3 अक्टूबर 2026 को अयोध्या का चौघड़िया

शनिवार, 3 अक्टूबर 2026, अयोध्या, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

शनिवार, 3 अक्टूबर 2026 को अयोध्या में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण सप्तमी (08:00 तक), नक्षत्र आर्द्रा (01:29, 4 अक्टू॰ तक) और योग वरीयान है। सूर्योदय 05:54 पर और सूर्यास्त 17:45 पर है। राहुकाल 08:52 से 10:21 तक है।

दिन और रात
दिन 05:54 – 17:45
रात 05:54 तक
तिथि
अष्टमी, 05:52 तक
नक्षत्र
आर्द्रा, 01:29 तक
पुनर्वसु
चौघड़िया
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

3 अक्टूबर 2026 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
काल05:54 – 07:23टालें
शुभ07:23 – 08:52शुभ
रोग08:52 – 10:21टालें
उद्वेग10:21 – 11:50टालें
चर11:50 – 13:18सामान्य
लाभ13:18 – 14:47शुभ
अमृत14:47 – 16:16शुभ
काल16:16 – 17:45टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
लाभ17:45 – 19:16शुभ
उद्वेग19:16 – 20:48टालें
शुभ20:48 – 22:19शुभ
अमृत22:19 – 23:50शुभ
चर23:50 – 01:21सामान्य
रोग01:21 – 02:52टालें
काल02:52 – 04:23टालें
लाभ04:23 – 05:54शुभ

3 अक्टूबर 2026 का पंचांग

वारशनिवार
तिथि
कृष्ण सप्तमी 08:00 तक
कृष्ण अष्टमी 05:52, 4 अक्टू॰ तक
कृष्ण नवमी 03:54, 5 अक्टू॰ तक
नक्षत्र
आर्द्रा 01:29, 4 अक्टू॰ तक
पुनर्वसु 00:14, 5 अक्टू॰ तक
योग
वरीयान 15:21 तक
परिघअशुभ 12:32, 4 अक्टू॰ तक
करण
बव 08:00 तक
बालव 18:55 तक
कौलव 05:52, 4 अक्टू॰ तक
तैतिल 16:51, 4 अक्टू॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिकन्या
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:54
सूर्यास्त
17:45
चंद्रोदय
23:11
चंद्रास्त
12:43
दिनमान
11h 51m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
भाद्रपद
मास (पूर्णिमांत)
आश्विन
विक्रम संवत
2083
शक संवत
1948, पराभव संवत्सर
ऋतु
वर्षा
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:17 – 05:05
अभिजीत मुहूर्त
11:26 – 12:13

अशुभ समय

राहुकाल
08:52 – 10:21
यमगंड
13:18 – 14:47
गुलिक काल
05:54 – 07:23

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शनि05:5406:53दिन
गुरु06:5307:53दिन
मंगल07:5308:52दिन
सूर्य08:5209:51दिन
शुक्र09:5110:50दिन
बुध10:5011:50दिन
चंद्र11:5012:49दिन
शनि12:4913:48दिन
गुरु13:4814:47दिन
मंगल14:4715:47दिन
सूर्य15:4716:46दिन
शुक्र16:4617:45दिन
बुध17:4518:46रात
चंद्र18:4619:47रात
शनि19:4720:48रात
गुरु20:4821:48रात
मंगल21:4822:49रात
सूर्य22:4923:50रात
शुक्र23:5000:51रात
बुध00:5101:51रात
चंद्र01:5102:52रात
शनि02:5203:53रात
गुरु03:5304:54रात
मंगल04:5405:54रात

अयनांश 24.2308° (लाहिड़ी)। समय अयोध्या (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चौघड़िया क्या है?

चौघड़िया समय देखने की एक वैदिक पद्धति है, जो गुजरात और राजस्थान में लोकप्रिय है। इसमें दिन और रात को आठ-आठ भागों में बाँटा जाता है। हर भाग का स्वामी एक ग्रह होता है और उसका नाम अमृत, शुभ, लाभ, चर, उद्वेग, काल या रोग होता है।

कौन-सा चौघड़िया सबसे अच्छा है?

अमृत, शुभ और लाभ नए काम की शुरुआत, दस्तावेज़ों पर हस्ताक्षर और खरीदारी के लिए शुभ माने जाते हैं। चर यात्रा के लिए अच्छा है। उद्वेग, काल और रोग में परंपरागत रूप से नई शुरुआत से बचा जाता है।

चौघड़िया का समय हर दिन अलग क्यों होता है?

ये अवधियाँ आपके स्थान पर वास्तविक दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) का आठवाँ भाग होती हैं, इसलिए साल भर सूर्योदय और सूर्यास्त के साथ बदलती रहती हैं।

क्या चौघड़िया और राहु काल एक ही हैं?

नहीं। राहु काल हर दिन एक अशुभ अवधि है। चौघड़िया दिन और रात की सभी सोलह अवधियों का मूल्यांकन करता है।