूरी तरह देता है; उससे कम होने पर उसके फल कमज़ोर या विलंबित होते हैं।

आपकी कुंडली का सबसे बलवान ग्रह: सूर्य। सबसे निर्बल: शुक्र।

सूर्यचंद्रमंगलबुधगुरुशुक्रशनि
स्थान बल181.4242.2221.4177.2213.5191.4144.8
दिग्बल50.513.739.248.932.32.629.1
काल बल243.472.4159.6193.6189.5128.9104.6
चेष्टा बल48.123.239.338.19.613.349.8
नैसर्गिक बल60.051.417.125.734.342.98.6
दृग्बल (दृष्टि)-32.01.6-1.5-24.8-21.7-22.24.4
कुल (विरूप)551.4404.4475.1458.8457.5356.8341.3
कुल (रूप)9.196.747.927.657.635.955.69
आवश्यक (रूप)5.006.005.007.006.505.505.00
बल अनुपात1.841.121.581.091.171.081.14
क्रम1526374
सभी घटक दिखाएँ
सूर्यचंद्रमंगलबुधगुरुशुक्रशनि
उच्च बल23.954.730.253.559.826.438.0
सप्तवर्गज बल127.5157.5131.393.893.8105.031.9
ओजयुग्म बल (विषम–सम राशि)0.015.030.015.015.030.015.0
केंद्र बल30.015.030.015.030.030.060.0
द्रेष्काण बल0.00.00.00.015.00.00.0
नतोन्नत बल (दिन–रात)50.49.69.660.050.450.49.6
पक्ष बल36.846.336.823.223.223.236.8
त्रिभाग बल60.00.00.00.060.00.00.0
अब्द बल (वर्षेश)0.015.00.00.00.00.00.0
मास बल (मासेश)0.00.00.030.00.00.00.0
वार बल (वारेश)0.00.00.045.00.00.00.0
होरा बल (होरेश)0.00.060.00.00.00.00.0
अयन बल (क्रांति)96.21.453.135.556.055.358.1

बृहत् पाराशर होरा शास्त्र के अनुसार गणना। माध्य गतियों और क्रांति तालिकाओं जैसी छोटी परिपाटियों के कारण अलग-अलग सॉफ़्टवेयर में कुछ विरूपों का अंतर हो सकता है; सबसे अधिक महत्व क्रम का है।

भावबल (भाव का बल)

आपके सबसे बलवान भाव द्वादश भाव और सप्तम भाव हैं; इनके क्षेत्रों में काम प्रायः अधिक सहजता से बनते हैं।

भाव123456789101112
भावेश का बल458.8356.8475.1457.5341.3341.3457.5475.1356.8458.8404.4551.4
दिग्बल60.050.020.00.050.010.030.040.050.030.010.040.0
दृष्टि बल24.529.545.567.443.670.678.322.111.0-20.3-32.0-9.9
कुल (विरूप)543.3436.2540.6524.9434.9422.0565.9537.2417.8468.5382.5581.5
कुल (रूप)9.067.279.018.757.257.039.438.956.967.816.379.69
क्रम384691025117121

अष्टकवर्ग

हर ग्रह द्वारा प्रत्येक राशि को दिए गए शुभ अंक (बिंदु)। कुल योग (सर्वाष्टकवर्ग) में 28 या अधिक अंकों वाली राशियाँ, ग्रहों के उनसे गुज़रने पर, प्रायः अच्छे फल देती हैं; 25 से कम अंकों वाली राशियों में अधिक सावधानी की ज़रूरत होती है।

ग्रहमेषवृषभमिथुनकर्कसिंहकन्यातुलावृश्चिकधनुमकरकुंभमीनΣ
सूर्य34463153654448
चंद्र47432354347349
मंगल34541343523239
बुध35654363735454
गुरु67344545365456
शुक्र65444543435552
शनि35542232334339
कुल (सर्वाष्टकवर्ग)283731302022312331263325337

12 षोडशवर्ग तालिका · भाव चलित (भाव संधि)

षोडशवर्ग तालिका

सभी 16 वर्ग कुंडलियों में आपका लग्न और हर ग्रह किस राशि में है।

लग्नसूर्यचंद्रमंगलबुधगुरुशुक्रशनिराहुकेतु
D1 राशि (लग्न)64215449104
D2 होरा5554444444
D3 द्रेष्काण21269144528
D4 चतुर्थांश31810247617
D7 सप्तांश641271011113612
D9 नवांश61239856817
D10 दशमांश1194101125104
D12 द्वादशांश53911367739
D16 षोडशांश124336351077
D20 विंशांश127971461099
D24 चतुर्विंशांश22721810122
D27 सप्तविंशांश (भांश)5119111351239
D30 त्रिंशांश8812776671212
D40 खवेदांश98811025111212
D45 अक्षवेदांश479679121288
D60 षष्ट्यंश312377371115

