11 अक्टूबर 2028 को अयोध्या का चौघड़िया

बुधवार, 11 अक्टूबर 2028, अयोध्या, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

बुधवार, 11 अक्टूबर 2028 को अयोध्या में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण अष्टमी (04:55, 12 अक्टू॰ तक), नक्षत्र आर्द्रा (09:29 तक) और योग परिघ है। सूर्योदय 05:58 पर और सूर्यास्त 17:36 पर है। राहुकाल 11:47 से 13:14 तक है।

दिन और रात
दिन 05:58 – 17:36
रात 05:59 तक
तिथि
अष्टमी, 04:55 तक
नवमी
नक्षत्र
आर्द्रा, 09:29 तक
पुनर्वसु
चौघड़िया
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

11 अक्टूबर 2028 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
लाभ05:58 – 07:25शुभ
अमृत07:25 – 08:53शुभ
काल08:53 – 10:20टालें
शुभ10:20 – 11:47शुभ
रोग11:47 – 13:14टालें
उद्वेग13:14 – 14:42टालें
चर14:42 – 16:09सामान्य
लाभ16:09 – 17:36शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग17:36 – 19:09टालें
शुभ19:09 – 20:42शुभ
अमृत20:42 – 22:15शुभ
चर22:15 – 23:47सामान्य
रोग23:47 – 01:20टालें
काल01:20 – 02:53टालें
लाभ02:53 – 04:26शुभ
उद्वेग04:26 – 05:59टालें

11 अक्टूबर 2028 का पंचांग

वारबुधवार
तिथि
कृष्ण अष्टमी 04:55, 12 अक्टू॰ तक
कृष्ण नवमी 03:23, 13 अक्टू॰ तक
नक्षत्र
पुनर्वसु 09:11, 12 अक्टू॰ तक
योग
परिघअशुभ 08:12 तक
शिव 06:19, 12 अक्टू॰ तक
करण
बालव 17:26 तक
कौलव 04:55, 12 अक्टू॰ तक
तैतिल 16:14, 12 अक्टू॰ तक
चंद्र राशि
मिथुन 03:19, 12 अक्टू॰ तक
सूर्य राशिकन्या
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:58
सूर्यास्त
17:36
चंद्रोदय
23:28
चंद्रास्त
12:37
दिनमान
11h 38m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
आश्विन
मास (पूर्णिमांत)
कार्तिक
विक्रम संवत
2085
शक संवत
1950, कीलक संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:19 – 05:09
अभिजीत मुहूर्त
11:24 – 12:10 (बुधवार को पारंपरिक रूप से वर्जित)

अशुभ समय

राहुकाल
11:47 – 13:14
यमगंड
07:25 – 08:53
गुलिक काल
10:20 – 11:47

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
बुध05:5806:56दिन
चंद्र06:5607:55दिन
शनि07:5508:53दिन
गुरु08:5309:51दिन
मंगल09:5110:49दिन
सूर्य10:4911:47दिन
शुक्र11:4712:45दिन
बुध12:4513:43दिन
चंद्र13:4314:42दिन
शनि14:4215:40दिन
गुरु15:4016:38दिन
मंगल16:3817:36दिन
सूर्य17:3618:38रात
शुक्र18:3819:40रात
बुध19:4020:42रात
चंद्र20:4221:44रात
शनि21:4422:46रात
गुरु22:4623:47रात
मंगल23:4700:49रात
सूर्य00:4901:51रात
शुक्र01:5102:53रात
बुध02:5303:55रात
चंद्र03:5504:57रात
शनि04:5705:59रात

अयनांश 24.2590° (लाहिड़ी)। समय अयोध्या (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चौघड़िया क्या है?

चौघड़िया समय देखने की एक वैदिक पद्धति है, जो गुजरात और राजस्थान में लोकप्रिय है। इसमें दिन और रात को आठ-आठ भागों में बाँटा जाता है। हर भाग का स्वामी एक ग्रह होता है और उसका नाम अमृत, शुभ, लाभ, चर, उद्वेग, काल या रोग होता है।

कौन-सा चौघड़िया सबसे अच्छा है?

अमृत, शुभ और लाभ नए काम की शुरुआत, दस्तावेज़ों पर हस्ताक्षर और खरीदारी के लिए शुभ माने जाते हैं। चर यात्रा के लिए अच्छा है। उद्वेग, काल और रोग में परंपरागत रूप से नई शुरुआत से बचा जाता है।

चौघड़िया का समय हर दिन अलग क्यों होता है?

ये अवधियाँ आपके स्थान पर वास्तविक दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) का आठवाँ भाग होती हैं, इसलिए साल भर सूर्योदय और सूर्यास्त के साथ बदलती रहती हैं।

क्या चौघड़िया और राहु काल एक ही हैं?

नहीं। राहु काल हर दिन एक अशुभ अवधि है। चौघड़िया दिन और रात की सभी सोलह अवधियों का मूल्यांकन करता है।