1 मेष · 2 वृषभ · 3 मिथुन · 4 कर्क · 5 सिंह · 6 कन्या · 7 तुला · 8 वृश्चिक · 9 धनु · 10 मकर · 11 कुंभ · 12 मीन

भाव चलित (भाव संधि)

आपके सटीक लग्न और दशम (मध्य आकाश) से भाव संधियाँ (श्रीपति पद्धति)। राशि की सीमा के पास स्थित ग्रह यहाँ संपूर्ण राशि भाव कुंडली से अलग भाव में आ सकता है।

भावआरंभमध्यग्रह
1कन्या 13°55′कन्या 28°42′
2तुला 13°55′तुला 29°07′
3वृश्चिक 14°20′वृश्चिक 29°32′
4धनु 14°45′धनु 29°57′शनि, राहु
5मकर 14°45′मकर 29°32′
6कुंभ 14°20′कुंभ 29°07′
7मीन 13°55′मीन 28°42′
8मेष 13°55′मेष 29°07′मंगल
9वृषभ 14°20′वृषभ 29°32′चंद्र
10मिथुन 14°45′मिथुन 29°57′गुरु, शुक्र, केतु
11कर्क 14°45′कर्क 29°32′सूर्य
12सिंह 14°20′सिंह 29°07′बुध
  • चलित कुंडली में गुरु एकादश भाव से दशम भाव में चला जाता है।
  • चलित कुंडली में शुक्र एकादश भाव से दशम भाव में चला जाता है।
  • चलित कुंडली में राहु पंचम भाव से चतुर्थ भाव में चला जाता है।
  • चलित कुंडली में केतु एकादश भाव से दशम भाव में चला जाता है।

13 उपाय और मार्गदर्शन

ज्योतिष में उपायों का उद्देश्य सहायक ग्रहों को बल देना और कष्टकारी ग्रहों को शांत करना है। सबसे सरल उपायों से शुरुआत करें: ग्रह के दिन प्रार्थना, दान और संयम में न कोई खर्च है, न कोई जोखिम।

आपके लग्न के लिए अनुकूल

दिन
बुधवार
दिशा
दक्षिण
देवता
भगवान गणेश

आपके लग्नेश (बुध) का रत्न — पन्ना — परंपरागत रूप से आपके लिए सबसे सुरक्षित रत्न माना जाता है।

रत्न शक्तिशाली होते हैं और गलत ग्रह के लिए पहनने पर उल्टा असर कर सकते हैं। कोई रत्न केवल तभी पहनें जब ज्योतिषी ने आपकी पूरी कुंडली जाँच ली हो, प्रमाणित प्राकृतिक रत्न ही खरीदें, और तबीयत ठीक न लगे तो पहनना बंद कर दें।

जिन ग्रहों को सहारे की ज़रूरत है

बुध

मंत्र: ॐ बुधाय नमः — बुधवार

उपाय: अपनी बात पर क़ायम रहें, काग़ज़ात व्यवस्थित रखें और परंपरा के अनुसार बुधवार को गाय को हरा चारा खिलाएँ।

शनि

मंत्र: ॐ शनैश्चराय नमः — शनिवार

उपाय: समय के पाबंद रहें और अपने लिए काम करने वालों के साथ न्याय करें; शनिवार को सरसों के तेल का दीपक जलाना एक प्रचलित परंपरा है।

राहु

मंत्र: ॐ राहवे नमः — शनिवार

उपाय: शॉर्टकट और नशे से बचें; ध्यान और वंचितों की मदद करना पारंपरिक उपाय हैं।

इस रिपोर्ट के बारे में

यह रिपोर्ट आपके जन्म विवरण पर शास्त्रीय ज्योतिष नियम लागू करती है। यह प्रवृत्तियाँ और समय बताती है, निश्चितताएँ नहीं, और यह पेशेवर चिकित्सा, कानूनी या आर्थिक सलाह का विकल्प नहीं है। गणना: लाहिड़ी अयनांश, संपूर्ण राशि भाव (whole-sign), विंशोत्तरी दशा — हमारा कार्यप्रणाली पेज देखें।

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